कैफी आजमी जयंती: फतेह मंजिल में गूंजा- कर चले हम फिदा जान ओ तन साथियों, गूगल ने बनाया डूडल
उर्दू के मशहूर शायर और गीतकार कैफी आजमी की जयंती मंगलवार को उनके पैतृक गांव आजमगढ़ जिले के मेजवां स्थित फतेह मंजिल में मनाई गई। मिजवां सोसाइटी की ओर से आयोजित जयंती समारोह में लोगों ने कैफी आजमी को दिल से याद किया तो उनके गीतों और रचनाओं से भी जयंती की शाम को खास बनाया। कैफी आजमी के गीत ‘कर चले हम फिदा जान ओ तन साथियों...’ सुन सभी की आंखें भर आईं। वहीं गूगल ने कैफी आजमी की याद में डूडल बनाया।
कार्यक्रम की शुरुआत एसडीएम वागीश शुक्ला, हिना देसाई, पूर्व विधायक श्याम बहादुर सिंह यादव, डा. उदयभान, राजेश यादव, गोपाल, विभा गोयल, कामरेड हरिगेन, पीआर गौतम, जितेंद्र हरि पांडेय, जयराम, घनश्याम आदि ने कैफी आजमी की प्रतिमा पर माल्यार्पण कर किया। एसडीएम वागीश शुक्ला ने कहा कि परिवर्तन लाने का कई जरिया होता है।
कैफी आजमी ने अपने क्रांतिकारी लेखनी के माध्यम से गरीब, असहाय, शोषित और मजदूरों की आवाज को बुलंद किया था। पूर्व विधायक श्याम बहादुर सिंह यादव ने कहा कि कैफी आजमी अपने गांव की अपेक्षाओं पर खरा उतरने का काम किया। उन्हें अपने मिट्टी से काफी लगाव था।
हिना देसाई ने कहा कि कैफी आजमी ने अपने गीतों, नाटकों के माध्यम से आखिरी पंक्ति में खड़े लोगों को समाज की मुख्य धारा से जोड़ने का काम किया। सोसाइटी के प्रबंधक आशुतोष त्रिपाठी ने कैफी आजमी की जयंती पर 500 जरूरतमंदों को कंबल और 250 बच्चों को पतंग बांटा।
गर्ल्स इंटर कॉलेज की छात्राओं ने कैफी आजमी की नज्म ‘उठ मेरी जान, मेरे साथ ही चलना है तुझे...’ पेश किया। शाह आलम सवारियां ने ‘कर चले हम जान ओ तन साथियों...’ प्रस्तुत किया। फतेह मंजिल में कैफी साहब की कई खास चीजों की प्रदर्शनी लगाई गई। संचालन जितेंद्र पांडेय ने किया। आशुतोष त्रिपाठी और कैफी आजमी गर्ल्स कॉलेज की प्रिंसिपल शेख समीना आजमी ने संयुक्त रूप से आभार प्रकट किया।