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सारनाथ में 83 साल बाद भित्तिचित्रों का संरक्षण शुरू, टोकियो आर्ट कालेज के विशेषज्ञ कार्य में जुटे
Fri, 29 Nov 2019 12:43 PM IST
स्वाधीन तिवारी
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, वाराणसी
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, वाराणसी
Published by: स्वाधीन तिवारी
Updated Fri, 29 Nov 2019 12:43 PM IST
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sarnath
- फोटो : अमर उजाला
सारनाथ के मूलगंध कुटी विहार के बौद्ध मंदिर की दीवारों पर भगवान बुद्ध की जन्म से लेकर महापरिनिर्वाण तक के भित्तिचित्रों के संरक्षण का कार्य जापानी पद्धति से बृहस्पतिवार से शुरू हो गया। भित्तिचित्र के संरक्षण का कार्य टोकियो आर्ट ऑफ कालेज के छह विशेषज्ञ कर रहे हैं। जापान द्वारा संरक्षण का कार्य भित्तिचित्र बनने के 83 वर्ष बाद किया जा रहा है।
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टोकियो आर्ट कालेज के हेड ओनोमुरा हयातो के नेतृत्व में पांच विशेषज्ञ संरक्षण का कार्य तीन सप्ताह तक करेंगे। खर्च का वहन जापानी कंपनी के डायरेक्टर नाकामुरा योशीहीरो कर रहे हैं। महाबोधि सोसायटी ऑफ इंडिया के महासचिव भिक्षु पी शिवली थेरो ने कहा कि पहले चरण में पूर्व दिशा में मंदिर की दीवार का संरक्षण किया जाएगा। इसके बाद पश्चिमी व दक्षिणी दीवार पर बने भित्तिचित्र का संरक्षण किया जाएगा।
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संरक्षण शुरू होने से पूर्व हुई विशेष पूजा
भित्तिचित्र के संरक्षण के पूर्व जापानी परंपरानुसार सफ लता एवं विश्व शांति के लिए विशेष पूजा हुई। पूजा का नेतृत्व जापान के बौद्ध धर्मगुरु मिनामिसवा डोनिन ने किया। यह पूजा लगभग 45 मिनट तक चली। इस दौरान महाबोधि सोसायटी ऑफ इंडिया के संयुक्त सचिव भिक्षु के मेधांकर थेरो सहित अन्य बौद्ध भिक्षु उपस्थित थे।
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