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खुशखबरीः दो माह बाद शुरू हो जाएगा वाराणसी का अंतरराष्ट्रीय चावल अनुसंधान केंद्र
ब्यूरो,अमर उजाला,वाराणसी
Updated Tue, 14 Nov 2017 10:42 AM IST
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अंतरराष्ट्रीय चावल अनुसंधान संस्थान की जानकारी लेते पीएम मोदी
- फोटो : twitter
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अंतरराष्ट्रीय चावल अनुसंधान केंद्र (आईआरआरआई) का वाराणसी में स्थापित होने वाला दक्षिण एशियाई क्षेत्रीय केंद्र अगले साल जनवरी में देश के अकेले राष्ट्रीय बीज अनुसंधान एवं प्रशिक्षण केंद्र (एनएसआरटीसी) में काम शुरू कर देगा। केंद्र की स्थापना के लिए निरीक्षण-परीक्षण की औपचारिकताएं पूरी हो चुकी हैं। फार्म और प्रयोगशालाएं स्थापित करने की रूपरेखा के साथ-साथ गुणवत्ता परीक्षण और रिमोट सेंसिंग पर भी काम अंतिम चरण में है।
उपकरण आने के बाद शोध का कार्य शुरू हो जाएगा। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के संसदीय क्षेत्र में इस केंद्र की स्थापना का उद्देश्य नई प्रजातियां विकसित करने, सीमित संसाधनों में उत्पादकता बढ़ाने, चावल की गुणवत्ता बढ़ाने के साथ-साथ किसानों का मुनाफा बढ़ाना है।
केंद्र के शुरू होने के बाद गांवों को गोद लेकर शोध और प्रदर्शन कार्य के साथ-साथ यहां अंतरराष्ट्रीय स्तर का प्रशिक्षण शुरू हो जाएगा। पिछले दिनों एनएसआरटीसी में विपरीत जलवायु में गुणवत्तायुक्त चावल का उत्पादन बढ़ाने के लिए कंबोडिया के एक दल के प्रशिक्षण के साथ इसकी शुरूआत हो चुकी है।
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बीएचयू का कृषि विज्ञान संस्थान भी मदद कर रहा है। केंद्र का फोकस इस बात पर होगा कि पूर्वी भारत के साथ-साथ नेपाल, बांग्लादेश और अफ्रीकी देशों में ऐसे चावल का उत्पादन बढ़ाया जाए, जिसमें आर्सेनिक और भारी धातुओं की कमी हो और मिनरल्स ज्यादा हों।
इस तरह से पूर्वी भारत में कुपोषण की समस्या से निपटा जा सकेगा। गौरतलब है कि पूर्वी और दक्षिणी भारत में चावल मुख्य खाद्य पदार्थ है, जबकि धान का उत्पादन पंजाब और हरियाणा में ज्यादा होता है।
पूर्वी भारत के राज्यों में धान की खेती वर्षा पर निर्भर करती है। कभी बाढ़ तो कभी सूखे के कारण दक्षिण भारत की तरह पूर्वी भारत में धान की अच्छी खेती नहीं हो पाती है। जो धान पैदा होता भी है, उसके चावल उन्नत किस्म के नहीं होते हैं।
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उपकरण आने के बाद शोध का कार्य शुरू हो जाएगा। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के संसदीय क्षेत्र में इस केंद्र की स्थापना का उद्देश्य नई प्रजातियां विकसित करने, सीमित संसाधनों में उत्पादकता बढ़ाने, चावल की गुणवत्ता बढ़ाने के साथ-साथ किसानों का मुनाफा बढ़ाना है।
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केंद्र के शुरू होने के बाद गांवों को गोद लेकर शोध और प्रदर्शन कार्य के साथ-साथ यहां अंतरराष्ट्रीय स्तर का प्रशिक्षण शुरू हो जाएगा। पिछले दिनों एनएसआरटीसी में विपरीत जलवायु में गुणवत्तायुक्त चावल का उत्पादन बढ़ाने के लिए कंबोडिया के एक दल के प्रशिक्षण के साथ इसकी शुरूआत हो चुकी है।
