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दीक्षांत समारोह: बेटियों के स्वर्ण से दमका बापू का काशी विद्यापीठ, 55 मेधावियों को मिले 64 गोल्ड मेडल

Mon, 03 Jan 2022 08:31 PM IST
उत्पल कांत न्यूज डेस्क, अमर उजाला, वाराणसी
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, वाराणसी Published by: उत्पल कांत Updated Mon, 03 Jan 2022 08:31 PM IST
सार

उत्तराखंड निवासी पूजा सिंह एलएलएम में स्वर्ण पदक हासिल कर चुकी है। स्वर्ण पदक पाने वाली इस बेटी के सिर से चार साल की उम्र में ही पिता का साया उठ गया था। मां आशा सिंह ने अपनी बेटियों को कमजोर पड़ने नहीं दिया।

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Kashi Vidyapeeth convocation ceremony stunned after receiving gold
महात्मा गांधी काशी विद्यापीठ के 43वें दीक्षांत समरोह में गोल्ड मेडल पाने वाले मेधावी। - फोटो : अमर उजाला

विस्तार

महात्मा गांधी काशी विद्यापीठ का 43वां दीक्षांत समारोह आधी आबादी के सशक्तिकरण का गवाह बना। राष्ट्रपिता महात्मा गांधी का विद्यापीठ बेटियों के स्वर्ण पदकों की आभा से दमक उठा। सोमवार को दीक्षांत समारोह में 55 मेधावियों को 64 स्वर्ण पदक वितरित किए गए। इसमें 46 छात्राएं एवं नौ छात्र शामिल थे। 73,579 छात्र-छात्राओं को उपाधियां देने की घोषणा हुई।

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इसमें स्नातक के 58,370, परास्नातक के 15,189 तथा शोध के 20 छात्र-छात्राएं शामिल थे। गांधी अध्ययन सभागार में पहली बार आयोजित दीक्षांत समारोह में शिष्ट यात्रा अपने निर्धारित समय से मंच पर पहुंची। कुलाधिपति ने मंच से समारोह आरंभ करने की घोषणा की। मंगलाचरण, दीप प्रज्जवलन के बाद पद्मश्री विमला पोद्दार को डीलिट की उपाधि से कुलाधिपति ने सम्मानित किया।
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इसके बाद स्नातक छात्रों को मेडल बांटने का सिलसिला शुरू हुआ। स्नातकोत्तर स्तर पर सर्वोच्च अंक मिलने पर श्रद्धा शुक्ला को स्वर्ण पदक व विश्वविद्यालय पदक प्रदान किया गया। एलएलबी की आरजू खानम को विश्वविद्यालय पदक के अलावा कृष्णा वासुदेव स्मृति स्वर्ण पदक दिया गया।
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एमएड में सीमा सिंह को विश्वविद्यालय पदक के अलावा आचार्य सीताराम चतुर्वेदी स्मृति स्वर्ण पदक, एमबीए की शालिनी श्रीवास्तव को विश्वविद्यालय पदक व सीता राम जिंदल फाउंडेशन स्वर्ण पदक, एमएसडब्ल्यू की काव्या श्रीवास्तव को विश्वविद्यालय पदक व प्रो. सीपी गोयल स्मृति स्वर्ण पदक दिया गया।

एमसीए की वर्तिका गुप्ता को विश्वविद्यालय पदक व सीताराम जिंदल फाउंडेशन द्वारा प्रायोजित स्वर्ण पदक, एम ए अर्थशास्त्र में अक्षिता दुबे को विश्वविद्यालय पदक व प्रो. दूधनाथ चतुर्वेदी स्मृति स्वर्ण पदक, एमएफए की मनीषा पटेल को विश्वविद्यालय पदक व डॉ. शरद बंसल स्मृति स्वर्ण पदक और एमए संस्कृत में सीबू कुमार को विश्वविद्यालय पदक व जगद्गुरु शंकराचार्य स्वामी स्वरूपानंद सरस्वती स्वर्ण पदक प्रदान किया गया। 


कार्यक्रम में राज्यपाल ने प्राथमिक विद्यालय के बच्चों को पुस्तकें, बैग वितरित किए। राज्यपाल ने स्नातक अंतिम वर्ष के छात्र विष्णुकांत सिंह को बेस्ट प्लेयर ऑफ द मैच का पुरस्कार मिलने पर बधाई दी। कुलपति प्रो. आनंद कुमार त्यागी ने विश्वविद्यालय की विस्तृत वार्षिक रिपोर्ट प्रस्तुत की। इस अवसर पर विश्वविद्यालय की स्मारिका का विमोचन किया गया।

