GST 2.0: दो-तिहाई बनारसियों ने लग्जरी-इंपोर्टेड सामान के खर्च में की कमी, लोकल उत्पादों को दी प्राथमिकता
जीएसटी 2.0 का असर बनारस के लोगों पर भी पड़ा है। बीएचयू में इसको लेकर एक अध्ययन किया गया है। लोग सुखदायक और महंगे सामान नहीं खरीद रहे हैं। कुछ लोगों ने खरीदारी में कमी भी की है।
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
विस्तार
बीएचयू के एक अध्ययन में पता चला है कि जीएसटी 2.0 लागू होने के बाद बनारस की दो-तिहाई आबादी ने लग्जरी और इंपोर्टेड सामान पर किए जाने वाले खर्च में कमी कर दी है। 72 फीसदी ने लोकल उत्पादों को ज्यादा प्राथमिकता दी है। 57.4 फीसदी लोगों ने विलासिता वाले उत्पादों पर टैक्स के बढ़े हुए दर का समर्थन किया।
85 फीसदी ने उन व्यवसायों पर कड़ी कार्रवाई की मांग की जिनसे उपभोक्ताओं को कोई लाभ नहीं मिल रहा है। 85.8 फीसदी लोगों ने माना है कि यदि जीएसटी 2.0 को पारदर्शी और प्रभावी ढंग से लागू किए जाने पर यह उपभोक्ताओं को बड़े फायदे दे सकती है।
बीएचयू के वाणिज्य संकाय के असिस्टेंट प्रोफेसर डॉ. लाल बाबू जायसवाल की टीम ने उपभोक्ता मूल्य संवेदनशीलता नाम से ये अध्ययन किया है। टीम की सदस्य के तौर पर महिमा, मुस्कान और अनीशा ने बनारस के बाजारों में 206 जीएसटी करदाताओं से मिलकर फील्ड सर्वे किया है।
बढ़ी है ऑनलाइन खरीदारी
इसमें 48 फीसदी करदाताओं की उम्र 21-30 वर्ष के बीच रही। इसमें 60.8 फीसदी महिला और 39.2 फीसदी पुरुष हैं। 41.2 प्रतिशत स्नातक और 27 प्रतिशत स्नातकोत्तर थे। इससे पता चलता है कि ज्यादातर लोग अच्छी तरह से शिक्षित थे। इनमें से 30.4 फीसदी परिवारों ने प्रति माह एक लाख रुपये से ज्यादा कमाया। 79.4 फीसदी लोगों को ही जीएसटी 2.0 सुधारों के बारे में जानकारी थी। इस दौरान 60.8 फीसदी लोगों स्वीकार किया कि ऑनलाइन खरीदारी बढ़ी है।
कटौती के बावजूद दुकानदार नहीं कम करते कीमतें
86.8 फीसदी लोगों ने बताया कि चालानों पर जीएसटी विवरण स्पष्ट रूप से नहीं दिखते हैं। 84.3 फीसदी को अपने बिलों को समझने में कठिनाई हुई। 61 फीसदी से ज्यादा लोगों ने कहा कि जीएसटी-2.0 के बावजूद खुदरा विक्रेताओं की ओर से ज्यादा शुल्क वसूलना जारी है। कुछ करदाताओं ने यह भी बताया कि जीएसटी दरों में कटौती होने के बावजूद भी खुदरा विक्रेता कीमतें कम नहीं करते।
मूल्य निर्धारण पारदर्शिता पर अविश्वास
डॉ. लाल बाबू जायसवाल ने कहा कि वाराणसी के उपभोक्ता जीएसटी-2.0 के बारे में जागरूक हैं। वे इसके संभावित लाभों को समझते हैं, लेकिन कार्यान्वयन, मूल्य निर्धारण पारदर्शिता और निष्पक्षता को लेकर उनमें अविश्वास बना हुआ है। सस्ते और घरेलू सामानों के प्रति व्यवहार में बदलाव, विशेष रूप से युवा और मध्यम आय वर्ग के उपभोक्ताओं में उच्च मूल्य संवेदनशीलता का संकेत देता है।