वाराणसी: काशी विद्यापीठ में छात्रों ने कुलपति समेत शिक्षकों को बनाया बंधक, जानें पूरा मामला
महात्मा गांधी काशी विद्यापीठ के छात्रों ने प्रशासनिक भवन पर ताला जड़कर धरना प्रदर्शन भी किया। छात्रों ने विश्वविद्यालय प्रशासन के खिलाफ नारेबाजी भी की। वह कक्षाएं शुरू कराने की मांग कर रहे थे।
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सुबह से शाम तक तालाबंदी के कारण विश्वविद्यालय में कामकाज प्रभावित रहे। सुबह 10.30 बजे छात्र पंत प्रशासनिक भवन पहुंचे। वहां ताला जड़ दिया और धरने पर बैठ गए। हंगामे और आक्रोश को देख विश्वविद्यालय प्रशासन ने पुलिस को सूचना दी।
बावजूद छात्र कुलपति और कुलसचिव से कक्षाओं के संचालन के लिए लिखित आश्वासन की मांग पर अड़े रहे। तालाबंदी के कारण इंटरनल क्वालिटी एश्योरेंस कमेटी (आईक्यूएसी) की मीटिंग के लिए आए हेड, डीन समेत कुलपति, कुलसचिव व कर्मचारी अंदर ही बंद हो गए। छात्रों ने प्रशासनिक भवन के सभी निकास द्वार को बंद कर दिया था।
पुलिस अधिकारियों ने छात्रों को समझा-बुझाकर ताला खुलवाने का प्रयास किया, लेकिन वह अड़े रहे। छात्रों का कहना था कि 16 अगस्त से कक्षाएं शुरू करने का आदेश जारी किया गया था, बावजूद अभी तक पढ़ाई नहीं शुरू हुई। दूरदराज से रोजाना छात्र विश्वविद्यालय आ रहे हैं और कक्षाएं नहीं चलने से बैरंग लौट जा रहे हैं।
वहीं, शाम चार बजे कुलपति छात्रों से मिलने पहुंचे। छात्रों ने कक्षाओं के संचालन, बायोमैट्रिक हाजिरी, सफाई और छात्रावास की व्यवस्था दुरुस्त कराने की मांग की। कुलपति प्रो. एके त्यागी ने छात्रों की मांग को जल्द से जल्द पूरा करने का आश्वासन दिया। इसके बाद छात्रों ने प्रशासनिक भवन का ताला खोला।
आज से नियमित चलेंगी कक्षाएं
जनसंपर्क अधिकारी डॉ. नवरत्न सिंह ने बताया कि कक्षाओं का संचालन छह सितंबर से ही किया जा रहा है। आठ सितंबर से अब सारी कक्षाएं नियमित चलेंगी। प्रदर्शन करने वालों में शिवजनक गुप्ता, अभिषेक सोनकर, विवेक सिंह, शुभम पाल, विवेक कुमार, प्रियेशु यादव, सूर्यांश, प्रभु पटेल, सुशील यादव सहित अन्य छात्र शामिल रहे।
बेनतीजा रही बैठक
विश्वविद्यालय में सुबह 10 से आईक्यूएसी की बैठक बुलाई गई थी। 10.30 बजे से तालाबंदी के बाद हेड और डीन भी अंदर ही साढ़े छह घंटे तक फंसे रहे। हंगामे के कारण आईक्यूएसी की बैठक भी बेनतीजा रही। वहीं, विश्वविद्यालय में काम के लिए आने वाले छात्र-छात्राओं को कार्यालय बंद होने के कारण वापस लौटना पड़ा। कर्मचारी दीवार फांदकर कार्यालय पहुंचे।