वाराणसी में रह रहे 55 लोगों के बांग्लादेशी होने का शक, एलआईयू ने बंगाल पुलिस से मांगी रिपोर्ट
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देश में अवैध तरीके से रह रहे विदेशी मूल के लोगों के प्रति केंद्र सरकार के सख्त रुख को देखते हुए स्थानीय स्तर पर भी सतर्कता बरती जा रही है। इस क्रम में बांग्लाभाषी 55 लोगों के बांग्लादेशी होने की आशंका पर स्थानीय अभिसूचना इकाई (एलआईयू) ने पश्चिम बंगाल की पुलिस से उनके नाम, निवास स्थान और परिवार की तस्दीक कर रिपोर्ट भेजने के लिए कहा है।
इससे पहले इसी साल जैतपुरा स्थित राजकीय पाश्चात्यवर्ती देखरेख गृह में रह रही एक संवासिनी और देह व्यापार के आरोप में दशाश्वमेध पुलिस द्वारा गिरफ्तार युवती के नाम और पते की तस्दीक होने पर दोनों को वापस बांग्लादेश भेजा गया था।
वाराणसी और आसपास के अन्य जिलों में बड़ी संख्या में बांग्लादेशी नागरिक झुग्गी झोपड़ियों में रह कर रिक्शा चलाने और मजदूरी सहित अन्य काम करते हैं। इनमें से ज्यादातर के पास मतदाता परिचय पत्र और आधार कार्ड जैसे दस्तावेज भी हैं। स्थानीय अभिसूचना इकाई और पुलिस की पूछताछ में यह लोग खुद को बांग्लादेशी नहीं, बल्कि बांग्लाभाषी बताते हैं।
सत्यापन के दौरान इनमें से 55 लोग ऐसे मिले, जिनके पास से मिले दस्तावेजों को लेकर शंका हुई। स्थानीय अभिसूचना इकाई की ओर से पश्चिम बंगाल के वीरभूमि, मुर्शिदाबाद, पश्चिम मेदिनीपुर, मालदा और हुगली जिले की पुलिस को इन लोगों के पास से मिले दस्तावेजों की जांच कर रिपोर्ट भेजने को कहा गया है। रिपोर्ट में यदि इनके पश्चिम बंगाल के निवासी होने की बात की पुष्टि नहीं हुई तो इन्हें वापस बांग्लादेश भेजने की प्रक्रिया शुरू की जाएगी।
आठ मोहल्लों में रहते हैं संदिग्ध
डीजीपी ओम प्रकाश सिंह के निर्देश पर हाल ही में पुलिस ने जिले भर में झुग्गी झोपड़ियों में रहने वाले लोगों का सत्यापन किया था। तब कज्जाकपुरा, अलईपुरा, भदऊं चुंगी, राजघाट, बेनिया, बजरडीहा, नगवा, लल्लापुरा और रेलवे स्टेशनों के आसपास रहने वाले तीन हजार से ज्यादा लोग अपने बारे में ठोस जानकारी नहीं दे सके थे।
उनके पास से मिले दस्तावेज भी संदिग्ध प्रतीत हुए। इन लोगों का कहना था कि वह बांग्लादेशी नहीं है, बल्कि बिहार, झारखंड और पश्चिम बंगाल की घुमंतू जनजातियों से उनका ताल्लुक है। फिलहाल पुलिस ने इनके खिलाफ कोई कार्रवाई नहीं की है और इनकी गतिविधियों की निगरानी की जा रही है। जल्द ही खुफिया इकाइयां इनका दोबारा सत्यापन करेंगी।
पाकिस्तान से बनारस आए और लापता हो गए
बीते वर्षों में कुछ लोग पाकिस्तान से घूमने के लिए प्रदेश के विभिन्न शहरों से होते हुए बनारस आए और फिर लापता हो गए। यह कौन लोग थे और कहां गए, इसका ब्योरा किसी के पास नहीं है। इस संबंध में स्थानीय अभिसूचना इकाई के अधिकारियों ने बताया कि जिले में पाकिस्तान से आए सात लोग दीर्घावधिक वीजा (लांग टर्म वीजा) के आधार पर रह रहे हैं। इन सभी का रिकार्ड मौजूद है। पाकिस्तान से बनारस आए अन्य किसी के संबंध में जानकारी नहीं है।