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महाकवि जयशंकर प्रसाद की पांडुलिपियां घर में मिली सुरक्षित,गायब होने का लगा था आरोप
ब्यूरो,अमर उजाला,वाराणसी
Updated Wed, 09 Aug 2017 03:43 PM IST
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पुलिस ने भौतिक सत्यापन कर उच्चाधिकारियों को जानकारी दी
- फोटो : अमर उजाला
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महाकवि जयशंकर प्रसाद की पांडुलिपियां और अन्य सामान उनके पैतृक आवास में ही सुरक्षित है। मंगलवार को पुलिस ने सराय गोवर्धन स्थित जयशंकर प्रसाद के पुश्तैनी घर पहुंच कर पांडुलिपियां और सामान उनके प्रपौत्र विजय शंकर के पास होने की पुष्टि की और आला अधिकारियों को जानकारी दे दी।
साथ ही पुलिस ने परिवार वालों को समझाया कि एक-दूसरे पर आरोप लगाने के बजाय आपसी सहमति से मामले का समाधान करें। हालांकि, महाकवि से जुड़ी धरोहरों को लेकर उनके वंशजों के में रार अभी थमी नहीं है।
एसएसपी कार्यालय को रजिस्टर्ड पत्र भेजकर महाकवि के वंशजों ने शिकायत की थी कि महाकवि की लिखी पांडुलिपियां या तो गायब हो गई हैं या फिर बेच दी गई है। एसएसपी के निर्देश पर मंगलवार को पानदरीबा पुलिस चौकी प्रभारी ने महाकवि के वंशजों को चेतगंज थाने बुलाया था।
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इसके बाद चौकी प्रभारी सबको साथ लेकर महाकवि के घर पहुंचे। जांच-पड़ताल में पांडुलिपियां और अन्य सामान बक्से में सुरक्षित मिले। चेतगंज के प्रभारी थानाध्यक्ष ने बताया कि विजय शंकर के पास पांडुलिपियां और सामान सुरक्षित मिले हैं।
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साथ ही पुलिस ने परिवार वालों को समझाया कि एक-दूसरे पर आरोप लगाने के बजाय आपसी सहमति से मामले का समाधान करें। हालांकि, महाकवि से जुड़ी धरोहरों को लेकर उनके वंशजों के में रार अभी थमी नहीं है।
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एसएसपी कार्यालय को रजिस्टर्ड पत्र भेजकर महाकवि के वंशजों ने शिकायत की थी कि महाकवि की लिखी पांडुलिपियां या तो गायब हो गई हैं या फिर बेच दी गई है। एसएसपी के निर्देश पर मंगलवार को पानदरीबा पुलिस चौकी प्रभारी ने महाकवि के वंशजों को चेतगंज थाने बुलाया था।
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इसके बाद चौकी प्रभारी सबको साथ लेकर महाकवि के घर पहुंचे। जांच-पड़ताल में पांडुलिपियां और अन्य सामान बक्से में सुरक्षित मिले। चेतगंज के प्रभारी थानाध्यक्ष ने बताया कि विजय शंकर के पास पांडुलिपियां और सामान सुरक्षित मिले हैं।
इन पांडुलिपियों और सामान को लेकर था संशय
महाकवि जयशंकर प्रसाद के घर से मिला सामान
- फोटो : अमर उजाला
राष्ट्रीय अभिलेखागार नई दिल्ली से मिली कामायनी दो जिल्दों में, कामायनी पर मंगला प्रसाद पारितोषिक दिए जाने का ताम्रपत्र, आंसू (प्रथम सं. - 33 पृष्ठ), इरावती - 125 पृष्ठ, दाशराज्ञ युद्ध - एक कॉपी, तितली (अपूर्ण), लहर के गीत एवं स्फुट कवितायें, ध्रुवस्वामिनी, चंद्रगुप्त (प्रथम संख्या की वह प्रति जिस पर मंचोपयोगी संशोधन किए गए हैं), कामायनी के मुद्रणादेश की प्रूफ प्रतियां, कलम (पारकर डुओफोल्ड), रुद्राक्ष माला, भस्मपात्र, नेपाल नरेश से मिली खुखरी, होम्योपैथिक दवा का डब्बा, चश्मे का लेंस, महाकवि का दांत, महाकवि की दो गंजी, तीन लुंगी, एक दुशाला व एक अंडी, नागरी प्रचारिणी सभा द्वारा प्रदत्त गुलेरी पदक, सुधाकर पदक, विभिन्न लोगों के पत्र जिनका प्रकाशन प्रसाद के नाम पत्र में हुआ है, महाकवि की कांसे की कटोरी, गिलास व चम्मच।
महाकवि के वंशज दे रहे अलग अलग बयान
महाकवि जयशंकर प्रसाद के घर से मिला सामान
- फोटो : अमर उजाला
महाकवि की पांडुलिपियां और अन्य सामान सुरक्षित हैं लेकिन वंशजों के दावे अलग-अलग हैं। महाकवि के प्रपौत्र विजय शंकर ने कहा कि दादा रत्न शंकर प्रसाद ने पांडुलिपियों को सहेज कर रखने के लिए उनसे लिखित में कहा था।
महाशंकर फोर्जरी के आरोपी हैं और उन्होंने चचेरे भाइयों को गुमराह कर पुलिस को गलत सूचना दी। यह भी कहा-जो लोग महाकवि की धरोहरों को बेचकर रुपये कमाना चाहते हैं उनका मंसूबा सफल नहीं होना चाहिए। इस संबंध में मंडलायुक्त को भी अवगत कराया गया है।
उधर, दूसरे प्रपौत्र भव रत्न ने कहा कि परिवार के सारे सदस्योेें के पास महाकवि से जुड़े सामान रहें। या फिर उन्हें भारत कला भवन या दिल्ली स्थित राष्ट्रीय संग्रहालय में रखा जाए मगर किसी एक सदस्य के पास न रहे।
महाशंकर फोर्जरी के आरोपी हैं और उन्होंने चचेरे भाइयों को गुमराह कर पुलिस को गलत सूचना दी। यह भी कहा-जो लोग महाकवि की धरोहरों को बेचकर रुपये कमाना चाहते हैं उनका मंसूबा सफल नहीं होना चाहिए। इस संबंध में मंडलायुक्त को भी अवगत कराया गया है।
उधर, दूसरे प्रपौत्र भव रत्न ने कहा कि परिवार के सारे सदस्योेें के पास महाकवि से जुड़े सामान रहें। या फिर उन्हें भारत कला भवन या दिल्ली स्थित राष्ट्रीय संग्रहालय में रखा जाए मगर किसी एक सदस्य के पास न रहे।