धरना समाप्त कर 17 मई तक भ्रमण पर करेंगे अविमुक्तेश्वरानंद, विपक्षी दलों के सामने रखा ये प्रस्ताव
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प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के संसदीय क्षेत्र वाराणसी में संत समाज ने उनके खिलाफ चुनावी ताल ठोकी थी। पीएम मोदी के खिलाफ अखिल भारतीय राम राज्य परिषद के उम्मीदवार ने सोमवार को नामांकन पत्र दाखिल किया था। लेकिन मुख्य उम्मीदवार का नामांकन खारिज होने पर स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद नाराज हो गए और धरने पर बैठ गए।
कलेक्ट्रेट परिसर में मंगलवार से धरने पर बैठे स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद ने बुधवार शाम धरना समाप्त कर दिया। इससे पहले एडीएम सिटी विनय कुमार और एसपी सिटी दिनेश सिंह ने उनसे बात की थी, मगर उन्होंने नामांकन बहाल होने तक धरना जारी रखने की बात की थी। देर शाम अधिकारियों से वार्ता के बाद वह काशी भ्रमण के लिए निकल गए।
स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद ने कहा कि परिषद के प्रत्याशी का नहीं, बल्कि किसी भगवान पाठक का नामांकन खारिज हुआ है। 27 अप्रैल के लिए नोटिस जारी किया गया है, जबकि श्रीभगवान ने 29 अप्रैल को नामांकन किया था। ऐसे में हमारे प्रत्याशी का नाम सूची में शामिल कर चुनाव चिह्न दिया जाए।
स्वामी ने कहा कि वह 17 मई तक काशी की सड़कों पर भ्रमण करेंगे। जनता को जागरूक कर लोकतंत्र बचाने का हर संभव प्रयास करेंगे। इस समय देश में तानाशाही चल रही है। यदि सभी विपक्षी दल एक हो जाएं और मतभेद भुलाकर तानाशाही को मिटाएं तो हम समर्थन करेंगे। यदि विपक्षी दल एक न हों तो हम मतदान का बहिष्कार करेंगे और लोगों से भी अपील करेंगे कि वे भी मतदान का बहिष्कार करें।
आरोप लगाया कि काशी का प्रशासन ऊपरी इशारे पर काम कर रहा है। प्रधानमंत्री के सामने सामान्य व्यक्ति खड़ा न हो सके, ऐसा करना सर्वथा अनुचित है। यह अन्याय केवल हमारे प्रत्याशी के साथ नहीं, अपितु कई निर्दल प्रत्याशियों के साथ हो रहा है।