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सारनाथ के महाबोधि मंदिर की कलाकृतियों में रंग भरने पहुंचा जापानी दल
ब्यूरो,अमर उजाला,वाराणसी
Updated Sun, 16 Jul 2017 09:30 PM IST
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कलाकृतियों का निरीक्षण करता जापानी दल
- फोटो : अमर उजाला
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विश्व भर में बौद्ध धर्मावलंबियों की आस्था से जुड़े सारनाथ के महाबोधि मंदिर की फीकी पड़ी अनोखी कलाकृतियों में रंग भरने के लिए रविवार को जापानी दल पहुंच गया। इस छह सदस्यीय जापानी दल ने मंदिर पहुंचकर दीवारों के प्लास्टर नमूने लिए।
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इसके अलावा उन्होंने फोटो लिया और वीडियो भी बनाया। आगामी नवंबर महीने से कलाकृतियों में रंग भरने का काम शुरू हो जाएगा जो 2019 तक चलेगा। इससे जापानी दल के आने से बौद्ध भिक्षुओं में खुशी की लहर है।
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जापानी दल में मिजोबूची शिजेकी के नेतृत्व में ओनोमूरा हयातो, हैनाजोनो शूजी, सिमाई मिचीकाजू, कूरासिमा ताकायुकी, नाकामुरा योसीहीरो रहे। आठ दशक पुरानी चित्रकृतियों की चमक फ ीकी होने के साथ-साथ दीवारों में दरार बन गई है। कलाकृतियां धुंधली पड़ गई हैं।
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वर्ष भर पहले महाबोधि सोसाइटी के अनुरोध पर जापान सरकार के निर्देशन में आई विशेषज्ञों की तीन सदस्यीय टीम ने कलाकृतियों का बारीकी से निरीक्षण करने के साथ दस्तावेजीकरण कराया था।
तथागत के पवित्र अस्थि अवशेष को रखने के लिए 1931 में बनकर तैयार इस मंदिर का निर्माण 1929 में शुरू हुआ। महाबोधि बौद्ध मंदिर की भीतरी दीवारों पर भगवान बुद्ध के जन्म से लेकर परिनिर्वाण तक की विभिन्न मुद्राओं में पेंटिंग द्वारा अनोखी चित्रकारी की गई है।
दीवारों में चित्रकारी की रंगत फीकी होने के साथ चप्पड़ व पपड़ी भी छूट रही है। जगह-जगह धब्बे बन गए हैं। 1931 में जब मंदिर बनकर तैयार हुआ तो महाबोधि सोसाइटी के अनुरोध पर प्रसिद्ध जापानी चित्रकार कोसेटसु नोसु के नेतृत्व में आई टीम ने यहां आकर तथागत के जन्म से लेकर परिनिर्वाण तक की विभिन्न मुद्राओं को दीवारों पर पेंटिंग के माध्यम से उकेरा था।
चार साल बाद 1936 में यह काम पूरा हुआ था। इससे जुड़ा शिलापट्ट चार भाषाओं पालि, अंग्रेजी, उर्दू और जापानी में लिखा है।