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ग्राउंड रिपोर्ट: 21 जहाज, 100 से ज्यादा कंपनियों के मालिक हैं धनियामऊ के लोग, खेतों से ज्यादा जहाजों की चर्चा

Mon, 31 Aug 2026 09:50 AM IST
Pragati Chand बीरेंद्र कुमार शुक्ल, अमर उजाला ब्यूरो, जौनपुर।
बीरेंद्र कुमार शुक्ल, अमर उजाला ब्यूरो, जौनपुर। Published by: Pragati Chand Updated Mon, 31 Aug 2026 09:50 AM IST
सार

जौनपुर में दो हजार से ज्यादा की आबादी वाले धनियामऊ गांव के हर घर का सदस्य शिपिंग सेक्टर से जुड़ा है। गांव में 100 से ज्यादा बीटेक पास हैं। वहीं दावा है कि जिले में सबसे ज्यादा पासपोर्ट इसी गांव के हैं।

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Jaunpur unique village over 100 residents owners of shipping companies
जौनपुर में धनियामऊ गांव के हर घर का सदस्य जुड़ा है शिपिंग सेक्टर से - फोटो : अमर उजाला

विस्तार

वाराणसी-सुल्तानपुर राष्ट्रीय राजमार्ग के किनारे बसे गांव धनियामऊ को स्थानीय लोग जहाज वाला गांव कहते हैं। 2 हजार से ज्यादा की आबादी वाले धनियामऊ गांव के हर घर का सदस्य पानी के जहाजों की मरम्मत, निर्माण और संचालन के काम से जुड़ा है। गांव के मंगरू मिश्रा के पास 10, आद्या प्रसाद मिश्रा के पास 5, प्रेम शंकर मिश्रा और बृजेश मिश्रा के पास पानी के 3-3 जहाज हैं। गांव के लोगों के पास 100 से ज्यादा शिपिंग कंपनियां हैं। प्रेम शंकर मिश्रा की मानकेश्वर मैकेनिकल कंपनी सबसे पुरानी है। धनियामऊ और जिले के अन्य गांवों के 3 हजार से ज्यादा लोग शिपिंग सेक्टर में काम कर रहे हैं।

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गांव के विष्णु नारायण मंदिर में धार्मिक अनुष्ठान में शामिल होने आए प्रेम शंकर मिश्रा बताते हैं कि सन 1930 में पिता भोला नाथ मिश्रा मझगांव डाक में लुहार का काम करते थे। इसके बाद गुजरात की कंपनी में काम शुरू किया। कंपनी के पास 17-18 जहाज थे। पिताजी ने सन 1948 में मानकेश्वर मैकेनिकल कंपनी की शुरूआत की। गांव के लोगों और रिश्तेदारों को मुंबई ले जाकर काम सिखाया। इसके बाद ये सिलसिला शुरू हो गया।
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प्रेम शंकर मिश्रा कहते हैं कि 1995 तक शिपिंग क्षेत्र में उत्तर भारतीयों की उपस्थिति न के बराबर थी। अब यहां के लोगों की अच्छी पकड़ है। बनारस में निजी ट्रेनिंग सेंटर खुल गया है, जहां 6 महीने की ट्रेनिंग लेकर युवा शिपिंग कंपनियों में काम करते हैं। पद और योग्यता के आधार पर एक हजार से डेढ़ हजार डाॅलर महीने का वेतन मिलता है। उनकी कंपनी में जौनपुर के अलावा गोरखपुर, देवरिया जिले के लोग भी काम करते हैं।

Jaunpur unique village over 100 residents owners of shipping companies
जहाज का निर्माण - फोटो : अमर उजाला

आर्थिक रूप से संपन्न गांव में 100 से ज्यादा बीटेक पास हैं
गांव के गोपी चंद मिश्रा कहते हैं कि भोला नाथ मिश्रा की वजह से गांव आज आर्थिक रूप से संपन्न है। गांव में प्राइमरी से लेकर डिग्री काॅलेज हैं। लड़कियाें के लिए अलग काॅलेज है। गांव के 100 से ज्यादा युवा बीटेक पास हैं और विभिन्न कंपनियों में काम करते हैं। बहुएं भी पढ़ी-लिखी हैं। ज्यादातर परिवार मुंबई और दूसरे शहरों में रहते हैं। गांव में लोगों के दो से तीन मंजिला पक्के मकान बने हैं। शादी समारोह में इनका गांव आना-जाना होता है। लक्ष्मी नारायण मंदिर, काली मंदिर और हनुमान मंदिर में धार्मिक अनुष्ठानों में भी हिस्सा लेते हैं। रामलीला देखने के लिए कई लोग तो पूरे परिवार के साथ आते हैं और लाखों रुपये चंदा देते हैं। प्रेम शंकर के भतीजे अमित मिश्रा ने बताया कि गांव के विकास में भी सभी सहयोग करते हैं। यही वजह कि गांव में सभी सुविधाएं हैं।

उमरछा के 50 से ज्यादा युवा विदेश आते-जाते हैं
सदर तहसील के बक्शा क्षेत्र के गांव उमरछा के 50 से ज्यादा युवा विदेश आते-जाते हैं। इनमें कुवैत, अमेरिका, ओमान, सऊदी अरब, दुबई आदि देश शामिल हैं। उमरछा के कमलेश कुमार उपाध्याय बताते हैं कि धनियामऊ गांव के जरिये हमारे गांव के 50 से ज्यादा लोगों की शिपिंग सेक्टर में काम करके किस्मत बदल गई। कमलेश के भाई राजेश उपाध्याय भी 10 साल से काम के सिलसिले में अलग-अलग देशों में जाते हैं। गांव के सदाशिव, नलनीश, शुभम, बृजेश, राहुल, सुमित समेत कई युवा अपने परिवार को आर्थिक रूप से सशक्त बना रहे हैं। वहीं, मड़ियाहूं में पासपोर्ट ऑफिस खोलने की मंजूरी मिल चुकी है।

गांव तिलवारी के 500 से ज्यादा लोग शिपिंग सेक्टर में
जिले की सदर, मड़ियाहूं, बदलापुर और शाहगंज तहसील के सबसे ज्यादा युवा पानी के जहाज पर काम करते हैं। इसी वजह से बदलापुर तहसील क्षेत्र का तिलवारी गांव भी आर्थिक रूप से संपन्न हो चुका है। तिलवारी के ही 500 से ज्यादा लोग शिपिंग सेक्टर में कार्यरत हैं। ये लोग जहाजों की मरम्मत, निर्माण के अलावा हेल्पर, मैकेनिक, क्रू मेंबर, इंजीनियर, सेफ्टी इंजीनियर, पंपमैन, लाइटमैन, फिटर, कैप्टन, सेकंड ऑफिसर जैसे कई महत्वपूर्ण पदों पर कार्य कर रहे हैं।

वोटर आईडी से पहले युवा पासपोर्ट बनवाते हैं
ग्राम प्रधान लालचंद प्रसाद का दावा है कि जिले में सबसे ज्यादा पासपोर्ट वाला गांव धनियामऊ है। गांव की आबादी दो हजार से ज्यादा है, जिसमें से एक हजार से ज्यादा लोगों के पास पासपोर्ट हैं। वो कहते हैं कि हमारे यहां के लड़के वोटर आईडी से पहले पासपोर्ट बनवाने की सोचते हैं। गांव के दिनेश का कहना है कि गांव के 20 से 25 लोग मुंबई में ठेकेदारी करते हैं। चुनाव के समय मुंबई में बसे लोग गांव आकर मतदान भी करते हैं।
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