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पुष्यतिथि पर विशेष: काशी विद्यापीठ को विश्वविद्यालय बनाने की गोविंद बल्लभ पंत ने की थी वकालत

Sun, 07 Mar 2021 11:27 AM IST
गीतार्जुन गौतम न्यूज डेस्क, अमर उजाला, वाराणसी
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, वाराणसी Published by: गीतार्जुन गौतम Updated Sun, 07 Mar 2021 11:27 AM IST
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Govind Ballabh Pant Punyathithi: advocated making Kashi Vidyapeeth a university in varanasi
गोविंद बल्लभ पंत - फोटो : अमर उजाला

सूबे के प्रथम मुख्यमंत्री भारतरत्न गोविंद बल्लभ पंत ने काशी विद्यापीठ को विश्वविद्यालय बनाने की मुहिम का समर्थन किया था। उन्होंने सबसे पहले विद्यापीठ को विश्वविद्यालय का दर्जा दिए जाने की वकालत की थी। विश्वविद्यालय परिसर में प्रशासनिक भवन उनके नाम पर ही स्थापित है। सात मार्च को उनकी पुण्यतिथि है।

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काशी विद्यापीठ के प्रो. रवि प्रकाश पांडेय ने बताया कि गोविंद बल्लभ पंत काशी दौरे पर कई बार आए थे। काशी प्रवास के दौरान उन्होंने काशी विद्यापीठ की भी यात्रा की थी। देश आजाद होने के बाद 1955 में काशी विद्यापीठ को विश्वविद्यालय बनाने की चर्चाएं व मुहिम शुरू हो गई तो गोविंद बल्लभ पंत ने भी इस मुहिम की पुरजोर वकालत की थी।
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वे पं. मदन मोहन मालवीय के पक्के शिष्य थे। 1946 से दिसंबर 1954 तक प्रदेश के मुख्यमंत्री रहे। 1982 में कुलपति प्रो. दूधनाथ चतुर्वेदी ने 1982 ने विश्वविद्यालय में गोविंद वल्लभ पंत के नाम पर प्रशासनिक भवन की स्थापना के लिए शासन को प्रस्ताव भेजा था। उस समय सीएम नारायण दत्त तिवारी थे। उन्होंने प्रस्ताव को स्वीकार कर लिया और फंड भी जारी हो गया।

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सात साल तक रहे जेल में
पंत जी 1921, 1930, 1932 और 1934 के स्वतंत्रता संग्रामों में लगभग सात वर्ष जेलों में रहे। साइमन कमीशन के आगमन के खिलाफ 29 नवंबर 1927 में लखनऊ में जुलूस व प्रदर्शन करने के दौरान अंग्रेजों के लाठीचार्ज में उनको चोटें आईं, जिससे उनकी गर्दन झुक गई थी।

हिंदी को दिलाया राजकीय भाषा का दर्जा
1955 में केंद्र सरकार में गृह मंत्री बने। इस दौरान इनकी उपलब्धि रही भाषाई आधार पर राज्यों का पुनर्गठन। अगर पंत को सबसे अधिक किसी चीज के लिए जाना जाता है तो हिंदी को राजकीय भाषा का दर्जा दिलाने के लिए ही जाना जाता है। 1957 में इनको भारत रत्न मिला।

सात मार्च को हुआ था निधन
गोविंद बल्लभ पंत का जन्म 10 सितंबर 1887 को अल्मोड़ा में हुआ था। सात मार्च 1961 को उनका निधन हुआ था।

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