{"_id":"57fff42c4f1c1b4b2c28e78f","slug":"lucknow-or-delhi-all-municipal-heavy","type":"story","status":"publish","title_hn":"लखनऊ हो या दिल्ली, सब पर नगर निगम भारी ","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
लखनऊ हो या दिल्ली, सब पर नगर निगम भारी
ब्यूरो, अमर उजाला/वाराणसी
Updated Fri, 14 Oct 2016 02:23 AM IST
विज्ञापन
करसड़ा प्लांट
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
सरकारी मशीनरी की कार्यप्रणाली की एक बानगी देखिए। हालात बदले न नतीजे। सिर्फ तारीख पर तारीख और फिर एक तारीख। बात करसड़ा कूड़ा प्लांट की है। छह साल का समय और करोड़ों की रकम खर्च होने के बावजूद आज तक यह प्लांट पूरी क्षमता से नहीं चल पाया। वजह, जिम्मेदारों की बेपरवाही। कूड़ा प्रबंधन और प्लांट संचालन की सबसे बड़ी जिम्मेदारी नगर निगम की है लेकिन शहर गंदगी और कचरे से बजबजा रहा है और निगम प्रशासन के जिम्मेदार पूरी बेफिक्री के साथ इस तरह हाथ पर हाथ धरे बैठे हैं मानो केंद्र सरकार के अधिकारियों को गरज होगी तो यहां आकर प्लांट संचालित कराएंगे।
पिछले चार महीने में ही राज्य और केंद्र सरकार के स्तर से इसके लिए कई बार निर्देश दिए जा चुके हैं। केंद्रीय शहरी विकास मंत्रालय के स्वच्छता मिशन के डायरेक्टर एवं संयुक्त सचिव प्रवीण प्रकाश तो अपने पिछले दौर में माह भर के अंदर हर हाल में प्लांट का पूरी क्षमता से संचालन शुरू हो जाने का दावा किया था लेकिन ऐसा हो नहीं पाया। उसके बाद डीएम विजय किरन आनंद सहित अन्य उच्चाधिकारियों ने भी प्लांट का निरीक्षण किया लेकिन नतीजे में कोई बदलाव नहीं आ पाया।
हर बार एक नई तारीख मिलती गई। पहले 30 जून, फिर 5 जुलाई, 15 जुलाई, 30 अगस्त, 05 सितंबर और फिर 30 सितंबर की तारीख तय की गई लेकिन 600 मीट्रिक टन क्षमता वाले करसड़ा प्लांट में कूड़ा निस्तारण अभी बमुश्किल सौ से डेढ़ मीट्रिक टन हो पा रहा है। यह भी तब है जब एनटीपीसी और निजी संस्था आईएलएफएस संयुक्त रूप से इसके संचालन की जिम्मेदारी संभाल रहे हैं। नगर आयुक्त श्रीहरि प्रताप शाही का कहना है कि करसड़ा प्लांट को चलाने में तकनीकी दिक्कतें थीं। अब धीरे-धीरे कूड़ा निस्तारण को बढ़ाया जा रहा है। कोशिश है कि जल्द से जल्द उसे पूरी क्षमता के साथ चलाया जाए।
विज्ञापन
विज्ञापन
पिछले चार महीने में ही राज्य और केंद्र सरकार के स्तर से इसके लिए कई बार निर्देश दिए जा चुके हैं। केंद्रीय शहरी विकास मंत्रालय के स्वच्छता मिशन के डायरेक्टर एवं संयुक्त सचिव प्रवीण प्रकाश तो अपने पिछले दौर में माह भर के अंदर हर हाल में प्लांट का पूरी क्षमता से संचालन शुरू हो जाने का दावा किया था लेकिन ऐसा हो नहीं पाया। उसके बाद डीएम विजय किरन आनंद सहित अन्य उच्चाधिकारियों ने भी प्लांट का निरीक्षण किया लेकिन नतीजे में कोई बदलाव नहीं आ पाया।
विज्ञापन
हर बार एक नई तारीख मिलती गई। पहले 30 जून, फिर 5 जुलाई, 15 जुलाई, 30 अगस्त, 05 सितंबर और फिर 30 सितंबर की तारीख तय की गई लेकिन 600 मीट्रिक टन क्षमता वाले करसड़ा प्लांट में कूड़ा निस्तारण अभी बमुश्किल सौ से डेढ़ मीट्रिक टन हो पा रहा है। यह भी तब है जब एनटीपीसी और निजी संस्था आईएलएफएस संयुक्त रूप से इसके संचालन की जिम्मेदारी संभाल रहे हैं। नगर आयुक्त श्रीहरि प्रताप शाही का कहना है कि करसड़ा प्लांट को चलाने में तकनीकी दिक्कतें थीं। अब धीरे-धीरे कूड़ा निस्तारण को बढ़ाया जा रहा है। कोशिश है कि जल्द से जल्द उसे पूरी क्षमता के साथ चलाया जाए।
विज्ञापन