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Happy Daughters Day: बनारस की ये बेटियां, इन्हें जानकर आप गर्व करेंगे इन पर

Sun, 27 Sep 2020 05:13 PM IST
गीतार्जुन गौतम न्यूज डेस्क, अमर उजाला, वाराणसी
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, वाराणसी Published by: गीतार्जुन गौतम Updated Sun, 27 Sep 2020 05:13 PM IST
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Happy daughters day: banaras daughter know more about her
daughters day 2020

घर आंगन को रोशन करती हैं बेटियां... पिता का प्यार, मम्मी के चेहरे पर खुशी की फुहार है बेटियां...। अभिशाप नहीं, बल्कि परिवार के लिए वरदान हैं बेटियां। बड़ी होकर ये केवल दो परिवारों की जिम्मेदारी ही नहीं संभालती, बल्कि विविध क्षेत्रों जैसे राजनीति, खेल और विज्ञान के क्षेत्र में भी अपना महत्वपूर्ण योगदान देकर कुटुंब का नाम रोशन करती हैं। डॉटर्स डे के अवसर पर कुछ ऐसी ही होनहार बेटियों की कहानियां हम आपके लिए लाए हैं। 

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बेटी ने दी पिता को मुखाग्नि
रामकटोरा निवासी माधुरी श्रीवास्तव की दो बेटियां डॉ. शिप्रा व डॉ. श्वेता श्रीवास्तव डॉक्टर बनकर समाज की सेवा कर रहीं है। माधुरी के पति शिवप्रसाद गुप्त मंडलीय अस्पताल में फिजियोथैरेपिस्ट हैं। साल 2008 में एक दिन उनकी तबीयत ज्यादा खराब हुई तो बेटी शिप्रा उन्हें लेकर रात में अस्पताल गई पर वह बच नहीं सके। जिसके बाद शिप्रा ने फैसला किया कि पिता का अंतिम संस्कार खुद करेंगी।
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वह दिन था जब बेटी को पिता के अंतिम संस्कार के लिए नातेदारों व समाज से लड़ना पड़ा। एक तरफ पिता का शव रखा था और दूसरी तरफ रिश्तेदार ऐसा करने से रोक रहे थे कि यह शास्त्रों के खिलाफ है। उस समय शिप्रा की शादी तय हो चुकी थी और ससुराल के लोगों ने कहा कि हमारे घर की बहू बनने वाली हो मुखाग्नि देकर ऐसा अनर्थ नहीं करोगी। लेकिन बेटी ने पिता के फर्ज को पहले निभाने का फैसला लिया। आज माधुरी की दोनों बेटियां अपने पैरों पर खड़ी हैं और साथ ही अपने मां का ख्याल भी रखती हैं।

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पढ़ाई में नंबर वन है दोनों बेटियां
कैवल्यधाम निवासी डॉ. रीता भट्ट व प्रो. राजीव कुमार भट्ट की दो बेटियां हैं और दोनों पढ़ाई में जिले में टॉप कर चुकी हैं। प्रो. राजीव बीएचयू अर्थशास्त्र विभाग में सीनियर प्रोफेसर हैं, वो कहते है बेटियां हमारे घर की रौनक है। डॉ. राजीव की बड़ी बेटी श्रुति भट्ट इस वक्त आगरा मेडिकल कॉलेज में इंटर्नशिप करने के साथ कोरोना मरीजों की सेवा में कार्यरत हैं। श्रुति ने 2014 की आईएससी इंटर की परीक्षा में जिले में टॉप किया था। श्रुति का सपना भविष्य में सफल चिकित्सक के रूप में समाज की सेवा करना है।

डॉ. रीता की छोटी बेटी अनुश्री ने 2020 के आईसीएसई बोर्ड दसवीं की परीक्षा में 97. 6 प्रतिशत अंकों से सेंट जॉन्स स्कूल में टॉप करने के साथ जिले में भी अपना स्थान बनाया है। अनुश्री हमेशा इंटर स्कूल डिबेट प्रतियोगिता में भाग लेती रहती हैं। 2019 में अनुश्री ने इंटरडिबेट प्रतियोगिता में जिले में प्रथम स्थान हासिल कर प्रदेश में जोन को रिप्रेजेंट कर चुकी है। अनुश्री का सपना आईएएस अधिकारी बनने का है।

चोरी से सीखा कराटे आज देश की कर रही सेवा
लहरतारा निवासी अनीता प्रजापति आज उतराखंड के आईटीबीपी टीम में बतौर कैडेट शामिल हो चुकी हैं। लेकिन उनका यहां तक पहुँचना काफी संघर्षों भरा था। अनीता के पिता चंद्रिका प्रसाद व माता गिरिजा देवी कुल्हड़ बनाने का काम करते हैं। अनिता बताती है कई बार ऐसा लगा कि मेरी पढ़ाई छूट जाएगी लेकिन मैंने हिम्मत नहीं हारी। अनीता ने कक्षा आठ से ही मानव एकेडमी में कराटे सीखना शुरू कर दिया था। घरवाले इसके पक्ष में नहीं थे। अनीता ने चोरी चोरी पूरी लगन से ब्लैक बेल्ट हासिल किया और नेशनल में पदक नहीं जीता। जैसे ऑल इंडिया वूमेन कराटे चैंपियनशिप 2010, अंतर्राष्ट्रीय वाडोकाई कराटे चैंपियनशिप 2011, एसकेएसआई नेशनल कराटे चैंपियनशिप 2015, 26, 27, 28 एआईकेएफ नेशनल कराटे चैंपियनशिप के साथ कई अंतरराष्ट्रीय और राष्ट्रीय प्रतियोगिताओं में गोल्ड मेडल जीत चुकी है। 

पिता के जाने के बाद नहीं छोड़ा मां का साथ -  
चेतगंज निवासी मीनू उपाध्याय अपनी मां की इकलौती संतान है। उनकी मां विद्या देवी बताती हैं कि बेटी मीनू बेटों से बढ़कर है। मीनू के सिर से पिता का साया बचपन में ही उठ गया था, उस वक्त भी मीनू ने मुझे संभाला और वो मेरी ताकत बनी। अपनी मेहनत और लगन से उनसे अपनी पढ़ाई पूरी की।  कभी- कभी ऐसा होता कि मेरी तबीयत खराब होती तो वह मेरे सिरहाने बैठकर पूरी रात गुजार देती थी। शादी के बाद भी ससुराल की जिम्मेदारियां संभालते हुए उसने कभी मेरा साथ नहीं छोड़ा। दोनों परिवारों की जिम्मेदारियां संभालते हुए आज भी वो मेरे लिए अपने ससुराल को छोड़कर मेरे साथ रह रही है।

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