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जूस पीकर स्वस्थ हुए बाबा जगन्नाथ, भक्तों को दिए दर्शन, बुधवार को निकलेगी रथयात्रा

Wed, 03 Jul 2019 01:08 AM IST
गीतार्जुन गौतम न्यूज डेस्क,अमर उजाला,वाराणसी
न्यूज डेस्क,अमर उजाला,वाराणसी Published by: गीतार्जुन गौतम Updated Wed, 03 Jul 2019 01:08 AM IST
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lord jagannath healthy visions given to devotees jagannath rath yatra 2019 puri varanasi
बाबा जगन्नाथ। - फोटो : अमर उजाला

पिछले एक पखवाड़े से अस्वस्थ चल रहे बाबा जगन्नाथ मंगलवार को स्वस्थ हो गए। परंपरा के अनुसार बाबा को मंगलवार को परवल का जूस पिलाया गया। इसके बाद अब बाबा बड़े भाई बलभद्र और बहन सुभद्रा के साथ बुधवार को नगर भ्रमण पर निकलेंगे। इसके बाद गुरुवार से रथयात्रा का मेला शुरू हो जाएगा।

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भगवान जगन्नाथ का पट सुबह पांच बजे खुला। पुजारी पं राधेश्याम पांडेय द्वारा सुबह विधि विधान के साथ पूजन करने के बाद पट खुला तो उपस्थित भक्तों के जयकारे से पूरा मंदिर परिसर गूंज उठा।
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मंगला आरती के बाद भगवान का पूजन किया गया। पांच ब्राह्मणों ने विष्णु सहस्त्रनाम का वाचन किया। कई तरह के व्यंजनों का प्रसाद चढ़ाया गया, जो भक्तों में बांटा गया। इस दौरान सचिव आलोक शापुरी सहित बड़ी संख्या में भक्त उपस्थित रहे।
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200 से अधिक साल से चली आ रही परंपरा 
काशी में भगवान जगन्नाथ का मंदिर पं बेनीराम ने 1780 में बनवाना शुरू किया, जो लगभग एक दशक में पूरा हो गया। इसके बाद बाबा की रथयात्रा निकालने और मेले की शुरूआत 1802 में हुई। उड़ीसा में इस दौरान आने वाले पहली फसलों का भोग भगवान को चढ़ाया जाता है।

इस दौरान ही पान भी चढ़ता है। वही परंपरा जब काशी में 217 साल पहले शुरू हुई तो यहां भी भगवान को पान का प्रसाद चढ़ने लगा। मंदिर के ट्रस्टी दीपक शापुरी ने बताया कि भगवान को पान का प्रसाद चढ़ाने की परंपरा है।

मुंह में घुल जाता है पान 
औरंगाबाद के गोपाल पान भंडार के कृष्णा चौरसिया ने बताया कि मगही पान और अन्य पान में बहुत अंतर है। मगही पान अगर पीला है तो वह खाने पर मुंह में अपने आप घुल जाता है जबकि अन्य पान को चबाना पड़ता है।

उन्होंने बताया कि सामान्य पान जहां एक हजार रुपये में दो सौ मिल रहे हैं वहीं मगही की कीमत पांच हजार रुपये प्रति 200 पान  हो गई है। रथयात्रा मेला के लिए मगही पान बचाकर रखते हैं। इसके बाद ही मगही पान मिलना बंद हो जाता है, फिर अक्टूबर नवंबर से मिलना शुरू होता है।

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