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बेटी पढ़ाओ और जल संरक्षण का संकल्प ले रवाना हुए जिज्ञासु
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विहंगम योग संत समाज के 98वें वार्षिकोत्सव से जिज्ञासु बेटी पढ़ाओ, जल संरक्षण सहित पांच संकल्पों को लेकर रवाना हुए। आचार्य स्वतंत्रदेव महाराज एवं संत प्रवर विज्ञान देव महाराज ने जिज्ञासुओं से प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी द्वारा बताए हुए पांच संकल्पों को पूर्ण करने का संकल्प दिलाया। जिज्ञासु संकल्प लेने के बाद अपने-अपने गंतव्य को रवाना होते रहे।
बृहस्पतिवार को स्वर्वेद महामंदिर धाम उमरहां में आजादी के अमृत महोत्सव के रूप में आयोजित विहंगम योग संत समाज के 98वें वार्षिकोत्सव का समापन हुआ। धाम क्षेत्र में तीन दिनों तक स्वर्वेद की अमृत ज्ञान गंगा बहती रही और सभी भक्त संकल्प के बाद दर्शन कर अपने गंतव्य स्थान को रवाना होते रहे। रवाना होने से पहले शिष्यों ने सद्गुरु आचार्य स्वतंत्रदेव महाराज एवं संत प्रवर विज्ञान देव महाराज के समक्ष अपने दोनों हाथ उठाकर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के बताए संकल्प बेटी पढ़ाओ, जल संरक्षण, प्राकृतिक खेती, सेवा तथा सद्गुरु के बताएं संकल्प को जन-जन तक पहुंचाने का संकल्प लिया।
प्रधानमंत्री ने 14 दिसंबर की सभा के दौरान बेटी पढ़ाओ और बेटियों का स्किल डेवलपमेंट करने के लिए सक्षम लोगों से बेटियों को गोद लेने का आह्वान किया था। इसके अलावा पीएम ने जल संरक्षण, सेवा, स्वच्छता और आर्गेनिक खेती को बढ़ावा देने का भी संकल्प दिलाया था। विहंगम योग समाज के अनुयायियों के विदा होने के बाद वाराणसी गाजीपुर गोरखपुर एनएच पर भारी भीड़ जमा हो गई। थानाध्यक्ष राजेश त्रिपाठी व चिरईगांव चौकी प्रभारी राहुल मौर्य पुलिस कर्मियों के साथ उन्हें रवाना करते रहे। आयोजन में उत्तर प्रदेश के साथ गुजरात, महाराष्ट्र, बंगाल, दिल्ली, राजस्थान, हरियाणा, बिहार, झारखंड, छत्तीसगढ़, उत्तराखंड, असम आदि प्रदेशों से लगभग डेढ़ लाख की संख्या में विहंगम योग के अनुयायी साधक पहुंचे थे।
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आत्मोद्धार का सर्वोत्तम साधन है भक्ति
सदगुरु आचार्य स्वतंत्र देव महाराज ने कहा कि आत्मोद्धार का सर्वश्रेष्ठ साधन है भक्ति। लेकिन आज की भक्ति अज्ञान, आडंबरयुक्त जड़ भक्ति है। जड़ भक्ति से ऊपर उठकर भक्ति के चेतन पथ पर अग्रसर होने की आवश्यकता है। अधिकांश व्यक्तियों का जीवन अविद्या एवं अंधकार में व्यतीत हो रहा है। विहंगम योग ही विशुद्ध चेतन भक्ति है। जिसमें साधक संपूर्ण विकारों को त्याग कर आतंरिक शुद्ध स्वरूप की प्राप्ति कर लेता है। उन्होंने कहा कि जैसे कमल का पत्ता जल से ही उत्पन्न होता है और जल में ही रहता है पर वह जल से लिप्त नहीं होता। ऐसे ही एक विहंगम योगी संसार में रहते हुए संसार के कार्यों को करते हुए भी इससे निर्लिप्त रहता है।
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बृहस्पतिवार को स्वर्वेद महामंदिर धाम उमरहां में आजादी के अमृत महोत्सव के रूप में आयोजित विहंगम योग संत समाज के 98वें वार्षिकोत्सव का समापन हुआ। धाम क्षेत्र में तीन दिनों तक स्वर्वेद की अमृत ज्ञान गंगा बहती रही और सभी भक्त संकल्प के बाद दर्शन कर अपने गंतव्य स्थान को रवाना होते रहे। रवाना होने से पहले शिष्यों ने सद्गुरु आचार्य स्वतंत्रदेव महाराज एवं संत प्रवर विज्ञान देव महाराज के समक्ष अपने दोनों हाथ उठाकर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के बताए संकल्प बेटी पढ़ाओ, जल संरक्षण, प्राकृतिक खेती, सेवा तथा सद्गुरु के बताएं संकल्प को जन-जन तक पहुंचाने का संकल्प लिया।
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प्रधानमंत्री ने 14 दिसंबर की सभा के दौरान बेटी पढ़ाओ और बेटियों का स्किल डेवलपमेंट करने के लिए सक्षम लोगों से बेटियों को गोद लेने का आह्वान किया था। इसके अलावा पीएम ने जल संरक्षण, सेवा, स्वच्छता और आर्गेनिक खेती को बढ़ावा देने का भी संकल्प दिलाया था। विहंगम योग समाज के अनुयायियों के विदा होने के बाद वाराणसी गाजीपुर गोरखपुर एनएच पर भारी भीड़ जमा हो गई। थानाध्यक्ष राजेश त्रिपाठी व चिरईगांव चौकी प्रभारी राहुल मौर्य पुलिस कर्मियों के साथ उन्हें रवाना करते रहे। आयोजन में उत्तर प्रदेश के साथ गुजरात, महाराष्ट्र, बंगाल, दिल्ली, राजस्थान, हरियाणा, बिहार, झारखंड, छत्तीसगढ़, उत्तराखंड, असम आदि प्रदेशों से लगभग डेढ़ लाख की संख्या में विहंगम योग के अनुयायी साधक पहुंचे थे।
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आत्मोद्धार का सर्वोत्तम साधन है भक्ति
सदगुरु आचार्य स्वतंत्र देव महाराज ने कहा कि आत्मोद्धार का सर्वश्रेष्ठ साधन है भक्ति। लेकिन आज की भक्ति अज्ञान, आडंबरयुक्त जड़ भक्ति है। जड़ भक्ति से ऊपर उठकर भक्ति के चेतन पथ पर अग्रसर होने की आवश्यकता है। अधिकांश व्यक्तियों का जीवन अविद्या एवं अंधकार में व्यतीत हो रहा है। विहंगम योग ही विशुद्ध चेतन भक्ति है। जिसमें साधक संपूर्ण विकारों को त्याग कर आतंरिक शुद्ध स्वरूप की प्राप्ति कर लेता है। उन्होंने कहा कि जैसे कमल का पत्ता जल से ही उत्पन्न होता है और जल में ही रहता है पर वह जल से लिप्त नहीं होता। ऐसे ही एक विहंगम योगी संसार में रहते हुए संसार के कार्यों को करते हुए भी इससे निर्लिप्त रहता है।