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राज्यमंत्री अनिल राजभर ने कहा, अब होमगार्ड जवानों को वर्दी के लिए मिलेगा धन
ब्यूरो,अमर उजाला,वाराणसी
Updated Sun, 08 Oct 2017 02:14 PM IST
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अमर उजाला कार्यालय में प्रदेश के राज्यमंत्री अनिल राजभर
- फोटो : अमर उजाला
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प्रदेश के सैनिक कल्याण, खाद्य प्रसंस्करण, होमगार्ड्स, पीआरडी, नागरिक सुरक्षा राज्यमंत्री (स्वतंत्र प्रभार) अनिल राजभर ने कहा कि प्रदेश के 1.18 लाख होमगार्ड्स और 32 हजार पीआरडी जवानों को वर्दी के लिए धन दिया जाएगा।
जवानों को वर्दी का कपड़ा खरीदने और सिलवाने के लिए धन इस महीने के अंत में या अगले महीने के शुरू में दे दिया जाएगा। चांदपुर स्थित अमर उजाला कार्यालय आए राज्यमंत्री ने बताया कि उनकी कोशिश है कि होमगार्ड और पीआरडी जवानों का मनोबल बढ़ाया जाए।
दोनों बल सुरक्षा बलों के सहयोगी संगठन हैं। बीते तीन साल से होमगार्ड जवानों को न तो वर्दी दी गई थी और न ही पैसा। अब इन्हें वर्दी पर खर्च होने वाले धन का भुगतान किया जाएगा। होमगार्ड जवानों का मनोबल बढ़ाने के लिए उन्हें इंसास राइफल से ट्रेनिंग दिलाई जा रही है। एक चरण खत्म हो गया है।
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दूसरे चरण के प्रशिक्षण के लिए और इंसास राइफल मंगाई जा रही है। जल्द ही ये राइफल जिलों में भेजी जाएंगी। राजभर ने बताया कि होमगार्ड्स की कार्यक्षमता को समाज और पुलिस बल के सामने जाहिर कराने के लिए पांच जिलों में एक पायलट प्रोजेक्ट लाने पर विचार किया जा रहा है।
इसके तहत एक दिन के लिए चुने गए पांच जिलों में यातायात व्यवस्था के संचालन का काम ट्रैफिक पुलिस के बजाय होमगार्ड और पीआरडी जवानों को दिया जाएगा। योजना है कि इस प्रयोग के नतीजों का प्रयोग कर इसे पूरे प्रदेश में लागू किया जाए, ताकि ज्यादा से ज्यादा होमगार्ड्स को ड्यूटी में लगाया जा सके।
होमगार्ड विभाग में कैडर का रिव्यू किया जा रहा है। रिव्यू पूरा होने पर कुछ और तब्दीलियां नजर आएंगी। मुख्यमंत्री को प्रस्ताव दिया गया है कि जिन निजी संस्थानों में सुरक्षा एजेंसियों के जवान काम कर रहे हैं, वहां होमगार्ड जवानों को तैनाती में प्राथमिकता देने के लिए सरकार के स्तर से निर्देश दिए जाएं।
जवानों को उत्तर प्रदेश से सटे नेपाल बॉर्डर पर तैनात करने की भी योजना है। इसके लिए गृह मंत्री राजनाथ सिंह से बातचीत की गई है। यह केंद्र सरकार का प्रोजेक्ट होगा और राज्य सरकार पर इससे वित्तीय भार नहीं आएगा।
हिमाचल प्रदेश, पंजाब और मध्य प्रदेश में जिस प्रकार से होमगार्ड्स की अलग लाइन है, उसी प्रकार प्रदेश में भी अलग से लाइन बनाई जाएगी।
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जवानों को वर्दी का कपड़ा खरीदने और सिलवाने के लिए धन इस महीने के अंत में या अगले महीने के शुरू में दे दिया जाएगा। चांदपुर स्थित अमर उजाला कार्यालय आए राज्यमंत्री ने बताया कि उनकी कोशिश है कि होमगार्ड और पीआरडी जवानों का मनोबल बढ़ाया जाए।
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दोनों बल सुरक्षा बलों के सहयोगी संगठन हैं। बीते तीन साल से होमगार्ड जवानों को न तो वर्दी दी गई थी और न ही पैसा। अब इन्हें वर्दी पर खर्च होने वाले धन का भुगतान किया जाएगा। होमगार्ड जवानों का मनोबल बढ़ाने के लिए उन्हें इंसास राइफल से ट्रेनिंग दिलाई जा रही है। एक चरण खत्म हो गया है।
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दूसरे चरण के प्रशिक्षण के लिए और इंसास राइफल मंगाई जा रही है। जल्द ही ये राइफल जिलों में भेजी जाएंगी। राजभर ने बताया कि होमगार्ड्स की कार्यक्षमता को समाज और पुलिस बल के सामने जाहिर कराने के लिए पांच जिलों में एक पायलट प्रोजेक्ट लाने पर विचार किया जा रहा है।
इसके तहत एक दिन के लिए चुने गए पांच जिलों में यातायात व्यवस्था के संचालन का काम ट्रैफिक पुलिस के बजाय होमगार्ड और पीआरडी जवानों को दिया जाएगा। योजना है कि इस प्रयोग के नतीजों का प्रयोग कर इसे पूरे प्रदेश में लागू किया जाए, ताकि ज्यादा से ज्यादा होमगार्ड्स को ड्यूटी में लगाया जा सके।
होमगार्ड विभाग में कैडर का रिव्यू किया जा रहा है। रिव्यू पूरा होने पर कुछ और तब्दीलियां नजर आएंगी। मुख्यमंत्री को प्रस्ताव दिया गया है कि जिन निजी संस्थानों में सुरक्षा एजेंसियों के जवान काम कर रहे हैं, वहां होमगार्ड जवानों को तैनाती में प्राथमिकता देने के लिए सरकार के स्तर से निर्देश दिए जाएं।
जवानों को उत्तर प्रदेश से सटे नेपाल बॉर्डर पर तैनात करने की भी योजना है। इसके लिए गृह मंत्री राजनाथ सिंह से बातचीत की गई है। यह केंद्र सरकार का प्रोजेक्ट होगा और राज्य सरकार पर इससे वित्तीय भार नहीं आएगा।
हिमाचल प्रदेश, पंजाब और मध्य प्रदेश में जिस प्रकार से होमगार्ड्स की अलग लाइन है, उसी प्रकार प्रदेश में भी अलग से लाइन बनाई जाएगी।