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काशी विश्वनाथ धाम से हटाई दुर्मुख विनायक की प्रतिमा
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वाराणसी। काशी विश्वनाथ धाम में नया विवाद सामने आया है। स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद ने काशी खंडोक्त दुर्मुख विनायक के मंदिर को तोड़कर प्रतिमा हटाने का आरोप लगाया है। वहीं, मंदिर प्रशासन का कहना है कि निर्माण कार्य में बाधा आने के कारण प्रतिमा को शास्त्रोक्त विधि से हटाकर पूजा की जा रही है। उधर, काशी विद्वत परिषद ने मंदिर प्रशासन से स्थलीय निरीक्षण की मांग की है।
शंकराचार्य स्वामी स्वरूपानंद सरस्वती के शिष्य स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद ने सोमवार को आरोप लगाया कि काशी विश्वनाथ धाम में स्थित दुर्मुख विनायक मंदिर को तोड़कर प्रतिमा गायब कर दी गई। यह मामला दुखदायी है और मंदिर प्रशासन की यह मनमानी किसी भी कीमत पर बर्दाश्त नहीं की जाएगी। दुर्मुख विनायक मंदिर काशी खंडोक्त मंदिर में शामिल था। वह पौराणिक पंच विनायक मंदिरों में से एक था। उसमें दर्शन-पूजन करने के बाद ही काशी की यात्राएं आरंभ होती थीं। उस मंदिर को तोड़ना और मूर्ति को हटा देना हम जैसे सनातनधर्मी स्वीकार नहीं करेंगे। इसके लिए हम आवाज उठाते रहेंगे।
उधर, काशी विद्वत परिषद के मंत्री डॉ. रामनारायण द्विवेदी ने कहा कि मामला संज्ञान में आया है। काशी खंडोक्त मंदिरों के साथ छेड़छाड़ उचित नहीं है। हम लोग इस मामले में मंदिर प्रशासन से स्थलीय निरीक्षण की मांग करेंगे और उसके बाद निर्णय लिया जाएगा।
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मकान के अंदर थी प्रतिमा
मंदिर के मुख्यकार्यपालक अधिकारी विशाल सिंह का कहना है दुर्मुख विनायक की प्रतिमा मकान के अंदर थी। वहां कोई मंदिर नहीं था। यह मकान काशी विश्वनाथ धाम के निर्माण के दायरे में था, इसलिए वहां से प्रतिमा को शास्त्रोक्त विधि से हटाया गया है। दुर्मुख विनायक की निरंतर पूजा शास्त्रियों द्वारा कराई जा रही है। मंदिर तोड़ने और प्रतिमा को गायब करने का आरोप निराधार है।
मंदिर निर्माण पर लगनी चाहिए रोक
स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद ने कहा कि संकट काल में मंदिरों का निर्माण किसी भी दशा में उचित नहीं है। पूरा देश महामारी की चपेट में है और सरकार मंदिर बनवा रही है। मंदिर निर्माण अच्छा काम है, लेकिन निर्माण के लिए सहज परिस्थितियों की प्रतीक्षा करनी चाहिए। सरकारों से अनुरोध है कि वह पहले से बने मंदिरों में पूजा, सेवा और दर्शन का अवसर प्रदान करे। हम मंदिर विरोधी नहीं है, लेकिन महामारी समाप्त होने के बाद निर्माण आरंभ होना चाहिए, ताकि सनातन धर्मी कारसेवा कर सकें और धर्माचार्य वहां जाकर पूजा, उपासना, उत्सव आदि के द्वारा सुंदर वातावरण बना सकें।
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शंकराचार्य स्वामी स्वरूपानंद सरस्वती के शिष्य स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद ने सोमवार को आरोप लगाया कि काशी विश्वनाथ धाम में स्थित दुर्मुख विनायक मंदिर को तोड़कर प्रतिमा गायब कर दी गई। यह मामला दुखदायी है और मंदिर प्रशासन की यह मनमानी किसी भी कीमत पर बर्दाश्त नहीं की जाएगी। दुर्मुख विनायक मंदिर काशी खंडोक्त मंदिर में शामिल था। वह पौराणिक पंच विनायक मंदिरों में से एक था। उसमें दर्शन-पूजन करने के बाद ही काशी की यात्राएं आरंभ होती थीं। उस मंदिर को तोड़ना और मूर्ति को हटा देना हम जैसे सनातनधर्मी स्वीकार नहीं करेंगे। इसके लिए हम आवाज उठाते रहेंगे।
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उधर, काशी विद्वत परिषद के मंत्री डॉ. रामनारायण द्विवेदी ने कहा कि मामला संज्ञान में आया है। काशी खंडोक्त मंदिरों के साथ छेड़छाड़ उचित नहीं है। हम लोग इस मामले में मंदिर प्रशासन से स्थलीय निरीक्षण की मांग करेंगे और उसके बाद निर्णय लिया जाएगा।
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मकान के अंदर थी प्रतिमा
मंदिर के मुख्यकार्यपालक अधिकारी विशाल सिंह का कहना है दुर्मुख विनायक की प्रतिमा मकान के अंदर थी। वहां कोई मंदिर नहीं था। यह मकान काशी विश्वनाथ धाम के निर्माण के दायरे में था, इसलिए वहां से प्रतिमा को शास्त्रोक्त विधि से हटाया गया है। दुर्मुख विनायक की निरंतर पूजा शास्त्रियों द्वारा कराई जा रही है। मंदिर तोड़ने और प्रतिमा को गायब करने का आरोप निराधार है।
मंदिर निर्माण पर लगनी चाहिए रोक
स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद ने कहा कि संकट काल में मंदिरों का निर्माण किसी भी दशा में उचित नहीं है। पूरा देश महामारी की चपेट में है और सरकार मंदिर बनवा रही है। मंदिर निर्माण अच्छा काम है, लेकिन निर्माण के लिए सहज परिस्थितियों की प्रतीक्षा करनी चाहिए। सरकारों से अनुरोध है कि वह पहले से बने मंदिरों में पूजा, सेवा और दर्शन का अवसर प्रदान करे। हम मंदिर विरोधी नहीं है, लेकिन महामारी समाप्त होने के बाद निर्माण आरंभ होना चाहिए, ताकि सनातन धर्मी कारसेवा कर सकें और धर्माचार्य वहां जाकर पूजा, उपासना, उत्सव आदि के द्वारा सुंदर वातावरण बना सकें।