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Gyanvapi Masjid Case: श्रृंगार गौरी-ज्ञानवापी मामले पर आज फिर सुनवाई, क्या है महिला वादी पक्ष की दलील?
Thu, 18 Aug 2022 10:18 AM IST
किरन रौतेला
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, वाराणसी
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, वाराणसी
Published by: किरन रौतेला
Updated Thu, 18 Aug 2022 10:18 AM IST
सार
वाराणसी के ज्ञानवापी श्रृंगार गौरी मामले (Gyanvapi shringar gauri case) में आज वाराणसी कोर्ट में सुनवाई होगी। इस मामले में पांचों वादी महिलाओं की तरफ से बहस पूरी कर ली गई थी। मामले में मुस्लिम पक्ष की ओर से दलीलें रखी जानी थीं।
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Gyanvapi Masjid Case
- फोटो : अमर उजाला
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विस्तार
ज्ञानवापी-श्रृंगार गौरी दर्शन मामले में दाखिल वाद की पोषणीयता पर जिला जज की अदालत में आज सुनवाई होनी है। सुप्रीम कोर्ट के आदेश पर इस मुद्दे पर हो रही सुनवाई में अंजुमन इंतजामिया मसाजिद की तरफ से जबाबी बहस की जानी है लेकिन इंतजामिया मसाजिद के मुख्य अधिवक्ता अभय यादव के निधन से सुनवाई प्रभावित हुई है।
हालांकि अंजुमन की तरफ से कुछ और अधिवक्ता इस मामले में वकालतनामा दाखिल कर जबाबी बहस करेंगे। अब तक सीपीसी ऑर्डर 7 रूल 11 के तहत यानि 5 राखी सिंह समेत महिला हिन्दू वादियों की तरफ से दाखिल श्रृंगार गौरी व अन्य देव विग्रहों का वाद सुनवाई योग्य है या नहीं इस मुद्दे पर पक्षकार बनाये गए अंजुमन इंतजामिया महिला वादियों और प्रदेश शासन की तरफ से बहस की जा चुकी है। अब जबाबी बहस अंजुमन की तरफ से होनी है।
क्या है दलील
महिला वादी पक्ष की दलील है कि यहां विशेष उपासना स्थल कानून 1991 लागू नहीं होता जबकि मुश्लिम पक्ष का कहना है कि यहां यह कानून लागू होता है जिसके मुताबिक आजादी के समय धर्मस्थलों की जो स्थिति है उसमें बदलाव नहीं होगा।
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हालांकि अंजुमन की तरफ से कुछ और अधिवक्ता इस मामले में वकालतनामा दाखिल कर जबाबी बहस करेंगे। अब तक सीपीसी ऑर्डर 7 रूल 11 के तहत यानि 5 राखी सिंह समेत महिला हिन्दू वादियों की तरफ से दाखिल श्रृंगार गौरी व अन्य देव विग्रहों का वाद सुनवाई योग्य है या नहीं इस मुद्दे पर पक्षकार बनाये गए अंजुमन इंतजामिया महिला वादियों और प्रदेश शासन की तरफ से बहस की जा चुकी है। अब जबाबी बहस अंजुमन की तरफ से होनी है।
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क्या है दलील
महिला वादी पक्ष की दलील है कि यहां विशेष उपासना स्थल कानून 1991 लागू नहीं होता जबकि मुश्लिम पक्ष का कहना है कि यहां यह कानून लागू होता है जिसके मुताबिक आजादी के समय धर्मस्थलों की जो स्थिति है उसमें बदलाव नहीं होगा।
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