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ज्ञानवापी-श्रृंगार गौरी मामला सुनवाई योग्य है या नहीं: आज भी होगी बहस, साक्ष्य और दस्तावेज कोर्ट में दाखिल

Tue, 23 Aug 2022 12:58 PM IST
किरन रौतेला न्यूज डेस्क, अमर उजाला, वाराणसी
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, वाराणसी Published by: किरन रौतेला Updated Tue, 23 Aug 2022 12:58 PM IST
सार

एडवोकेट शमीम अहमद ने वक्फ एक्ट के प्रावधानों को दर्शाते हुए दावे के तीन-चार बिंदुओं को पढ़ा। जिसमें कहा गया कि ज्ञानवापी मस्जिद से संबंधित इस वाद की सुनवाई का अधिकार सिविल कोर्ट को नहीं है, बल्कि वक्फ बोर्ड लखनऊ को है। 

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Gyanvapi Maa Shringar Gauri case evidence and documents will be filed in the court even today
ज्ञानवापी मामले में बहस - फोटो : अमर उजाला

विस्तार

ज्ञानवापी-श्रृंगार गौरी वाद सुनवाई योग्य है या नहीं, इस पर जिला जज डॉ. अजय कृष्ण विश्वेश की कोर्ट में सोमवार को बहस हुई। अंजुमन इंतजामिया मसाजिद कमेटी की ओर से जवाबी बहस में ज्ञानवापी को वक्फ बोर्ड की संपत्ति होने के दावे के समर्थन में कानूनी साक्ष्य व दस्तावेज कोर्ट में दाखिल किए गए। कोर्ट में वादी और प्रतिवादी पक्ष की सहमति से 23 अगस्त को भी अंजुमन की जवाबी बहस जारी रहेगी।
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एडवोकेट शमीम अहमद ने बताया कि अदालत में वक्फ एक्ट के प्रावधानों को दर्शाते हुए दावे के तीन-चार बिंदुओं को पढ़ा गया। 1291 फसली वर्ष में दर्ज इंद्राज, अन्य सबूत व साक्ष्य दाखिल किए गए। वादी महिलाओं ने वाद के समर्थन में साक्ष्य नहीं दाखिल किया था, उससे संबंधित साक्ष्य व सबूत दाखिल किए गए। कहा गया कि ज्ञानवापी मस्जिद वक्फ की संपत्ति है। यह वक्फ संपत्ति के तौर पर दर्ज भी है।
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इसलिए ज्ञानवापी मस्जिद से संबंधित इस वाद की सुनवाई का अधिकार सिविल कोर्ट को नहीं है, बल्कि वक्फ बोर्ड लखनऊ को है, ऐसे में यह मामला सुनवाई योग्य नहीं है। अंजुमन की तरफ से बहस अभी जारी रहेगी। इसके बाद वादी महिलाओं के एडवोकेट की तरफ से जवाबी बहस का प्रति उत्तर कोर्ट की अनुमति से की जा सकेगी। अंजुमन की तरफ से नियुक्त अधिवक्ता योगेंद्र सिंह, मधू बाबू कोर्ट में नहीं पहुंचे, जबकि रईस अहमद, मुमताज अहमद, मिराजुद्दीन सिद्दकी व एजाज अहमद मौजूद रहे। वही महिला वादियों की तरफ से सुप्रीमकोर्ट के वरिष्ठ अधिवक्ता हरिशंकर जैन, विष्णु जैन, सुभाष नंदन चतुर्वेदी, मानबहादुर सिंह, जिला शासकीय अधिवक्ता महेंद्र प्रसाद पांडेय समेत वादिनीगण व पैरोकार कोर्ट में मौजूद रहे।
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