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गोवंश के संरक्षण की हकीकतः बाड़े में कैद तड़पते पशुओं को नोचते रहे कौवे व कुत्ते

Sun, 16 Feb 2020 10:54 PM IST
स्‍वाधीन तिवारी न्यूज डेस्क, अमर उजाला, मिर्जापुर
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, मिर्जापुर Published by: स्‍वाधीन तिवारी Updated Sun, 16 Feb 2020 10:54 PM IST
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In UP, dogs kept trying to preserve the cow dynasty: animals suffering in enclosure
बाड़े में तड़प रहे गोवंश - फोटो : अमर उजाला।

बेजुबान, मासूम गोवंशों के संरक्षण और संवर्धन को लेकर तमाम दावे किए जा रहे हैं तो वहीं दूसरी तरफ जमीनी हकीकत बिल्कुल इसके उलट है। रविवार को वायरल एक वीडियो ने मिर्जापुर जिला प्रशासन की नींद उड़ा दी। वायरल वीडियो में एक पशुबाड़े में कैद तड़पते गोवंश नजर आ रहे हैं जिनको जीवित ही कौवे व कुत्ते-नोच रहे हैं। बाड़े में पशुओं के कंकाल भी साफ दिखाई दे रहे हैं।

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रोंगटे खड़े कर देने वाला वीडियो लालगंज के धोबहा देवघटा गांव में बने बाड़े का है। सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हो रहे वीडियो की जानकारी जब जिला प्रशासन को हुई तो अफरातफरी मच गई। आनन-फानन में अधिकारियों के नेतृत्व में कुछ टीमों को स्थलीय निरीक्षण के लिए भेजा गया। आसपास के ग्रामीणों ने बताया कि आए दिन बाड़े में पशु मरते रहते हैं।
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पास ही स्थित महाविद्यालय के लोगों ने भी बाड़े में मरने वाले पशुओं और दुर्गंध से होने वाली समस्या की बात शिकायती लहजे में बताई। सूत्रों की मानें तो यह वीडियो दो से तीन दिन पुराना है। वहीं जिलाधिकारी सुशील कुमार पटेल ने बताया कि यह वीडियो काफी पुराना है।
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उन्होंने बताया कि मुख्य पशुचिकित्सा अधिकारी डॉ कपूर सिंह ने भी मौका मुआयना किया पर वायरल वीडियो जैसी कोई चीज वहां नहीं मिली।छुट्टा पशुओं से फसलों को पहुंच रहे नुकसान से परेशान सोनबरसा, पुरालोकई, उरुवा, सहजी, नदियहना, बघई, धोबहा देवघटा के ग्रामीणों ने आपसी सहमति से दो साल पहले धोबहा देवघटा गांव में एक पशुबाड़ा बनाया। खेतों को नुकसान पहुंचाते पशु मिलने पर उन्हें इसी बाड़े में कैद कर दिया जाता है।
 

In UP, dogs kept trying to preserve the cow dynasty: animals suffering in enclosure
बाड़े में तड़प रहे गोवंश - फोटो : अमर उजाला

स्थानीय लोगों की मानें तो चारा पानी के नाम पर उन्हें कुछ नहीं दिया जाता। रोज कुछ चरवाहे पहाड़ियों पर चराते हैं और आधा किलोमीटर दूर स्थित नदी से पानी पिलाकर फिर से उन्हें बाड़े में कैदकर देते हैं। ऐसे में अक्सर पशुओं की मौत हो जाती है। मृत पशुओं को नदी के किनारे फेंक दिया जाता है। बाड़े में खाने, पीने की कोई व्यवस्था नहीं है। पशुओं को दिन में एक बार पानी पिलाने के लिए नदी पर ले जाया जाता है। बाड़े में कोई सुविधा नहीं है। आसपास व यहां से गुजरने वाले लोगों ने बताया कि दो तीन दिन पहले भी यहां पांच-छह पशु मर गए थे।

ग्रामीणों के रहमों करम पर जीवित हैं बेजुबान

पशु बाड़े में बंद छुट्टा पशु ग्रामीणों के रहमो करम पर जी रहे हैं। पहली बार ऐसा मामला नहीं हुआ है। पांच जनवरी 2019 को बेलन नदी के मोहरा घाट पर 25 गोवंश मृत मिले थे। उस समय भी पूरा महकमा क्षेत्र में जांच के लिए पहुंचा था। छुट्टा पशुओं को हांककर नदी में कुदाने के चलते पशुओं के मौत की चर्चा रही।

हालांकि इस मामले में जांच की बात आई गई हो गई। उस दौरान अधिकारियों ने पशु बाड़े में बिजली, पानी की व्यवस्था करने का आश्वासन दिया पर आज तक वहां कुछ नहीं हो पाया। हालत यह है कि ग्रामीण खाने पीने के लिए दे देते हैं तो उसी से पशुओं की सांस चलती रहती है।

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