बाबा दरबार में सन्नाटा, लौटाए गए नियमित दर्शनार्थी, कोविड निगेटिव रिपोर्ट के बाद ही मिल रहा प्रवेश
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कोविड निगेटिव रिपोर्ट के साथ दर्शन की व्यवस्था से बाबा विश्वनाथ और मां अन्नपूर्णा के दरबार में सन्नाटा पसरा है। कोविड टेस्ट की रिपोर्ट नहीं होने के कारण नियमित श्रद्धालुओं को बैरंग ही मंदिर से लौटा दिया गया। बृहस्पतिवार को श्री काशी विश्वनाथ मंदिर का नजारा बदला-बदला रहा। सुबह छह बजे से गेट नंबर चार से श्रद्धालुओं का प्रवेश कोविड रिपोर्ट की जांच के बाद शुरू हुआ।
काफी संख्या में नियमित श्रद्धालुओं को सुरक्षाकर्मियों द्वारा बैरंग लौटा दिया गया। मंदिर में प्रवेश के अन्य सभी द्वार बंद कर दिए गए हैं। गेट नंबर चार के अलावा अन्य किसी भी द्वार से श्रद्धालुओं को प्रवेश नहीं दिया जा रहा है। मंदिर प्रशासन के आंकड़ों के अनुसार देर शाम तक लगभग ढाई सौ श्रद्धालुओं ने दर्शन-पूजन किया।
वहीं आसपास के जिलों व प्रदेश से आए श्रद्धालुओं को भी कोविड रिपोर्ट नहीं होने के कारण निराश होकर लौटना पड़ा। अन्नपूर्णा मंदिर में भी कमोवेश यही स्थिति रही। श्री काशी विश्वनाथ मंदिर में आने वाले श्रद्धालु ही अन्नपूर्णा मंदिर में दर्शन-पूजन के लिए जा सके। वहां भी श्रद्धालुओं को बकायदा जांच के बाद ही प्रवेश दिया जा रहा था। लॉकडाउन के बाद यह दूसरा मौका है जब कोरोना संक्रमण के कारण मंदिर में दर्शन पूजन के सख्त इंतजाम किए गए हैं।
नियमित दर्शनार्थी हुए निराश
विश्वनाथ गली में पसरा सन्नाटा, दुकानों के शटर डाउन
शिव भक्तों और यात्रियों से गुलजार रहने वाली विश्वनाथ गली में बृहस्पतिवार को सन्नाटा पसरा था। बढ़ते कोरोना संक्रमण के कारण श्रद्धालुओं घटती संख्या से दुकानों पर ग्राहक नहीं पहुंच रहे हैं। वहीं संक्रमण की रफ्तार भी बहुत तेज है, इसको देखते हुए विश्वनाथ गली की अधिकांश दुकानों के शटर डाउन रहे और गली में सन्नाटा पसरा रहा।
संकटमोचन मंदिर में रिपोर्ट दिखाने के बाद मिला प्रवेश
संकटमोचन हनुमान जी के दरबार में कोरोना संक्रमण को लेकर सख्ती बढ़ा दी गई है। कोविड रिपोर्ट दिखाने के बाद ही श्रद्धालुओं को मंदिर में प्रवेश दिया गया। हालत यह रही कि नियमित श्रद्धालुओं को दरवाजे से ही निराश होकर लौटना पड़ा। बृहस्पतिवार को संकटमोचन हनुमान जी के प्रवेश द्वार को बंद कर दिया गया।
प्रवेश द्वार पर तैनात सुरक्षाकर्मियों को कोविड रिपोर्ट दिखाने के बाद ही श्रद्धालुओं के लिए दरवाजा खोला जा रहा था। नियमित दर्शन करने वाले श्रद्धालु जब पहुंचे तो उन्हें दरवाजे की चौखट पर ही शीश नवाकर लौटना पड़ा। मंदिर में देर शाम तक 25 श्रद्धालुओं ने ही दर्शन किए थे। इसमें से अधिकांश बाहरी श्रद्धालु ही थे।