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बीएचयू का कृषि विज्ञान संस्थान भी मदद कर रहा है। केंद्र का फोकस इस बात पर होगा कि पूर्वी भारत के साथ-साथ नेपाल, बांग्लादेश और अफ्रीकी देशों में ऐसे चावल का उत्पादन बढ़ाया जाए, जिसमें आर्सेनिक और भारी धातुओं की कमी हो और मिनरल्स ज्यादा हों।
इस तरह से पूर्वी भारत में कुपोषण की समस्या से निपटा जा सकेगा। गौरतलब है कि पूर्वी और दक्षिणी भारत में चावल मुख्य खाद्य पदार्थ है, जबकि धान का उत्पादन पंजाब और हरियाणा में ज्यादा होता है।
पूर्वी भारत के राज्यों में धान की खेती वर्षा पर निर्भर करती है। कभी बाढ़ तो कभी सूखे के कारण दक्षिण भारत की तरह पूर्वी भारत में धान की अच्छी खेती नहीं हो पाती है। जो धान पैदा होता भी है, उसके चावल उन्नत किस्म के नहीं होते हैं।
फिलीपींस में आईआरआरआई के मुख्यालय से बाहर यह पहला केंद्र
नरेंद्र मोदी
- फोटो : self
उत्तर प्रदेश के तराई क्षेत्र के जिलों और पूर्वांचल के चंदौली और मिर्जापुर में उत्पादित होने वाले धान की प्रजातियों में तो विविधता पाई जाती है पर गुणवत्ता की स्थिति अच्छी नहीं है। इस बीच आसियान सम्मेलन में शिरकत करने के लिए फिलीपींस के दौरे पर पहुंचे पीएम मोदी ने सोमवार को लॉस बनोस स्थित आईआरआरआई जाकर वाराणसी में खुलने वाले केंद्र के बारे में जानकारी ली।
पीएमओ ने इस बारे में ट्वीट कर बताया है कि वाराणसी का चावल अनुसंधान केंद्र किसानों की आय बढ़ाने में और चावल की उत्कृष्ट उत्पादकता साबित करने में मददगार होगा। चावल की उत्पादकता और बढ़ेगी साथ ही किसानों को कुशल एवं रोजगारपरक बनाएगी। इसी वर्ष जुलाई में आईआरआरआई ने वाराणसी में दक्षिण एशिया का क्षेत्रीय केंद्र की स्थापना के प्रस्ताव को मंजूरी दी थी।
फिलीपींस में आईआरआरआई के मुख्यालय से बाहर यह पहला केंद्र होगा। वाराणसी स्थित एनएसआरटीसी के डायरेक्टर डॉ. अरविंद नाथ सिंह ने कहा कि केंद्र के विधिवत शुरू होने पर धान की नई प्रजातियों के साथ-साथ तकनीक विकसित की जाएगी, जो किसानों को ज्यादा गुणवत्ता वाली उत्पादकता देंगी। इससे किसानों का मुनाफा तो बढ़ेगा ही, कुपोषण से मुक्ति का मार्ग भी प्रशस्त होगा।
यूपी में धान का उत्पादन और क्षेत्रफल
वर्ष उत्पादन रकबा
2014-15 132 58.42
2015-16 124 58.37
2016-17 143 59.65
2017-18 151 60.00
(नोट: उत्पादन का आंकड़ा लाख मी.टन और क्षेत्रफल लाख हेक्टेयर में है)
पीएमओ ने इस बारे में ट्वीट कर बताया है कि वाराणसी का चावल अनुसंधान केंद्र किसानों की आय बढ़ाने में और चावल की उत्कृष्ट उत्पादकता साबित करने में मददगार होगा। चावल की उत्पादकता और बढ़ेगी साथ ही किसानों को कुशल एवं रोजगारपरक बनाएगी। इसी वर्ष जुलाई में आईआरआरआई ने वाराणसी में दक्षिण एशिया का क्षेत्रीय केंद्र की स्थापना के प्रस्ताव को मंजूरी दी थी।
फिलीपींस में आईआरआरआई के मुख्यालय से बाहर यह पहला केंद्र होगा। वाराणसी स्थित एनएसआरटीसी के डायरेक्टर डॉ. अरविंद नाथ सिंह ने कहा कि केंद्र के विधिवत शुरू होने पर धान की नई प्रजातियों के साथ-साथ तकनीक विकसित की जाएगी, जो किसानों को ज्यादा गुणवत्ता वाली उत्पादकता देंगी। इससे किसानों का मुनाफा तो बढ़ेगा ही, कुपोषण से मुक्ति का मार्ग भी प्रशस्त होगा।
यूपी में धान का उत्पादन और क्षेत्रफल
वर्ष उत्पादन रकबा
2014-15 132 58.42
2015-16 124 58.37
2016-17 143 59.65
2017-18 151 60.00
(नोट: उत्पादन का आंकड़ा लाख मी.टन और क्षेत्रफल लाख हेक्टेयर में है)