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हरि प्रबोधन एकादशी आज: योगनिद्रा से जागे श्रीहरी, तुलसी और शालिग्राम विग्रह की पूजा करेंगे श्रद्धालु
Wed, 25 Nov 2020 04:53 PM IST
गीतार्जुन गौतम
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, वाराणसी
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, वाराणसी
Published by: गीतार्जुन गौतम
Updated Wed, 25 Nov 2020 04:53 PM IST
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फाइल फोटो।
- फोटो : ANI
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चार माह के बाद कार्तिक माह की एकादशी तिथि पर बुधवार को श्रीहरी भगवान विष्णु योगनिद्रा से जाग गए। इसके साथ ही चार माह से बंद चल रहे विवाह सहित सभी अन्य शुभ कार्य आरंभ हो जाएंगे।
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वहीं इस दिन श्रद्धालु मां तुलसी और श्रीभगवान के शालिग्राम विग्रह की पूजा-अर्चना करते हैं। इस दिन गन्ना खाने की भी पुरानी परंपरा रही है। इसके मद्देनजर बाजारों में लोगों ने गन्ने की खरीदारी की।
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स्नान ध्यान के बाद मंदिरों में दर्शन पूजन और दान पुण्य के इस पर्व पर लोगों की आस्था दोपहर में मंदिर के कपाट बंद होने तक चली। वहीं शाम को मंदिरों के कपाट खुलने के साथ ही तुलसी पूजन और एकादशी की परंपराओं का भी निर्वाह किया जाएगा।
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हिंदू धर्म की पौराणिक मान्यताओं के अनुसार हरिशयन एकादशी को श्रीहरी योगनिद्रा में लीन हो जाते हैं। इसके चार माह बाद कार्तिक माह की एकादशी तिथि पर भगवान श्रीविष्णु योगनिद्रा से जागते हैं। भगवान विष्णु के योगनिद्रा में जाते ही विवाह, गृहप्रवेश, अन्नप्राशन आदि शुभ कार्य वर्जित हो जाते हैं।
उनके योगनिद्रा से जागने के बाद सभी शुभ कार्य आरंभ हो जाते हैं। इसके अलावा इस एकादशी पर तुलसी-शालिग्राम विवाह की परंपरा है। वहीं इस दिन गन्ना खाना भी अति शुभ माना गया है। बाजारों में जगह-जगह गन्ना बेचने वालों की दुकानें लगी थीं जहां से लोग गन्ना खरीदकर ले जा रहे थे।