कालभैरव मंदिर: श्रद्धालुओं की पिटाई के मामले में तीन आरोपी गिरफ्तार, गुजरात के श्रद्धालुओं से की थी मारपीट
Varanasi News: गुजरात से आए परिवार के साथ कालभैरव मंदिर में मारपीट का मामला सामने आया। मामले में पुलिस ने प्राथमिकी दर्ज कर तीन आरोपियों को गिरफ्तार कर लिया।
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
विस्तार
काल भैरव मंदिर में दर्शन के दौरान गुजरात के श्रद्धालुओं की पिटाई के तीन आरोपियों को कोतवाली पुलिस ने सोमवार को गिरफ्तार किया। आरोपियों में मंदिर के निकास द्वार क्षेत्र के अमित यादव, अमन शर्मा और रजनीश यादव है। सभी मंदिर में झाड़ फूंक और माला फूल बिक्री करने वालों के संपर्क में रहते हैं। अज्ञात आरोपियों को भी पुलिस तलाश रही है।
एसीपी कोतवाली ने मंदिर परिसर के पुजारियों और पूजा सामग्री बिक्री करने वालों को सख्त हिदायत दी कि किसी भी श्रद्धालु से दुर्व्यवहार न हो। निजी सुरक्षाकर्मियों और कालभैरव चौकी पुलिस को भी सतर्कता और मुस्तैदी के साथ ड्यूटी करने को सख्त हिदायत दी।
एसीपी ने कहा कि किसी भी श्रद्धालु के साथ दुर्व्यवहार होता है तो संबंधित पुलिसकर्मी जिम्मेदार माना जाएगा। बाहरी कोई भी व्यक्ति मंदिर के कार्य में हस्तक्षेप न करें। गुजरात के छापरा रोड नवासारी रवि पार्क सोसाइटी निवासी मुकेश भाई पटेल अपने माता-पिता, भाई के साथ शनिवार शाम काल भैरव मंदिर में दर्शन पूजन करने पहुंचे थे। इस बीच अमित यादव, अमन शर्मा ने बैरिकेडिंग लाइन खुद से बंद कर दी। मुकेश भाई के पिता-भाई अंदर और मुकेश अपनी मां समेत बाहर हो गया।
विरोध करने पर अमित, अमन और रजनीश समेत अज्ञात ने मुकेश की पिटाई की और पिता का गला दबाकर जान से मारने का प्रयास किया। मां के साथ भी दुर्व्यवहार किया गया। आरोपियों ने गालीगलौज की। परिवार को इतनी ठेस पहुंची कि वह बिना दर्शन किए लौट गए। कोतवाली पुलिस की कार्यशैली पर नाराजगी जताई।
लोगों ने पुलिस आयुक्त से मांग की है कि सेवा करने वालों को आईकार्ड जारी किए जाए। मंदिर परिसर में आवाजाही की अनुमति मिले। माला-फूल, झाड़ फूंक करने वालों के भी आई कार्ड बनाए जाएं। तभी मंदिर परिसर में श्रद्धालुओं के साथ अराजकता पर लगाम लग सकती है।
मंदिर के निकास द्वार पर खड़े होकर दुकानों से माला-प्रसाद लेने वालों को प्रवेश कराते हैं। निकास द्वार को मनमाने ढंग से बंद किया जाता है। लोगों का आरोप है कि मंदिर के बाहर कुछ युवक अकसर दर्शनार्थियों के साथ अभद्र व्यवहार करते हैं और व्यवस्था के नाम पर दबाव बनाते हैं।