{"_id":"661e347fb45ec477e2040a28","slug":"girls-danced-in-manikarnika-ghat-tradition-is-three-and-a-half-hundred-years-old-2024-04-16","type":"feature-story","status":"publish","title_hn":"Varanasi News: जलती चिताओं के साथ महाश्मशान में टूटते रहे पांव के घुंघरू, साढ़े तीन सौ साल पुरानी है परंपरा","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
Varanasi News: जलती चिताओं के साथ महाश्मशान में टूटते रहे पांव के घुंघरू, साढ़े तीन सौ साल पुरानी है परंपरा
Tue, 16 Apr 2024 01:54 PM IST
अमन विश्वकर्मा
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, वाराणसी
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, वाराणसी
Published by: अमन विश्वकर्मा
Updated Tue, 16 Apr 2024 01:54 PM IST
सार
Varanasi News: चैत्र नवरात्र की सप्तमी को महाश्मशान महोत्सव के अवसर पर नगरवधुओं का नृत्य देखने के लिए भीड़ इकट्ठा होती है। वर्षों पुरानी इस परंपरा का आज भी निर्वहन होता आ रहा है।
विज्ञापन
बाबा का भव्य श्रृंगार और नृत्य करतीं नगर वधुएं।
- फोटो : अमर उजाला
विस्तार
वाराणसी के आदितीर्थ मणिकर्णिका पर जलती चिताओं के सामने नगरवधुओं के पांव के घुंघरू रात भर टूटते रहे। बाबा मसाननाथ से मुक्ति की कामना के लिए रात भर नाचती, गुहार लगाती नगरवधुओं का नृत्य शवयात्रियों में कौतूहल पैदा कर रहा था। काशी की पुरानी परंपरा की लौ रात भर धधकती रही।
विज्ञापन
चैत्र नवरात्र की सप्तमी पर महाश्मशान महोत्सव की अंतिम निशा में बाबा काे पंचमकार का भोग लगाकर तंत्रोक्त विधान से भव्य आरती हुई। बाबा का प्रांगण रजनीगंधा, गुलाब व अन्य सुगंधित फूलों से सजाया गया था। एक तरफ चिताएं धधक रही थीं, तो दूसरी ओर डोमराज की मढ़ी के नीचे नगर वधुएं महाश्मशानेश्वर को रिझाने के लिए घुंघरुओं की झंकार बिखेरने की तैयारी कर रही थीं।
विज्ञापन
बाबा मसाननाथ से मुक्ति की कामना के बाद नगरवधुओं ने बाबा के भजन दुर्गा दुर्गति नाशिनी, दिमिग दिमिग डमरू कर बाजे, डिम डिम तन दिन दिन... से शुरुआत की। ओम नमः शिवाय, मणिकर्णिका स्तोत्र, खेलें मसाने में होरी के बाद ठुमरी व चैती गाकर बाबा के श्री चरणों में अपनी गीतांजलि अर्पित की।
विज्ञापन
गायक जय पांडेय ने बम लहरी बमबम लहरी... से भक्तों को झूमने पर विवश कर दिया। स्वागत अध्यक्ष चैनू प्रसाद गुप्ता व व्यवस्थापक गुलशन कपूर ने किया। इस दौरान बिहारी लाल गुप्ता, विजय शंकर पांडेय, संजय गुप्ता, दीपक तिवारी, अजय गुप्ता आदि रहे।
Trending Videos
राजा मानसिंह ने शुरू कराई थी परंपरा
मान्यता है कि अकबर के नवरत्नों में से एक राजा मानसिंह ने प्राचीन नगरी काशी में भगवान शिव के मंदिर का जीर्णोद्धार कराया था। इस मौके पर राजा मानसिंह एक सांस्कृतिक कार्यक्रम का आयोजन कराना चाह रहे थे, लेकिन कोई भी कलाकार इस श्मशान में आने और अपनी कला के प्रदर्शन के लिए तैयार नहीं हुआ।
इसकी जानकारी काशी की नगरवधुओं को हुई तो वे स्वयं ही श्मशान घाट पर होने वाले इस उत्सव में नृत्य करने को तैयार हो गईं। इस दिन से धीरे-धीरे यह उत्सवधर्मी काशी की ही एक परंपरा का हिस्सा बन गई। तब से आज तक चैत्र नवरात्रि की सातवीं निशा में हर साल यहां श्मशानघाट पर सांस्कृतिक कार्यक्रमों का आयोजन किया जाता है।
इसकी जानकारी काशी की नगरवधुओं को हुई तो वे स्वयं ही श्मशान घाट पर होने वाले इस उत्सव में नृत्य करने को तैयार हो गईं। इस दिन से धीरे-धीरे यह उत्सवधर्मी काशी की ही एक परंपरा का हिस्सा बन गई। तब से आज तक चैत्र नवरात्रि की सातवीं निशा में हर साल यहां श्मशानघाट पर सांस्कृतिक कार्यक्रमों का आयोजन किया जाता है।