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बनारस में बोले राज्यपाल, संस्कृत में अद्भुत ताकत, इसे पहचानें
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, वाराणसी
Updated Sat, 21 Apr 2018 10:26 PM IST
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संस्कृत प्रतिष्ठा सम्मान समारोह का दीप जलाकर उदघाटन करते राज्यपाल
- फोटो : अमर उजाला
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विश्व संस्कृत प्रतिष्ठानम् की ओर से शनिवार को राज्यपाल राम नाईक को संस्कृत प्रतिष्ठा सम्मान से नवाजा गया। बनारस के राजघराने की ओर से सनबीम स्कूल वरुणा में हुए समारोह में मुख्य अतिथि राम नाईक ने कहा कि संस्कृत भाषा में अद्भुत ताकत है। हमें इसकी ताकत को पहचानना होगा।
इस मौके पर राज्यपाल ने पद्मश्री पंडित वागीश शास्त्री और सनबीम शिक्षण समूह के अध्यक्ष दीपक मधोक को संस्कृति सेवा सम्मान प्रदान किया। राज्यपाल ने कहा कि हम जो कहना चाहते हैं कि उसे महज दो से तीन शब्दों में पूरी ताकत से संस्कृत भाषा में कह सकते हैं।
सत्यमेव जयते, धर्म चक्र प्रवर्तनाय का उदाहरण दिया और कहा कि संस्कृत की विशिष्टता इसके शब्दों के उच्चारण और अर्थों में है। शरीर के साथ मन और बुद्धि को अगर मजबूत और एकाग्र करना है तो हमें गीता का ज्ञान हासिल करना जरूरी है।
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विश्व संस्कृत प्रतिष्ठानम् की परिकल्पना करने वाले डॉ. कर्ण सिंह का जिक्र करते हुए राज्यपाल ने कहा कि डॉ. सिंह ने संस्कृत को केवल हिंदुस्तान में ही नहीं, विश्व में प्रतिष्ठा दिलाई।
पद्मश्री पंडित वागीश शास्त्री ने कहा कि संस्कृत पढ़ने वालों की कमी होती जा रही है। संस्कृत को वर्तमान से जोड़ने की जरूरत है। कहा कि 180 घंटे में कोई भी संस्कृत सीख सकता है। इस अवसर पर कई संस्थाओं की ओर से राज्यपाल को सम्मानित किया गया।
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इस मौके पर राज्यपाल ने पद्मश्री पंडित वागीश शास्त्री और सनबीम शिक्षण समूह के अध्यक्ष दीपक मधोक को संस्कृति सेवा सम्मान प्रदान किया। राज्यपाल ने कहा कि हम जो कहना चाहते हैं कि उसे महज दो से तीन शब्दों में पूरी ताकत से संस्कृत भाषा में कह सकते हैं।
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सत्यमेव जयते, धर्म चक्र प्रवर्तनाय का उदाहरण दिया और कहा कि संस्कृत की विशिष्टता इसके शब्दों के उच्चारण और अर्थों में है। शरीर के साथ मन और बुद्धि को अगर मजबूत और एकाग्र करना है तो हमें गीता का ज्ञान हासिल करना जरूरी है।
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विश्व संस्कृत प्रतिष्ठानम् की परिकल्पना करने वाले डॉ. कर्ण सिंह का जिक्र करते हुए राज्यपाल ने कहा कि डॉ. सिंह ने संस्कृत को केवल हिंदुस्तान में ही नहीं, विश्व में प्रतिष्ठा दिलाई।
पद्मश्री पंडित वागीश शास्त्री ने कहा कि संस्कृत पढ़ने वालों की कमी होती जा रही है। संस्कृत को वर्तमान से जोड़ने की जरूरत है। कहा कि 180 घंटे में कोई भी संस्कृत सीख सकता है। इस अवसर पर कई संस्थाओं की ओर से राज्यपाल को सम्मानित किया गया।
प्रोटोकॉल तोड़कर ले रहा हूं सम्मान
राज्यपाल राम नाईक
- फोटो : अमर उजाला
विश्व संस्कृत प्रतिष्ठानम् की ओर से मिले संस्कृत प्रतिष्ठा सम्मान पर राज्यपाल ने कहा कि ‘ये सम्मान मैं प्रोटोकॉल तोड़कर ले रहा हूं। राज्यपाल का दूसरे किसी से पुरस्कार प्राप्त करना उचित नहीं होता लेकिन जब ये सम्मान विश्व संस्कृत प्रतिष्ठानम् संस्कृत के लिए दे रहा है तो प्रोटोकॉल होते हुए अपवाद के रूप में इसे मैं स्वीकार कर रहा हूं।’
प्रदेश सरकार की सराहना करते हुए राज्यपाल राम नाईक ने कहा कि प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ संस्कृत के प्रचार-प्रसार के लिए प्रयास कर रहे हैं।
हाल ही में 600 युवक-युवतियों को प्रशिक्षित किया गया, जो गांव-गांव जाकर संस्कृत का महत्व बताएंगे, संस्कृत पढ़ाएंगे। सरकार कई कार्यक्रम बना रही है जिससे कि संस्कृत को आगे ले जाया जा सके।