Karwa Chauth 2025: महादेव की काशी में महिलाओं ने रखा निर्जला व्रत, जानें- चांद दिखने का समय और पूजा की विधि
Karwa Chauth 2025 in Varanasi: धर्म की नगरी काशी में करवा चौथ को लेकर महिलाओं में काफी उत्साह नजर आ रहा है। चंद्रोदय रात 8:03 बजे होगा। इस दौरान चलनी की ओट से चांद के दर्शन के बाद महिलाओं का निर्जला व्रत पूरा होगा।
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करवा चौथ और संकष्ठी गणेश चतुर्थी व्रत शुक्रवार को है। सुहागिनें निराजल व्रत रखकर अखंड सौभाग्य की कामना करेंगी। शिवालयों और गणेश मंदिरों में पूजन के साथ करवा माता की कथा का श्रवण करेंगी। चंद्रोदय रात 8:03 बजे होगा। चलनी की ओट से चांद के दर्शन के बाद उनका व्रत पूरा होगा।
उधर, बृहस्पतिवार को उन्होंने करवा, करवा माता की तस्वीर, दीया, लाल-पीले रंग के कपड़े, मेहंदी और शृंगार की सामग्रियां खरीदीं। शृंगार प्रसाधन की दुकानों पर मेहंदी लगवाने के लिए भीड़ लगी रही। हिंदू सनातन धर्म में पौराणिक मान्यता के अनुसार कार्तिक मास की विशेष महिमा है।
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इस महीने की शुरुआत करवा चौथ और गजानन की आराधना से होती है। कार्तिक कृष्ण पक्ष की चतुर्थी तिथि पर करवा चौथ (करक चतुर्थी) का व्रत पड़ता है। सुहागिन महिलाएं अखंड सौभाग्य का संकल्प लेकर व्रत रखेंगी। वामनपुराण में करवा चौथ के व्रत की कथा का वर्णन है।
करवा चौथ पर बन रहे ये खास योग
ज्योतिषविद विमल जैन के अनुसार करवा चौथ की पूजा चंद्रोदय व्यापिनी चतुर्थी तिथि में होगी। यह तिथि कार्तिक कृष्णपक्ष की चतुर्थी तिथि बृहस्पतिवार को रात 10:55 बजे से शुक्रवार को रात 7:39 बजे तक रहेगी। कृतिका नक्षत्र बृहस्पतिवार को रात 8:03 बजे से अगले दिन शाम 5:32 बजे तक रहेगा। इसके बाद रोहिणी नक्षत्र लग जाएगा। करवा चौथ पर सिद्धियोग भी बन रहा है।
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करवा चौथ पर पूजा की थाली में जल से पूरित करवा रखा जाता है। थाली सोने, चांदी, पीतल या मिट्टी की होनी चाहिए। इस थाली में श्रृंगार की वस्तुएं रखकर व्रती महिलाएं परंपरानुसार पूजा करेंगी। चंद्रोदय के बाद अर्घ्य देकर आरती व पूजा करेंगी।
करवा चौथ की पूजा घरों, मंदिरों के अलावा कुंडों और कॉलोनियों में भी होगी। सिंधी, मारवाड़ी और पंजाबी बहुल कॉलोनियों में महिलाएं सामूहिक रूप से पूजा करेंगी। रमनदीप कौर ने बताया कि करवा माता की कथा श्रवण के दौरान थाली की परिक्रमा कराई जाती है। इसमें सुहागिन एक-दूसरे को थाली देकर घुमाती हैं।