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Harishayani Ekadashi 2022: आज से मांगलिक कार्यों पर लगा विराम, क्षीर सागर में शयन के लिए गए भगवान विष्णु
Sun, 10 Jul 2022 11:58 AM IST
उत्पल कांत
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, वाराणसी
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, वाराणसी
Published by: उत्पल कांत
Updated Sun, 10 Jul 2022 11:58 AM IST
सार
आज हरि शयनी एकादशी है। हिंदू पंचांग के अनुसार आषाढ़ शुक्ल एकादशी यानी हरि शयन एकादशी से देवोत्थान एकादशी तक मांगलिक कार्य नहीं होते हैं।
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आज से चातुर्मास व्रत भी आरंभ
- फोटो : फाइल
विस्तार
आषाढ़ मास शुक्ल पक्ष की एकादशी यानी आज से हरिशयनी पर्व पर भगवान विष्णु क्षीर सागर में शेषशैय्या पर योग निद्रा में लीन हो गए। । अब कार्तिक में हरिप्रबोधिनी एकादशी पर भगवान भक्तों के काज के लिए भगवान जागेंगे। इस दौरान धार्मिक अनुष्ठान तो सविधि होते रहेंगे, लेकिन मांगलिक कार्यों पर रोक लग जाएगी। संतों, संन्यासियों का चातुर्मास व्रत भी आरंभ हो गया।
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हरिशयनी एकादशी को गंगा तटों पर स्नान के लिए व्रतियों की भीड़ उमड़ी। श्रद्धालुओं ने गरीबों में अन्न, वस्त्र का दान, पुण्य किया। घरों में तुलसी की पूजा की गई। हिंदू पंचांग के अनुसार आषाढ़ शुक्ल एकादशी यानी हरि शयन एकादशी से देवोत्थान एकादशी तक मांगलिक कार्य नहीं होते हैं।
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अब चार नवंबर को कार्तिक शुक्ल देवोत्थान एकादशी के दिन से वैवाहिक आयोजन की शुरुआत होती है। काशी विश्वनाथ मंदिर न्यास परिषद के सदस्य पंडित दीपक मालवीय और ज्योतिषाचार्य पंडित दैवज्ञ कृष्ण शास्त्री ने बताया कि हरि शयन एकादशी से भगवान श्रीहरि विष्णु क्षीरसागर में शयन करने चले जाते हैं, इस वजह से किसी तरह के मांगलिक कार्य नहीं कराए जाते हैं।
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देवोत्थान एकादशी चार नवंबर को
चार नवंबर को कार्तिक शुक्ल देवोत्थान एकादशी को श्रीहरि विष्णु के नींद से जागने के बाद वैवाहिक कार्य शुरू होंगे। बताया कि पंचांग के अनुसार, 24 नवंबर से 16 दिसंबर तक मांगलिक कार्य होंगे। इस दौरान कुल 12 अलग-अलग तिथियों पर वैवाहिक मुहूर्त हैं। 16 दिसंबर के बाद फिर 14 जनवरी के बाद से ही वैवाहिक मुहूर्त फिर से शुरू होंगे।