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लकड़ी के बुलडोजर बाबा की बढ़ी मांग
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सियासत में नाम कमाने के बाद बुलडोजर अब खिलौने की दुनिया में भी नाम कमाने लगा है। लकड़ी के नायाब खिलौनों के लिए मशहूर बनारस के बाजार में जल्दी ही बुलडोजर बाबा नाम का खिलौना धूम मचाएगा। देश के कई राज्यों से बुलडोजर बाबा नाम के खिलौने के 20 हजार आर्डर बनारस के कारोबारी को प्राप्त हुए हैं।
ये आर्डर चार शहरों दिल्ली, मुंबई, जयपुर और बंगलूरू से प्राप्त हुए हैं। खिलौना कारोबारी बिहारी लाल अग्रवाल के मुताबिक बनारस निर्मित खिलौनों की मांग न सिर्फ देश बल्कि विदेशों में भी है। आर्डर इतने हैं कि अगले चार माह तक के आर्डर को पूरा करने के लिए कर्मचारियों को अतिरिक्त काम करना पड़ रहा है। फिलहाल लकड़ी के बुलडोजर बाबा बनाने के काम में करीब 20 अतिरिक्त कारीगरों को काम पर लगाया गया है। लकड़ी के उत्पाद प्रकृति के लिए नुकसानदेह नहीं होते लिहाजा इसकी मांग अधिक है। मांग को जल्द से जल्द पूरा करने का प्रयास किया जाएगा।
प्राकृतिक रंगों का करते हैं प्रयोग
बच्चों के स्वास्थ्य को ध्यान में रखते हुए कारीगर रंगों को चढ़ाने में सावधानी बरतते हैं। खिलौनों पर केमिकल युक्त रंगों के बजाय प्राकृतिक रंगों को सावधानी पूर्वक इस्तेमाल किया जाता है। खिलौनों की शाइनिंग बढ़ाने के लिए भी खास तरह के केमिकल का लेपन किया जाता है।
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काशी विश्वनाथ धाम की अनुकृति की सबसे खास
बनारस आने वाला हर पर्यटक अपनी यादों में काशी विश्वनाथ धाम को सहेज लेना चाहता है। लिहाजा काशी विश्वनाथ की अनुकृति पर्यटकों की चहेती बनकर उभरी है। पर्यटक लकड़ी के अलावा धातु की अनुकृति की भी मांग कर रहे हैं। पुणे निवासी शालिनी अपने परिवार के साथ वाराणसी आई हैं। उन्होंने बताया धाम में शीश नवाने के बाद काशी विश्वनाथ दरबार की यादों को सहेजने के लिए गोदौलिया बाजार से धाम की अनुकृति खरीद उसकी सेल्फी लेकर परिजनों से साझा की है।
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ये आर्डर चार शहरों दिल्ली, मुंबई, जयपुर और बंगलूरू से प्राप्त हुए हैं। खिलौना कारोबारी बिहारी लाल अग्रवाल के मुताबिक बनारस निर्मित खिलौनों की मांग न सिर्फ देश बल्कि विदेशों में भी है। आर्डर इतने हैं कि अगले चार माह तक के आर्डर को पूरा करने के लिए कर्मचारियों को अतिरिक्त काम करना पड़ रहा है। फिलहाल लकड़ी के बुलडोजर बाबा बनाने के काम में करीब 20 अतिरिक्त कारीगरों को काम पर लगाया गया है। लकड़ी के उत्पाद प्रकृति के लिए नुकसानदेह नहीं होते लिहाजा इसकी मांग अधिक है। मांग को जल्द से जल्द पूरा करने का प्रयास किया जाएगा।
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प्राकृतिक रंगों का करते हैं प्रयोग
बच्चों के स्वास्थ्य को ध्यान में रखते हुए कारीगर रंगों को चढ़ाने में सावधानी बरतते हैं। खिलौनों पर केमिकल युक्त रंगों के बजाय प्राकृतिक रंगों को सावधानी पूर्वक इस्तेमाल किया जाता है। खिलौनों की शाइनिंग बढ़ाने के लिए भी खास तरह के केमिकल का लेपन किया जाता है।
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काशी विश्वनाथ धाम की अनुकृति की सबसे खास
बनारस आने वाला हर पर्यटक अपनी यादों में काशी विश्वनाथ धाम को सहेज लेना चाहता है। लिहाजा काशी विश्वनाथ की अनुकृति पर्यटकों की चहेती बनकर उभरी है। पर्यटक लकड़ी के अलावा धातु की अनुकृति की भी मांग कर रहे हैं। पुणे निवासी शालिनी अपने परिवार के साथ वाराणसी आई हैं। उन्होंने बताया धाम में शीश नवाने के बाद काशी विश्वनाथ दरबार की यादों को सहेजने के लिए गोदौलिया बाजार से धाम की अनुकृति खरीद उसकी सेल्फी लेकर परिजनों से साझा की है।