Ghosi Bypolls: उपचुनाव के परिणाम दे जाएंगे इन पांच सवालों के सटीक जवाब, जानें I.N.D.I.A. और NDA पर इसका प्रभाव
घोसी में बीजेपी के प्रत्याशी दारा सिंह चौहान हैं जो पिछली बार सपा के टिकट पर विधानसभा पहुंचे थे। उनके मुकाबले में समाजवादी पार्टी से सुधाकर सिंह चुनावी मैदान में उतारा है। ऐसे में अब यह देखना दिलचस्प रहेगा कि सपा अपनी इस सीट को बचा पाने में कामयाब रहती है की नहीं।
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घोसी विधानसभा उपचुनाव दिलचस्प होने वाला है। इस एक चुनाव से यूपी की 80 लोकसभा सीटों का मूड का भी मोटा-मोटा अंदाजा लगाना आसान हो जाएगा। यह ऐसा चुनाव साबित होने वाला है जो आने वाले 2024 लोकसभा चुनाव से पहले कई सवालों के जवाब देकर जाएगा। यहां सीधा मुकाबला भाजपा और समाजवादी पार्टी के बीच है। साथ ही इंडिया गठबंधन और एनडीए गठबंधन के बीच भी है। इस चुनाव को लेकर दोनों गठबंधन कितने गंभीर हैं इसका अंदाजा इससे भी लगाया जा सकता है कि न केवल दोनों दल के प्रमुख प्रचार में जुटे हैं बल्कि इनके साथ गठबंधन में शामिल दल भी पुरजोर ताकत झोंक रही है। इस बीच ये चुनाव कम से कम आठ सितंबर को इन पांच सवाल के जवाब तो जरूर देकर जाएगा...
कांग्रेस प्रदेश अजय राय की परीक्षा
कांग्रेस ने खुद को यूपी में मजबूत करने की करने की बात कहकर प्रदेश में अजय राय को कमान सौंपी है। पार्टी ने भूमिहार चेहरे पर भरोसा जताकर प्रदेश के ब्राह्मण मतदाताओं को भी साधने की कोशिश है। घोसी विधानसभा उपचुनाव में पार्टी पहले ही सपा को समर्थन देने का एलान कर चुकी है। ऐसे में अजय राय और पार्टी कार्यकर्ता सपा की नैया को पार लगाने में कितने सफल रहते हैं, इस पर सभी की नजर होगी।
सपा के लिए सीट बचाना चुनौती
घोसी में बीजेपी के प्रत्याशी दारा सिंह चौहान हैं जो पिछली बार सपा के टिकट पर विधानसभा पहुंचे थे। उनके मुकाबले में समाजवादी पार्टी से सुधाकर सिंह चुनावी मैदान में उतारा है। ऐसे में अब यह देखना दिलचस्प रहेगा कि सपा अपनी इस सीट को बचा पाने में कामयाब रहती है की नहीं। जानकार मानते हैं कि अखिलेश ने सीट को बचाने के लिए अपने पुराने फॉर्मूले पीडीए (पिछड़ा-दलित-अल्पसंख्यक) पर ही यकीन किया है। घोसी विधानसभा में अधिकतर मतदाताओं की संख्या दलित और मुस्लिमों की है। इसके बावजूद अगर चुनाव परिणाम सपा के पक्ष में नहीं आते हैं तो इसका सीधा असर इंडिया गठबंधन पर भी नजर आ सकता है।
योगी-मोदी के सामने भी होगी गढ़ बचाने की चुनौती
पूर्वांचल को वर्तमान समय में मोदी और योगी का गढ़ माना जाता है। यही वो क्षेत्र है जहां से भाजपा को मतदाताओं का वोट भर भरकर मिलता है। पर इसी पूर्वांचल में मऊ-गाजीपुर-आजमगढ़ ऐसे तीन जिले हैं जहां से भाजपा को निराशा ही हाथ लगी है। ऐसे में क्या इस बार भाजपा अपने सहयोगी दलों सुभाषपा और निषाद पार्टी के बल पर यहां कमल खिला पाने में कामयाब हो पाती है। इस बात का जबाब तो आठ सितंबर को परिणाम के दिन ही मिल पाएगा।
तय होगा इंडिया गठबंधन का भविष्य
अगर यह उपचुनाव समाजवादी पार्टी एक बार फिर जीतने में कामयाब रहती है तो पूरा इंडिया गठबंधन देशभर में लोगों के बीच यह संदेश देने की कोशिश करेगी कि यह सिर्फ सपा की ही नहीं बल्कि पूरे गठबंधन की जीत है। इसी के उलट अगर सपा को हार का सामना करना पड़ता है तो इस गठबंधन को बड़ा झटका भी लग सकता है। कुछ पार्टियां फिलहाल इस गठबंधन में शामिल नहीं हुई हैं और शामिल होने का मन बना रही हैं हो सकता है वो इससे और दूरी बना ले। इन दिनों अखिलेश घोसी की जनसभाओं में यह बताना नहीं भूलते कि हम इंडिया एलायंस से हैं। जो दल कभी हमारे खिलाफ थे, आज वो सभी हमारा समर्थन दे रहे हैं। इस बड़ी लड़ाई में हम सब एक साथ हैं और एकजुट नए बदलाव के लिए लड़ रहे हैं।
2024 लोकसभा चुनाव की तस्वीर होगी साफ!
घोसी विधानसभा वाराणसी और गोरखपुर के बीच में पड़ता है लेकिन भाजपा यहां कमल खिलाने में नाकाम रही है। दरअसल यहां अतिपिछड़ा वर्ग बहुमत में है। ऐसे में भाजपा की रणनीति इन वोटरों को साधने की है। पार्टी खुद को ओबीसी पार्टी दिखाने में कोई कसर नहीं छोड़ रही है। दूसरी ओर इंडिया गठबंधन का जोर भी पिछड़े वोटों को लेकर है। विपक्ष जातिय जनगणना की मांग कर रहा है। ऐसे में यह चुनौती पार करना भाजपा के लिए किसी गहरी खाई से कम साबित नहीं होने वाली। अगर भाजपा यहां जीतती है तो सभी पार्टियों को लेकर यह साफ संदेश होगा कि भाजपा को अब यूपी में कोई नहीं रोक पाएगा।