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51 दिवसीय आयोजन: कोरोना के खात्मे के लिए पहली बार काशी में लक्षचंडी महायज्ञ, 500 ब्राह्मण लेंगे भाग
Fri, 14 Jan 2022 09:49 PM IST
उत्पल कांत
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, वाराणसी
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, वाराणसी
Published by: उत्पल कांत
Updated Fri, 14 Jan 2022 09:49 PM IST
सार
कोरोना के खात्मे और विश्वकल्याण की कामना से मोक्षदायिनी काशी के केदारखंड में पहली बार 51 दिवसीय सौ कुंडीय लक्षचंडी महायज्ञ 18 जनवरी से होगा।महायज्ञ में दुर्गासप्तशती के एक लाख पाठों का जप एवं दस हजार पाठों से हवन कुंड में आहुतियां दी जाएंगी।
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स्वामी प्रखर महाराज
- फोटो : अमर उजाला
विस्तार
स्वामी प्रखर महाराज ने बताया कि कोरोना के खात्मे और विश्वकल्याण की कामना से मोक्षदायिनी काशी के केदारखंड में पहली बार 51 दिवसीय सौ कुंडीय लक्षचंडी महायज्ञ 18 जनवरी से होगा। खोजवा के द्वारिकाधीश मंदिर में 500 ब्राह्मण महायज्ञ संपन्न कराएंगे।
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शुक्रवार को प्रखर महाराज ने बताया कि महायज्ञ से जो शक्तिशाली आध्यात्मिक ऊर्जा सृजित होगी उसके फलस्वरूप कोरोना महामारी के शमन के साथ-साथ संकल्पित उद्देश्यों के सकारात्मक परिणाम सुनिश्चित हैं। प्रखर महाराज के शिष्य पूर्णानंदपुरी ने बताया कि शुभारंभ शोभायात्रा के साथ होगा और नौ मार्च तक चलेगा।
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महायज्ञ में दुर्गासप्तशती के एक लाख पाठों का जप एवं दस हजार पाठों से हवन कुंड में आहुतियां दी जाएंगी। 9 मार्च को पूर्णाहुति होगी। इस दौरान महायज्ञ समिति के अध्यक्ष कृष्ण कुमार खेमका, कोषाध्यक्ष सुनील नेमानी, सचिव संजय अग्रवाल, नवीन महेश्वरी, अनिल अरोड़ा मौजूद रहे।
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बहेगी भागवत और काशी कथा की गंगा
स्वामी प्रखर महाराज ने बताया कि आठ से 16 फरवरी तक पं. विश्वेश्वर शास्त्री द्रविड़ काशी कथा, 19 से 26 फरवरी तक भागवत कथा मर्मज्ञ रमेश भाई ओझा श्रीमद्भागवत कथा एवं 28 से 8 मार्च तक जगद्गुरु डॉ. राघवाचार्य महाराज वाल्मीकि रामायण कथा का श्रवण कराएंगे। स्वामी प्रखर महाराज ने श्रद्धालुओं से आग्रह किया है कि कोविड प्रोटोकॉल का पालन करते हुए महायज्ञ में शामिल हों।