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महात्मा गांधी ने यहीं बनाई थी आजादी की रणनीति, 100 साल का हो जाएगा ब्रिटिश शासन का ये भारतीय विवि

Sat, 18 Jan 2020 12:07 PM IST
गीतार्जुन गौतम आलोक कुमार त्रिपाठी, अमर उजाला नेटवर्क, वाराणसी
आलोक कुमार त्रिपाठी, अमर उजाला नेटवर्क, वाराणसी Published by: गीतार्जुन गौतम Updated Sat, 18 Jan 2020 12:07 PM IST
सार

  • राष्ट्रपिता महात्मा गांधी के स्वर्णिम सपनों पर खड़ा विश्वविद्यालय महात्मा गांधी काशी विद्यापीठ 30 जनवरी को बसंत पंचमी के दिन 100वें स्वर्णमयी वर्ष में प्रवेश करेगा।
  • इसके साथ ही काशी विद्यापीठ अब दसवां ऐसा विश्वविद्यालय बन जाएगा, जिसका 100 साल पुराना इतिहास होगा।
  • इससे पहले बनारस हिंदू विश्वविद्यालय, कोलकाता विश्वविद्यालय, मद्रास विश्वविद्यालय, बंबई विश्वविद्यालय, इलाहाबाद विश्वविद्यालय, मैसूर विश्वविद्यालय, पटना विश्वविद्यालय, उस्मानिया विश्वविद्यालय, अलीगढ़ विश्वविद्यालय और लखनऊ विश्वविद्यालय सौ सालों का सफर पूरा कर चुके हैं।

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Kashi Vidyapeeth will become 100 years old on January 30, first Indian university of British rule
महात्मा गांधी काशी विद्यापीठ - फोटो : अमर उजाला

महात्मा गांधी काशी विद्यापीठ की स्थापना असहयोग आंदोलन के समय बसंत पंचमी के दिन 10 फरवरी 1921 को हुई थी। राष्ट्ररत्न बाबू शिव प्रसाद गुप्त ने विश्वविद्यालय की स्थापना के लिए भूमि और 10 लाख रुपये देकर श्री हर प्रसाद शिक्षा निधि की स्थापना की। विश्वविद्यालय की नींव राष्ट्रपिता महात्मा गांधी ने रखी थी।

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महात्मा गांधी के स्वावलंबन और स्वराज के आह्वान से प्रेरित होकर ब्रिटिश शासनकाल में भारतीयों द्वारा स्थापित यह पहला आधुनिक विश्वविद्यालय था। इसकी स्थापना में अंग्रेजों की कोई मदद नहीं ली गई थी। गुजरात विद्यापीठ व जामिया इस्लामिया के समकालीन यह विश्वविद्यालय पूरी तरह से ब्रिटिश अधिकारियों के नियंत्रण से भी परे था। 1947 से पहले भी भारतीय शिक्षाविद और राष्ट्रप्रेमी ही इसका पूरा प्रबंधन देखते थे।

Kashi Vidyapeeth will become 100 years old on January 30, first Indian university of British rule

जुलाई 1963 में इसे विश्वविद्यालय अनुदान आयोग द्वारा मानद विश्वविद्यालय घोषित किया गया। 15 जनवरी 1975 से इसे चार्टर्ड विश्वविद्यालय का दर्जा दे दिया गया। तभी से इसे राज्य विश्वविद्यालय का दर्जा भी प्राप्त है। प्रारंभ में यहां शास्त्री में हिंदी, अंग्रेजी, संस्कृत, दर्शन, इतिहास, समाजशास्त्र, अर्थशास्त्र की पढ़ाई होती थी। शास्त्री का पाठ्यक्रम एमए के स्तर का था।

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1995 में जुड़ा महात्मा गांधी का नाम
पहले विश्वविद्यालय केवल काशी विद्यापीठ के नाम से जाना जाता था किंतु बाद में इसे राष्ट्रपिता महात्मा गांधी को समर्पित किया गया। 11 जुलाई 1995 को उनका नाम इसके साथ जोड़ दिया गया। विश्वविद्यालय में स्नातक, परास्नातक और रिसर्च की सुविधा उपलब्ध है।

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बापू ने यहां बनाई थी आजादी की रणनीति
काशी विद्यापीठ का इतिहास अनोखा है। राष्ट्रपिता महात्मा गांधी ने यहां सूत काता था और एक सप्ताह तक रह कर देश को आजाद करने की रणनीति बनाई थी। स्वतंत्रता संग्राम की लड़ाई में भी काशी विद्यापीठ की महत्वपूर्ण भूमिका रही है। आजादी की लड़ाई के समय कई क्रांतिकारियों ने काशी विद्यापीठ के छात्रावास में शरण पाई थी और समय-समय पर यहीं से स्वतंत्रता संग्राम की लड़ाई का बिगुल भी बजा था।

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