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Varanasi Nagar Nigam: नगर निगम सीमा में बिना नंबर के 38 हजार मकान, यह रणनीति भी नहीं आ रही काम
Wed, 28 Feb 2024 04:07 PM IST
अमन विश्वकर्मा
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, वाराणसी
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, वाराणसी
Published by: अमन विश्वकर्मा
Updated Wed, 28 Feb 2024 04:07 PM IST
सार
Varanasi Nagar Nigam: वाराणसी में बने नए भवनों का मकान नंबर जारी करने के साथ उसे निगम के अभिलेखों में दर्ज किया जाएगा। साथ ही गृहकर का निर्धारण किया जाएगा। मकान नंबर लेने के लिए भवन स्वामियों से क्षेत्रफल और रजिस्ट्री के आधार पर शुल्क लिया जाता है।
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नगर निगम
- फोटो : अमर उजाला
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विस्तार
नगर निगम सीमा में जीआईएस सर्वे में 38 हजार बिना पते के मकान चिह्नित किए गए हैं। इनके पास मकान नंबर ही नहीं है। ये नगर निगम के गृहकर के रिकॉर्ड में भी नहीं हैं। वहीं, 22 हजार संपत्तियां खाली प्लॉट हैं। ज्यादातर मकान और संपत्तियां भेलूपुर और वरुणा पार जोन में हैं।
वर्तमान में नगर निगम 2.21 लाख भवनों का गृहकर जारी करता है। सर्वे में 2.81 संपत्तियां चिह्नित हुई थीं। इनमें कुल 60 हजार खाली प्लॉट और नए मकान शामिल हैं। जिनके पास नंबर नहीं हैं। इन पर नगर निगम का गृहकर बकाया भी है। ऐसे मकान मालिकों ने कई साल से गृहकर नहीं दिया है।
कई मकान तो 20 साल पुराने हैं। गृहकर वसूली का ग्राफ गिराने में नगर निगम जोन के अफसरों की लापरवाही है। सही ढंग से जांच की जाती तो राजस्व को नुकसान नहीं होता। जीआईएस सर्वे में अफसरों की कमियां उजागर हुईं।
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वर्तमान में नगर निगम 2.21 लाख भवनों का गृहकर जारी करता है। सर्वे में 2.81 संपत्तियां चिह्नित हुई थीं। इनमें कुल 60 हजार खाली प्लॉट और नए मकान शामिल हैं। जिनके पास नंबर नहीं हैं। इन पर नगर निगम का गृहकर बकाया भी है। ऐसे मकान मालिकों ने कई साल से गृहकर नहीं दिया है।
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कई मकान तो 20 साल पुराने हैं। गृहकर वसूली का ग्राफ गिराने में नगर निगम जोन के अफसरों की लापरवाही है। सही ढंग से जांच की जाती तो राजस्व को नुकसान नहीं होता। जीआईएस सर्वे में अफसरों की कमियां उजागर हुईं।
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गृहकर का किया जाएगा निर्धारण
नगर निगम ने योजना बनाई है कि जिनके पास मकान नंबर नहीं है, उन्हें निशुल्क मकान नंबर दिया जाएगा। नए भवनों का मकान नंबर जारी करने के साथ उसे निगम के अभिलेखों में दर्ज किया जाएगा। साथ ही गृहकर का निर्धारण किया जाएगा। मकान नंबर लेने के लिए भवन स्वामियों से क्षेत्रफल और रजिस्ट्री के आधार पर शुल्क लिया जाता है। इसके लिए 1200 से 5200 रुपये शुल्क निर्धारित है।
बोले अधिकारी
प्रभारी नगर आयुक्त दुष्यंत कुमार मौर्या ने कहा कि जीआईएस सर्वे में बगैर नंबर वाले मकान चिह्नित हुए थे, उन्हें नगर निगम की ओर से निशुल्क मकान नंबर दिया जा रहा है। जिन लोगों ने मकान नंबर नहीं लिया है वे जोनल कार्यालय से ले सकते हैं। नंबर लेने वालों का रिकॉर्ड नगर निगम में दर्ज होगा।
बोले अधिकारी
प्रभारी नगर आयुक्त दुष्यंत कुमार मौर्या ने कहा कि जीआईएस सर्वे में बगैर नंबर वाले मकान चिह्नित हुए थे, उन्हें नगर निगम की ओर से निशुल्क मकान नंबर दिया जा रहा है। जिन लोगों ने मकान नंबर नहीं लिया है वे जोनल कार्यालय से ले सकते हैं। नंबर लेने वालों का रिकॉर्ड नगर निगम में दर्ज होगा।