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अब काशीनाथ ने लौटाया साहित्य अकादमी सम्मान

Sat, 17 Oct 2015 02:07 AM IST
ब्यूरो/अमर उजाला, वाराणसी
ब्यूरो/अमर उजाला, वाराणसी Updated Sat, 17 Oct 2015 02:07 AM IST
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Kashinath has now returned honor Sahitya Academy
दादरी कांड जैसी घटनाओं का वैचारिक विरोध अब प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के संसदीय क्षेत्र वाराणसी तक पहुंच गया है। ऐसी घटनाओं से आहत होकर प्रसिद्ध कथाकार काशीनाथ सिंह ने भी शुक्रवार की शाम केंद्र सरकार की नीतियों के विरोध में साहित्य अकादमी पुरस्कार धनराशि सहित लौटाने की घोषणा कर दी। ‘रेहन पर रग्घू’ उपन्यास के लिए उन्हें वर्ष 2011 में यह पुरस्कार मिला था। हालांकि उन्होंने सम्मान लौटाने की तिथि और समय की जानकारी नहीं दी, लेकिन कहा कि जल्द ही वे इसकी प्रक्रिया शुरू कर देंगे। इसके तहत उन्हें एक लाख रुपये, स्मृति चिह्न और प्रशस्ति पत्र प्रदान किया गया था। 
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शाम करीब पांच बजे ब्रिज इन्क्लेव स्थित अपने आवास पर उन्होंने पत्रकारों से बातचीत में कहा कि सांप्रदायिक और फासीवादी शक्तियां तीन दशक से भारतीय समाज और लोकतंत्र को नियंत्रण में लेकर उसे अपनी राजनीतिक आकांक्षाओं के अनुरूप गढ़ने की कोशिश कर रही हैं। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का नाम लिए बिना कहा कि ऐसी ताकतों ने केंद्रीय सत्ता में आने के बाद पिछले एक वर्ष में अपने एजेंडे को लागू करने में कोई कोर कसर नहीं छोड़ी है। इससे समाज और राजनीति की लोकतांत्रिकता, धर्मनिरपेक्षता दोनों
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गहरे संकट में है। साहित्य अकादमी पुरस्कार वापस करने की घोषणा के बाद कथाकार ने कहा कि देश में सरकारी सम्मानों और पदवियों की वापसी इसी दुख और क्रोध की एक अभिव्यक्ति के रूप में देखी जानी चाहिए। साहित्य अकादमी स्वायत्त संस्था है उसे खुलकर भारतीय लोकतंत्र के संवैधानिक मूल्यों और लेखकों की स्वतंत्रता का पक्ष लेना चाहिए। यदि इसमें कोई कमी रही है और लेखकों ने विरोध स्वरूप अपने सम्मान लौटाए हैं तो अकादमी को इसे समझना होगा। भारतीय भाषाओं के लेखकों के सम्मान लौटाने पर अनेक केंद्रीय मंत्रियों और सत्ताधारी दल के बड़े नेताओं के गैर जिम्मेदाराना और अपमानजनक बयानों पर भी उन्होंने नाराजगी जताई। कहा कि ऐसे अपमानजनक बयानों से हम क्षुब्ध हैं और उनकी भर्त्सना करते हैं।
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