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नपुंसकता से राहत दिलाएगा बाजीकरण चूर्ण
ब्यूरो/अमर उजाला, वाराणसी
Updated Mon, 07 Dec 2015 02:16 AM IST
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आज के भौतिकवादी युग में तनाव की अधिकता पौरुष को प्रभावित कर रही है। युवा और प्रौढ़ दोनों ही तनावग्रस्त नपुंसकता के शिकार हो रहे हैं। इस वजह से उनके सामाजिक और व्यक्तिगत जीवन में समरसता नहीं रह गई। साथ ही अवसाद से ग्रस्त होते जा रहे हैं।
ऐसे रोगियों के लिए बीएचयू के आयुर्वेद संकाय के रसशास्त्र विभाग के शोध छात्र डॉ. हिमांशु बरुआ ने बाजीकरण चूर्ण तैयार किया है। तीन साल के शोध के बाद चूर्ण के रूप में ये दवा ईजाद की गई है।
रसशास्त्र विभाग के अध्यक्ष प्रो. आनंद चौधरी के निर्देशन में तैयार इस दवा का इस्तेमाल सर सुंदरलाल चिकित्सालय में नपुंसकता के 40 रोगियों पर किया गया। 21 से 50 साल के रोगियों को करीब नौ सप्ताह तक यह दवा दी गई। प्रो. चौधरी का दावा है कि इस दवा का 70 फीसदी मरीजों में सकारात्मक असर देखा गया है।
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बताया कि डॉ. बरुआ का शोध इस साल इंटरनेशनल जर्नल ऑफ रिसर्च इन आयुर्वेद फार्मेसी के अक्तूबर के अंक में प्रकाशित हो चुका है। प्रो. चौधरी का कहना है बाजीकरण चूर्ण का इस्तेमाल किसी भी तरह से हानिकारक नहीं है और ना ही यह इस दवा को लेने का आदी बनाता है।
बीएचयू की आयुर्वेदिक फार्मेसी ने इस औषधि का निर्माण किया है। फार्मेसी में यह दवा उपलब्ध भी है, जिसका चिकित्सकीय परामर्श के तहत सेवन किया जा सकता है।
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ऐसे रोगियों के लिए बीएचयू के आयुर्वेद संकाय के रसशास्त्र विभाग के शोध छात्र डॉ. हिमांशु बरुआ ने बाजीकरण चूर्ण तैयार किया है। तीन साल के शोध के बाद चूर्ण के रूप में ये दवा ईजाद की गई है।
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रसशास्त्र विभाग के अध्यक्ष प्रो. आनंद चौधरी के निर्देशन में तैयार इस दवा का इस्तेमाल सर सुंदरलाल चिकित्सालय में नपुंसकता के 40 रोगियों पर किया गया। 21 से 50 साल के रोगियों को करीब नौ सप्ताह तक यह दवा दी गई। प्रो. चौधरी का दावा है कि इस दवा का 70 फीसदी मरीजों में सकारात्मक असर देखा गया है।
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बताया कि डॉ. बरुआ का शोध इस साल इंटरनेशनल जर्नल ऑफ रिसर्च इन आयुर्वेद फार्मेसी के अक्तूबर के अंक में प्रकाशित हो चुका है। प्रो. चौधरी का कहना है बाजीकरण चूर्ण का इस्तेमाल किसी भी तरह से हानिकारक नहीं है और ना ही यह इस दवा को लेने का आदी बनाता है।
बीएचयू की आयुर्वेदिक फार्मेसी ने इस औषधि का निर्माण किया है। फार्मेसी में यह दवा उपलब्ध भी है, जिसका चिकित्सकीय परामर्श के तहत सेवन किया जा सकता है।