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धर्म खत्म तो समाप्त हो जाएगा हिंदू समाजः स्वामी अड़गड़ानंद महाराज
ब्यूरो,अमर उजाला,वाराणसी
Updated Mon, 30 Oct 2017 02:01 PM IST
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स्वामी अड़गड़ानंद महाराज
- फोटो : अमर उजाला
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यथार्थ गीता के प्रणेता स्वामी अड़गड़ानंद महाराज ने कहा कि धर्म कभी बदलता नहीं है। कहा जा रहा है हिंदू कोई धर्म नहीं बल्कि जीवनशैली है जबकि धर्म अपरिवर्तनशील है। जिसे खत्म किया गया तो हिंदू समाज समाप्त हो जाएगा। सनातन धर्म की शाश्वत व्याख्या करते हुए उन्होंने कहा कि आत्मा ही सनातन है और आत्मा की पूजा करने वाले सनातन धर्मी हैं।
रविवार को वाराणसी के महमूरगंज स्थित मोतीझील प्रांगण में आयोजित गीता सार मंथन पर अपने प्रवचन में स्वामी जी ने कहा कि काशी सबसे प्राचीन तीर्थ है। शिव की तपस्थली काशी मुक्ति को जन्म देती है। महात्मा को जो देना रहता है वह दे देते हैं। उसे पूरा करने का काम भगवान का होता है।
महापुरुषों की क्रीड़ास्थली ही तीर्थ बन जाती है। भगवान राम के चलते अयोध्या और भगवान कृष्ण के चलते मथुरा और वृंदावन तीर्थ हो गया। मुहम्मद साहब के चलते मक्का मदीना और गुरुनानक जी के चलते स्वर्ण मंदिर आस्था केंद्र बन गया।
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कहा कि गीता समझ में आ जाए तो जीवन धन्य समझिए। माया बुद्धि तक सीमित है। योगी का चित दीपक की लौ के समान होता है। भक्ति और साधना एक जन्म में पूरी नहीं होतीं। महान विभूतियों को भी कई जन्म लग गए।
कहा कि स्मृतियां धर्मशास्त्र नहीं हैं। साधना एक जागृति है। भजन ऐसी चीज है जो लिखने-बोलने से नहीं होती। वह तो एक जागृति है, जो मन से निकलती है। भक्तों से कहा कि सच्चे मन से परमात्मा का भजन करें। हर घर में गीता का पाठ हो।
गीता के अनुसार नियत कर्म करें और साधना पथ पर दृढ़ रहें। इस दौरान शक्तेषगढ़ आश्रम के वरिष्ठ संत महर्षि नारद महाराज के अलावा सोहम बाबा, बच्चा बाबा, बद्री बाबा, तानसेन बाबा, ब्रह्मानंद बाबा, गोविंद बाबा ने भी श्रद्धालुओं को संबोधित किया।
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रविवार को वाराणसी के महमूरगंज स्थित मोतीझील प्रांगण में आयोजित गीता सार मंथन पर अपने प्रवचन में स्वामी जी ने कहा कि काशी सबसे प्राचीन तीर्थ है। शिव की तपस्थली काशी मुक्ति को जन्म देती है। महात्मा को जो देना रहता है वह दे देते हैं। उसे पूरा करने का काम भगवान का होता है।
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महापुरुषों की क्रीड़ास्थली ही तीर्थ बन जाती है। भगवान राम के चलते अयोध्या और भगवान कृष्ण के चलते मथुरा और वृंदावन तीर्थ हो गया। मुहम्मद साहब के चलते मक्का मदीना और गुरुनानक जी के चलते स्वर्ण मंदिर आस्था केंद्र बन गया।
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कहा कि गीता समझ में आ जाए तो जीवन धन्य समझिए। माया बुद्धि तक सीमित है। योगी का चित दीपक की लौ के समान होता है। भक्ति और साधना एक जन्म में पूरी नहीं होतीं। महान विभूतियों को भी कई जन्म लग गए।
कहा कि स्मृतियां धर्मशास्त्र नहीं हैं। साधना एक जागृति है। भजन ऐसी चीज है जो लिखने-बोलने से नहीं होती। वह तो एक जागृति है, जो मन से निकलती है। भक्तों से कहा कि सच्चे मन से परमात्मा का भजन करें। हर घर में गीता का पाठ हो।
गीता के अनुसार नियत कर्म करें और साधना पथ पर दृढ़ रहें। इस दौरान शक्तेषगढ़ आश्रम के वरिष्ठ संत महर्षि नारद महाराज के अलावा सोहम बाबा, बच्चा बाबा, बद्री बाबा, तानसेन बाबा, ब्रह्मानंद बाबा, गोविंद बाबा ने भी श्रद्धालुओं को संबोधित किया।