काशी ज्ञानवापी मामला: वक्फ बोर्ड का आवेदन जुर्माने के साथ मंजूर, अब 13 को होगी सुनवाई
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वाराणसी में प्राचीन मूर्ति स्वयंभू ज्योतिर्लिंग लॉर्ड विश्वेश्वर से संबंधित ज्ञानवापी मामले में विलंब से दाखिल निगरानी याचिका के लिए मियाद अधिनियम के तहत माफी के सेंट्रल सुन्नी वक्फ बोर्ड के आवेदन को जिला जज यूसी शर्मा की अदालत ने मंगलवार को स्वीकार कर लिया।
सेंट्रल सुन्नी वक्फ बोर्ड पर विलंब के लिए अदालत ने तीन हजार रुपये जुर्माना लगाया है। साथ ही इस प्रकरण में सेंट्रल सुन्नी वक्फ बोर्ड और अंजुमन इंतजामिया मसाजिद कमेटी की ओर से दाखिल निगरानी याचिका पर सुनवाई की अगली तिथि 13 अक्तूबर नियत की गई है।
सेंट्रल सुन्नी वक्फ बोर्ड और मसाजिद कमेटी का कहना है कि ज्ञानवापी मामले की सुनवाई का अधिकार सेंट्रल सुन्नी वक्फ बोर्ड लखनऊ को है। बनारस के अवर न्यायालय को इसकी सुनवाई का अधिकार नहीं है। ज्ञानवापी मामले के तीसरे पक्षकार सेंट्रल सुन्नी वक्फ बोर्ड ने इसे लेकर जिला जज की अदालत में निगरानी याचिका दाखिल की थी। इसी अदालत में वर्ष 1991 के लंबित प्राचीन मूर्ति स्वयंभू लॉर्ड विश्वेश्वर से संबंधित ज्ञानवापी मामले में अंजुमन इंतजामिया मसाजिद कमेटी की तरफ से भी निगरानी याचिका लंबित हैं।
दोनों पक्षों ने मामले की सुनवाई करने वाली अदालत के क्षेत्राधिकार को लेकर सवाल उठाया है। कहा है कि बनारस के अवर न्यायालय को ज्ञानवापी मामले की सुनवाई का अधिकार नहीं है। वहीं, प्राचीन मूर्ति स्वयंभू ज्योतिर्लिंग लॉर्ड विश्वेश्वर की पैरवी के लिए अदालत से नियुक्त वादमित्र विजय शंकर रस्तोगी ने वर्ष 1991 से लंबित इस प्रकरण में आवेदन देकर ज्ञानवापी परिसर का पुरातात्विक सर्वेक्षण कराए जाने और पूजा-पाठ की अनुमति दिए जाने का अनुरोध किया है।