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काशी विश्वनाथ दरबार हुआ डिजिटल, अब घर बैठे इस एप से बुक करा सकेंगे आरती के टिकट

Thu, 31 May 2018 02:05 PM IST
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, वाराणसी
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, वाराणसी Updated Thu, 31 May 2018 02:05 PM IST
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Kashi vishwanath temple became digital and book arti ticket from home
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बाबा श्री काशी विश्वनाथ का दरबार भी अब डिजिटल हो गया है। मंदिर प्रशासन ने श्री काशी विश्वनाथ आरती बुकिंग एप लांच कर दिया है। इसके जरिए अब घर बैठे कहीं से भी बाबा दरबार की मंगला आरती से शयन आरती तक के टिकट बुक किए जा सकेंगे।
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जल्द ही एप के माध्यम से बाबा के लाइव दर्शन, पूजा-पाठ एवं अन्य धार्मिक अनुष्ठान की सुविधाएं भी ऑनलाइन करने की तैयारी है। श्री काशी विश्वनाथ मंदिर के विस्तारीकरण के साथ ही उसके डिजिटलाइजेशन की प्रक्रिया चल रही है।
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मुख्य कार्यपालक अधिकारी (सीईओ) विशाल सिंह ने बताया कि देश-दुनिया से यहां आने वाले श्रद्धालुओं की सुविधा और सहूलियत के लिए श्री काशी विश्वनाथ आरती बुकिंग एप लांच किया गया है। यह एप गूगल प्ले स्टोर पर श्री काशी विश्वनाथ आरती बुकिंग के नाम से उपलब्ध है।
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इस एप को डाउनलोड करके कोई भी व्यक्ति अपना अकाउंट क्रिएट कर सकता है और इसकी ऑनलाइन सुविधाओं का लाभ उठा सकता है। एप की मदद से बाबा श्री काशी विश्वनाथ की मंगला आरती, भोग आरती, सप्तऋषि आरती एवं शयन आरती के दर्शन के टिकट की बुकिंग के लिए डेढ़ सौ और तीन सौ रुपये का ऑनलाइन भुगतान करना होगा।

यह एप अभी और विकसित किया जा रहा है। इसके जरिए श्री काशी विश्वनाथ मंदिर में आने वाले भक्त मंदिर के गेस्ट हाउस की बुकिंग भी करवा सकेंगे। जल्द ही एप के जरिए बाबा के लाइव दर्शन सहित अन्य सुविधाएं मुहैया कराई जाएंगी। 

बुकिंग के पहले चेक करेगा उपलब्धता

Kashi vishwanath temple became digital and book arti ticket from home
काशी विश्वनाथ मंदिर
श्री काशी विश्वनाथ आरती बुकिंग एप की खासियत यह है कि यह किसी भी तारीख में उपलब्धता के आधार पर आरती दर्शन की उतनी ही बुकिंग स्वीकार करेगा, जितना कि उस तारीख में मंदिर की निर्धारित क्षमता के अनुरूप भक्तों के बैठने की जगह होगी।

दरअसल, अब तक यह होता रहा है कि मंदिर गर्भगृह के आसपास चारों पहर की आरती में निर्धारित भक्तों की संख्या से ज्यादा टिकटों की बुकिंग कर दी जाती थी।

इससे अक्सर अव्यवस्था उत्पन्न हो जाती थी। कर्मचारियों की मिलीभगत से बिना टिकट के भी भक्तों को आरती दर्शन के लिए बैठा दिया जाता था। नई व्यवस्था से अब ऐसी स्थितियां उत्पन्न नहीं होंगी। 
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