काशी विद्यापीठ और संविवि दीक्षांत समारोह: मेधावियों को मिला स्वर्ण पदक, कुलाधिपति ने कहा- देशभर की विभूतियों को ढूंढकर करें सम्मानित
संपूर्णानंद संस्कृत विश्वविद्यालय के 39वें दीक्षांत समारोह में 37 मेधावियों को 64 स्वर्ण, रजत और कांस्य पदक प्रदान किए गए। आचार्य परीक्षा (साहित्य) में सर्वाधिक अंक हासिल करने पर प्रतापगढ़ के संस्कृत विश्वविद्यालय के रवि कुमार जायसवाल को नौ स्वर्ण पदक दिए गए।
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महात्मा गांधी काशी विद्यापीठ और संपूर्णानंद संस्कृत विश्वविद्यालय का दीक्षांत समारोह सोमवार को मनाया गया। इसमें विद्यापीठ में 61 मेधावियों को 71 स्वर्णपदक दिए गए। इसमें स्नातक के 16 और स्नातकोत्तर के 45 विद्यार्थी शामिल हैं। उधर, संपूर्णानंद संस्कृत विश्वविद्यालय में 37 विद्यार्थियों में 63 पदक दिए गए।
संपूर्णानंद संस्कृत विश्वविद्यालय में कुलाधिपति और राज्यपाल आनंदीबेन पटेल ने कहा कि संस्कृत अमृत भाषा है और अमरत्व प्रदान करती है। संस्कृत सिर्फ एक भाषा नहीं है यह भारतीय संस्कृति का मूल आधार है। यह सभी भाषाओं की कोशिका है और संस्कृत के ज्ञान के पूर्णता प्राप्त नहीं हो सकती है।
संस्कृत और संस्कृति के लिए काम करने वाली विभूतियों को देश भर से ढूंढकर सम्मानित किया जाना चाहिए। संपूर्णानंद संस्कृत विश्वविद्यालय के 39वें दीक्षांत समारोह की अध्यक्षता कर कुलाधिपति ने मंच से निर्देश देते हुए कहा कि साल भर विश्वविद्यालय में छात्रों के लिए ऐसी विभूतियों के लेक्चर का भी आयोजन करें।
इससे छात्र उनके जीवन अनुभवों से सीखेंगे। गत दिनों पीएम नरेंद्र मोदी ने भी मन की बात में महा महोपाध्याय गंगा नाथ झा जैसे विद्वानों का जिक्र किया था। हमें उन विभूतियों के आदर्शों का निर्वाह करने का संकल्प लेना होगा। मुस्लिम और विदेशी छात्र भी विश्वविद्यालय से शिक्षा ग्रहण कर रहे हैं, जो पूरे विश्व में संस्कृत भाषा के महत्व को दर्शाता है।
प्राचीनतम विश्वविद्यालय के उत्थान के लिए पूर्व मुख्यमंत्री स्व. संपूर्णानंद का योगदान अविस्मरणीय है और उन्हें श्रद्धासुमन अर्पित करती हूं। नई शिक्षा नीति में संस्कृत को अधिक महत्ता दी गई है। स्कूली शिक्षा में संस्कृत भाषा को भी अन्य वैकल्पिक भाषा की तरह शामिल किया गया है। उन्होंने छात्रों से कहा कि आप देश की धरोहर हैं। आप समृद्ध होंगे तो विश्वविद्यालय व देश भी समृद्ध होगा।
रवि को नौ, सौरभ और सुदर्शन को पांच-पांच स्वर्ण
संपूर्णानंद संस्कृत विश्वविद्यालय के 39वें दीक्षांत समारोह में 37 मेधावियों को 64 स्वर्ण, रजत और कांस्य पदक प्रदान किए गए। आचार्य परीक्षा (साहित्य) में सर्वाधिक अंक हासिल करने पर प्रतापगढ़ के संस्कृत विश्वविद्यालय के रवि कुमार जायसवाल को नौ स्वर्ण पदक दिए गए। आचार्य (शुक्ल यजुर्वेद) में सौरभ शुक्ला और सुदर्शन गौतम (नब्य व्याकरण) को पांच-पांच स्वर्ण प्रदान किया गया।
सोमवार को निर्धारित समय से एक घंटे की देरी से दीक्षांत समारोह के शिष्ट मंडल की यात्रा आरंभ हुई। कुलाधिपति ने दीक्षांत समारोह आरंभ करने की घोषणा की और इसके बाद लोक गायिका पद्मश्री मालिनी अवस्थी को वाचस्पति की मानद उपाधि प्रदान की गई। कुलपति प्रो. हरेराम त्रिपाठी ने विद्यार्थियों को समावर्तन संस्कार की शपथ दिलाई और शास्त्री-आचार्य, शोध सहित 15,520 विद्यार्थियों को दीक्षित किया।
समारोह का संपूर्ण आयोजन संस्कृत भाषा में चला। सिर्फ राज्यपाल व मुख्य अतिथि ने उद्बोधन हिंदी में दिया। समारोह में 15520 को शास्त्री, आचार्य, पीएचडी सहित अन्य पाठ्यक्रमों की उपाधि व सर्टिफिकेट देने की घोषणा की गई। स्वागत कुलपति प्रो. हरेराम त्रिपाठी, संचालन डा. रविशंकर पांडेय व धन्यवाद ज्ञापन कुलसचिव डॉ. ओमप्रकाश ने किया।
जिसे संस्कृत का ज्ञान नहीं वह सबसे बड़ा अभागा : मालिनी अवस्थी
संपूर्णानंद संस्कृत विश्वविद्यालय में मुख्य अतिथि पद्मश्री मालिनी अवस्थी ने कहा कि जिसे संस्कृत का ज्ञान नहीं है वह इस पृथ्वी का सबसे बड़ा अभागा इंसान है। संस्कृत से मेरा बचपन से ही जुड़ाव रहा और मैंने जो भी संस्कृत से सीखा उसे लोक संगीत में उतारा। संस्कृत की ही देन है जिसने मुझे लोक को देखने की दृष्टि प्रदान की है।
दीक्षांत समारोह में वाचस्पति की उपाधि मिलने के बाद पद्मश्री मालिनी अवस्थी ने उपाधि धारकों से कहा कि वेदपाठ से कुछ नहीं होगा जब तक आप उसे आचरण में नहीं उतारेंगे। जीवन भर विद्यार्थी का भाव रखेंगे तो ज्ञान की प्राप्ति होती रहेगी। जब देश से गुुरुकुल नष्ट हो गए, शास्त्र नष्ट हो गए तो भारत की अमूल्य थाती को सहेजने की जिम्मेदारी देश की महिलाओं ने उठाई।