महाशिवरात्रि पर्व तक अगर रहा यही हाल तो बहुत कठिन होगी पंचक्रोशी की राह

आलोक कुमार त्रिपाठी, अमर उजाला, वाराणसी Published by: स्‍वाधीन तिवारी Updated Thu, 20 Feb 2020 01:12 AM IST
रामेश्वर मंदिर
रामेश्वर मंदिर - फोटो : अमर उजाला।
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महाशिवरात्रि पर वाराणसी में पंचक्रोशी यात्रा आसान नहीं होगी। कहीं पथरीले रास्ते हैं तो कहीं अधूरी सड़क। जो गढ्ढे हैं, उनमें नाले का पानी जमा है। नंगे पांव परिक्रमा करने वाले शिव भक्तों को गंदगी से होकर गुजरना पड़ सकता है। साथ ही गिट्टियां उनके पांवों को छलनी करेगी।
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पंचक्रोशी के प्रथम पड़ाव से लेकर अंतिम पड़ाव तक श्रद्धालुओं को अव्यवस्थाओं से दो चार होना पड़ेगा। 2018 में प्रदेश सरकार ने पंचक्रोशी मार्ग पर सुविधाओं और इंतजाम के लिए 101 करोड़ रुपये जारी किए थे। मगर, पंचक्रोशी यात्रा की तैयारियों के नाम पर प्रशासन की कवायद सिर्फ कागजों पर है। न तो सफाई हुई है और न ही पेयजल की व्यवस्था है।


यह हाल तब है जब हजारों शिव भक्त 24 घंटे में शिव नगरी की परिक्रमा करते हैं। इस अनुष्ठान को पूरा करने का संकल्प लेकर पूर्वांचल के विभिन्न जिलों से आते हैं। उनकी परीक्षा अर्द्धनिर्मित सड़क, गढ्ढे और राह में बिखरी गिट्टियां लेंगी।

कंदवा : दो साल से टूटी है रेलिंग, सड़कें भी बदहाल

यात्रा का पहला पड़ाव कं दवा ही दुर्व्यवस्थाओं की चपेट में है। यहां न तो साफ-सफाई है, न ही पेयजल की व्यवस्था। धर्मशालाओं पर अवैध कब्जे हैं। कहीं उपले तो कहीं कबाड़ भरा है। कहने को दस धर्मशालाएं हैं, लेकिन मरम्मत नहीं होने से अधिकतर की हालत इतनी खराब है कि वहां ठहरना तो छोड़िए, कदम रखना भी मुश्किल है। रास्ते भी दुरुस्त नहीं हैं। पोखरे के पश्चिम और दक्षिणी कोने पर दो साल पहले भीड़ के दबाव से रेलिंग टूट गई थी, वह भी उसी हाल में पड़ी है।

panchkroshi parikrma
panchkroshi parikrma - फोटो : अमर उजाला

भीमचंडी की राह नहीं आसान

कंदवा से भीमचंडी जाने वाली सड़क भी बदहाल है। रास्ते पर कई जगह गिट्टियां बिखरी हुई हैं तो कई जगह गड्ढे हैं। रात में यहां से निकलने पर श्रद्धालुओं के चोटिल होने की आशंका है। धर्मशालाओं की हालत भी दुरुस्त नहीं है।

बंद कर दिया पुराना मार्ग, टूटेगी परंपरा

राजातालाब में ओवरब्रिज निर्माण कार्य लंबित होने के कारण श्रद्धालुओं को परेशानी होगी। पंचक्रोशी मार्ग किनारे नाला निर्माण हो रहा है, जिससे वहां गड्ढा है। मिट्टी का ढेर सड़क पर लगा है। लिहाजा, पुराने रास्ते को बंद कर दिया गया है। इसे लेकर श्रद्धालुओं में रोष है। उनका कहना है कि पुराना मार्ग बंद किए जाने से परंपरा खंडित होगी।

राजातालाब के निवासी चंदन मेमोरियल चैरिटेबल ट्रस्ट के कृष्णा जायसवाल, पप्पू विश्वकर्मा, राजू विश्वकर्मा, रामराज केसरी, चंद्रशेखर आदि ने उपजिलाधिकारी राजातालाब को पत्र देकर सड़क दुरुस्त कराने की मांग की है।

कपिलधारा पंचकोशी मार्ग पर शौचालय में गंदगी और लगा ताला
कपिलधारा पंचकोशी मार्ग पर शौचालय में गंदगी और लगा ताला - फोटो : अमर उजाला

पांचों पंडवा में सबसे ज्यादा मुश्किल

चौथे पड़ाव शिवपुर में श्रद्धालुओं को सबसे अधिक मुश्किल झेलनी होगी। हरहुआ से शिवपुर जाने वाले मार्ग को जगह-जगह खोदकर छोड़ दिया गया है। कहीं नाले का पानी बह रहा है तो कहीं गड्ढा है। सड़क के बीचोंबीच सीवर का ढक्कन पड़ा है। राह में पड़ने वाले छोटे-छोटे मंदिरों के आगे भी गड्ढे खोद दिए गए हैं। स्थानीय लोगों इन्हें भरने का प्रयास कर रहे हैं।

प्रभु श्रीराम ने भी की थी परिक्रमा

मणिकर्णिका घाट से आरंभ होने वाली 25 कोस की पंचक्रोशी यात्रा यह यात्रा भीमचंडी, रामेश्वर, पांचों पंडवा और कपिल धारा से होते हुए वापस मणिकर्णिका घाट पहुंचकर विराम लेगी। पौराणिक मान्यताओं के अनुसार, भगवान श्रीराम ने भी पंचक्रोशी यात्रा की थी। गंगा स्नान करने के बाद विशेश्वर महादेव के दर्शन-पूजन और संकल्प के साथ श्रद्धालु यात्रा पर निकलते हैं। यात्रा के दौरान वह 108 तीर्थ स्थलों और मंदिरों में दर्शन-पूजन करते हैं।
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