इस दौरान बोर्ड ऑफ गवर्नर्स एनआई उत्तराखंड के चेयरमैन डॉ. आरके त्यागी, कुलसचिव डॉ. सुनीता पांडेय, हरिश्चंद्र, प्रो. संजय, प्रो. रंजन, प्रो. बंशीधर पांडेय, प्रो. अजित कुमार शुक्ला, डॉ. नवरत्न सिंह मौजूद रहे।  महात्मा गांधी काशी विद्यापीठ में दीक्षांत समारोह के बाद चार जनवरी को विश्वविद्यालय में अवकाश घोषित किया गया है। यह जानकारी जनसंपर्क अधिकारी डॉ. नवरत्न सिंह ने दी। 

मेधावी छात्राओं ने संघर्षों के बल पर हासिल किया मुकाम

Kashi Vidyapeeth convocation ceremony stunned after receiving gold
श्रद्धा शुक्ला और पूजा सिंह। - फोटो : अमर उजाला

कोमल है कमजोर नहीं तू, शक्ति का नाम ही नारी है...। काशी विद्यापीठ के 39वें दीक्षांत समारोह में स्वर्ण पदक हासिल करने वाली छात्राओं पर ये लाइनें एकदम सटीक बैठती हैं। संघर्षों की आंधियां पार करने वाली इन बेटियों के गले में इनकी मेहनत, जज्बे और हौसले का पदक शोभा बढ़ा रहा है। ये बेटियां अपने सपनों की उड़ान को पंख लगाने को आतुर हैं।

सोमवार को कुछ ऐसी ही मेधावी छात्राओं से बातचीत कर उनकी कहानी सामने लाई गई। 87 प्रतिशत अंक हासिल करने वाली यूनिवर्सिटी टॉपर श्रद्धा शुक्ला की कहानी संघर्षों से भरी है। बचपन से खेलों में मुकाम की चाह रखने वाली श्रद्धा और उनके माता-पिता को बाहर वाले ताना मारते थे, लेकिन उन्होंने सपनों से कभी समझौता नहीं किया।

मूलरूप से मध्यप्रदेश की रहने वाली श्रद्धा वहीं के एक कॉलेज बीकॉम कर रही थीं। खेलों में खुद को साबित करने के लिए जब कॉलेज की तरफ से सहयोग नहीं मिला तो अकेले ही ओबरा जाकर एथलेटिक्स ट्रायल में हिस्सा लिया। उनका चयन तो नहीं हुआ, लेकिन ठान लिया कि इसी में भविष्य बनाना है। दो बार पैर टूटा लेकिन हौसला नहीं टूटने दिया।

कई एथलेटिक्स प्रतियोगिता में मध्यप्रदेश की टीम की ओर से खेल चुकी हैं। काशी विद्यापीठ की एथलेटिक्स टीम के साथ भी कई राष्ट्रीय व अंतरराष्ट्रीय प्रतियोगिताओं में पदक जीत चुकी हैं। 2019 में चंडीगढ़ में रग्बी मैच में पैरा टूटा लेकिन फिर भी वो खुद खेलों से दूर नहीं रह पाईं। अब तक के कॅरियर में वह 198 पदक हासिल कर चुकी हैं, जिसमें 164 स्वर्ण भी है।

उत्तराखंड निवासी पूजा सिंह एलएलएम में स्वर्ण पदक हासिल कर चुकी है। स्वर्ण पदक पाने वाली इस बेटी के सिर से चार साल की उम्र में ही पिता का साया उठ गया था। मां आशा सिंह ने अपनी बेटियों को कमजोर पड़ने नहीं दिया। संघर्ष कर तीनों को शिक्षा दी, जरूरत पड़ने पर उन्हें उत्तराखंड से बाहर भी भेजा। आशा कहती हैं कि आज उनकी सभी बेटियां अपने पैरों पर खड़ी हैं।

स्वर्ण पदक की खुशी जाहिर करते हुए पूजा कहती हैं, पापा जब थे, तो हमेशा सीखाते थे, पैसे तुम्हारे पास भले कम हो, लेकिन शिक्षा अच्छी होनी चाहिए। आज पापा होते तो मेरी इस उपलब्धि पर बहुत खुश होते। लॉ क्षेत्र को क्यों चुना के सवाल पर पूजा ने जवाब दिया कि ये मेरी मां का सपना था, कि मेरी बेटी जज बने।

उनके सपने को पूरा करने की तरफ ये मेरा पहला कदम है। वर्तमान में प्रयागराज में रहकर ज्यूडीशियरी की तैयारी कर रही हूं। मां के साथ काम करने वाली समूह की महिलाओं को जब कोई कानूनी सलाह या सुझाव की जरूरत होती है, तो उनकी मदद करती हूं।
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