सावधान: लालच देकर बच्चों को ले जाने वाले बिचौलिये सक्रिय, गैंग की तलाश में पुलिस ने बनाई 21 टीमें
मजदूरी कराने के लिए तमिलनाडु ले जाए जा रहे सोनभद्र के 11 बच्चों को छत्तीसगढ़ पुलिस की ओर से मुक्त कराए जाने के बाद जिले की पुलिस अलर्ट हो गई है। पुलिस अधीक्षक आशीष श्रीवास्तव के निर्देश पर पुलिस की 21 टीमें लालच देकर बच्चों को ले जाने वाले गैंग के सदस्यों की तलाश में जुटी हैं।
नक्सल प्रभावित क्षेत्र के गरीब लोगों को लालच देकर उनके बच्चों को मजदूरी के लिए दिल्ली, चुन्नई, कलकत्ता, मुंबई, पुणे, पंजाब ले जाने वाले बिचौलियों की पुलिस ने तलाश शुरू कर दी है। बिचौली काम दिलाने के नाम पर मोटी रकम लेकर बैठ जाते हैं। 12 दिन पूर्व छत्तीसगढ़ पुलिस ने बच्चों को बरामद कर इसका खुलासा किया है।
11 नवंबर को बभनी और बीजपुर थाना क्षेत्र में दो लोग 11 बच्चों को बस में बैठाकर तमिलनाडु ले जा रहे थे लेकिन छत्तीसगढ़ में वहां की पुलिस ने बच्चों को मुक्त कराया था और बच्चों को बाल कल्याण समिति सूरजपुर को सौंप दिया था। वहां के बाल कल्याण समिति के अध्यक्ष ने मुक्त करा गए बभनी थाना क्षेत्र के जिगनहवा गांव निवासी तीन, बीजपुर थाना क्षेत्र के सिरसोती गांव निवासी आठ बच्चों के घरवालों के बारे में पता करवा कर बाल कल्याण समिति सोनभद्र के माध्यम से दस बच्चों को उनके अभिभावकों की सुपुर्दगी में दे दिया। जबकि एक बच्चे का कोराना संक्रमित होने के कारण अस्पताल में उपचार चल रहा है।
उल्लेखनीय है कि बच्चों को मजदूरी के लिए ले जाने वाले लोगों में महिलाएं भी शामिल हैं। पिछले माह मधुपुर क्षेत्र से दो महिलाएं नाबालिग दो लड़कियों को बहला फुसला कर उन्हें मुंबई ले जाने के लिए एक व्यक्ति को सुपुर्द कर दिया था। हालांकि पुलिस की सक्रियता से किशोरियां सुरक्षित अपने घर लौट गईं। इस प्रकरण में सदर कोतवाली पुलिस दो महिलाओं समेत तीन लोगों के खिलाफ अपहरण समेत अन्य धाराओं में केस दर्ज कर खोजबीन कर रही है।
मजदूरी कराने के लिए लालच देकर बच्चों को गैर प्रांतों में ले जाने वाले लोगों को गिरफ्तार करने का निर्देश दिया गया है। इस कार्य में 21 थाना क्षेत्रों में एक-एक टीम बनाई गई है जो बच्चों को ले जाने वालों को चिह्नित करने में जुटी है। अगर कोई संदिग्ध व्यक्ति किसी के बच्चों को काम कराने के लिए ले जाने को कहता है तो कदापि न जाने दें और पुलिस को सूचना दें। -आशीष श्रीवास्तव, पुलिस अधीक्षक