Varanasi News: वाराणसी में एलएंडटी बनाएगा शिप रिपेयर फैसिलिटी सेंटर, जल्द शुरू होगा निर्माण; जानें खास
Varanasi News: वाराणसी में एलएंडटी जल्द ही शिप रिपेयर फैसिलिटी सेंटर का निर्माण शुरू करेगा। करीब 321.39 करोड़ रुपये की लागत से बनने वाले इस केंद्र में छोटे और बड़े जहाजों की मरम्मत की सुविधा उपलब्ध होगी। वर्तमान में राल्हूपुर में अस्थायी सेंटर संचालित है। स्थायी केंद्र बनने से जल परिवहन और जहाज रखरखाव को नई मजबूती मिलेगी।
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Varanasi News: रामनगर में भारतीय अंतरदेशीय जलमार्ग प्राधिकरण (आईडब्ल्यूएआई) की ओर से शिप रिपेयर फैसिलिटी सेंटर का निर्माण जल्द शुरू कराया जाएगा। निर्माण की जिम्मेदारी लार्सन एंड टुब्रो (एलएंडटी) को दी गई है। मंगलवार देर शाम एलएंडटी ने अपने आधिकारिक एक्स हैंडल पर यह जानकारी साझा की। शिप रिपेयर फैसिलिटी सेंटर के निर्माण में करीब 321.39 करोड़ रुपये खर्च होंगे। अभी अस्थायी तौर पर राल्हूपुर में इस केंद्र का संचालन किया जा रहा है।
रामनगर में बनने वाले शिप रिपेयर फैसिलिटी सेंटर का शिलान्यास प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने जामनगर से किया था। आईडब्ल्यूएआई के अधिकारियों के अनुसार वाराणसी में शिप रिपेयर फैसिलिटी सेंटर का निर्माण रामनगर बंदरगाह के पास कराया जाएगा। यह सेंटर पीएम गति शक्ति और जलमार्ग विकास जैसी नीतियों को गति देगा। अभी तक जहाजों और बड़े जलयानों की मरम्मत समुद्र किनारे ही होती थी, लेकिन अब गंगा किनारे ही ड्राई-डॉक तैयार होगा।
इससे न सिर्फ समय और धन की बचत होगी, बल्कि स्थानीय स्तर पर रोजगार भी बढ़ेगा। आईडब्ल्यूएआई अधिकारियों के मुताबिक, एक जलयान की मरम्मत में रोजाना 30 से 40 लोगों की जरूरत पड़ती है। रामनगर बंदरगाह पर एक साथ चार जलयानों की मरम्मत संभव होगी। अधिकारियों के अनुसार इसके निर्माण में करीब 321.39 करोड़ रुपये खर्च होंगे। इसके लिए एलएंडटी को टेंडर दिया गया है।
ड्राई-डॉक पर होगी जहाजों की मरम्मत
ड्राई-डॉक पानी के किनारे बना आयताकार बेसिन होता है। जलयान को इसमें खड़ा करने के बाद पंप से पानी निकाल दिया जाता है। सूखी सतह पर जहाज की मरम्मत की जाती है। काम पूरा होने के बाद इसमें दोबारा पानी भरकर जहाज को मुख्य धारा में उतार दिया जाता है।
जल परिवहन को बढ़ावा देने के लिए रामनगर मल्टीमॉडल टर्मिनल पर ड्राई-डॉक का निर्माण कराया जा रहा है। इसके निर्माण की जिम्मेदारी एलएंडटी को दी गई है। जल्द ही निर्माण शुरू होगा। इससे गंगा में जलमार्ग यातायात और तेज होगा। - संजीव कुमार, निदेशक, आईडब्ल्यूएआई वाराणसी