आईआईटी बीएचयू: मंत्रोच्चार के बीच शुरू हुआ 15वां दीक्षांत समारोह, आदित्य बिड़ला ग्रुप के चेयरमैन को मिली उपाधि
आईआईटी बीएचयू का 15वां दीक्षांत समारोह वैदिक मंत्रोच्चार और पारंपरिक कार्यक्रमों के साथ शुरू हुआ। कुमार मंगलम बिड़ला ने 124 अवॉर्ड प्रदान किए। हरजस कौर को सर्वाधिक 15 मेडल और प्रमाणपत्र मिले। सौर ऊर्जा से कम नुकसान में उपयोगी बिजली बनाने की तकनीक विकसित करने वाले मध्य प्रदेश के प्रखर नेमा को पहली बार ग्रीन एनर्जी मेडल से सम्मानित किया गया।
विस्तार
आईआईटी बीएचयू का 15वां दीक्षांत समारोह शनिवार को वैदिक मंत्रोच्चार और पारंपरिक अंदाज में शुरू हुआ। करीब 45 मिनट तक चले मंत्रोच्चार के बीच शिष्टमंडल का स्वागत किया गया। इसके बाद महामना पंडित मदन मोहन मालवीय की प्रतिमा पर माल्यार्पण, वंदे मातरम और संस्थान के कुलगीत का गायन हुआ। समारोह में संस्थान की विरासत और उपलब्धियों पर आधारित फिल्म भी दिखाई गई।
डीन देवेंद्र कुमार ने उपाधियों की घोषणा की। संस्थान के निदेशक प्रो. अमित पात्रा ने स्वागत भाषण दिया और संस्थान की उपलब्धियों को प्रस्तुत किया। उन्होंने उपाधि और मेडल प्राप्त करने वाले विद्यार्थियों को शपथ भी दिलाई। समारोह में आदित्य बिड़ला समूह के चेयरमैन कुमार मंगलम बिड़ला ने विद्यार्थियों को कुल 124 अवॉर्ड प्रदान किए। हरजस कौर को प्रेसिडेंट मेडल के साथ सर्वाधिक 15 मेडल और प्रमाणपत्र मिले। वहीं, प्रतीक त्रिपाठी और मेहुल कुमार को डायरेक्टर्स गोल्ड मेडल से सम्मानित किया गया। इस अवसर पर कुमार मंगलम बिड़ला को आईआईटी बीएचयू की ओर से मानद डॉक्टर ऑफ साइंस की उपाधि प्रदान की गई।
सौर ऊर्जा को उपयोगी बिजली में बदलने की तकनीक पर सम्मान
दीक्षांत समारोह में मध्य प्रदेश के सागर निवासी छात्र प्रखर नेमा को सौर ऊर्जा के क्षेत्र में शोध के लिए पहली बार ग्रीन एनर्जी मेडल प्रदान किया गया। कुमार मंगलम बिड़ला ने उन्हें मेडल के साथ नकद पुरस्कार और स्मृति चिह्न देकर सम्मानित किया।
प्रखर ने पावर इलेक्ट्रॉनिक्स के क्षेत्र में शोध करते हुए सौर और नवीकरणीय ऊर्जा से अधिक दक्ष एवं सुरक्षित बिजली तैयार करने की तकनीक विकसित की है। उन्होंने हाई-गेन डीसी-डीसी पावर कन्वर्टर और मल्टी-आउटपुट हाइब्रिड कन्वर्टर तैयार किया है। इस तकनीक का उद्देश्य सौर ऊर्जा से उत्पादित बिजली को कम से कम ऊर्जा नुकसान के साथ उपयोग के योग्य बनाना है।
प्रखर का शोध नवीकरणीय ऊर्जा के बेहतर इस्तेमाल और बिजली की दक्षता बढ़ाने की दिशा में महत्वपूर्ण माना जा रहा है। दीक्षांत समारोह में मेधावी विद्यार्थियों को सम्मानित करने के साथ ही शोध और नवाचार के जरिए समाज एवं देश की जरूरतों को पूरा करने का संदेश भी दिया गया।