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Varanasi News: देवालयों में जलेंगे घी के दीप, लगेंगे मेवे और केसर की खीर के भोग
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- विश्वनाथ मंदिर में पितरों के नाम जलेंगे दीप, स्वर्णाभूषण से सजेंगी मां दुर्गा सजेंगी, मणि मंदिर में जलेगा पंच हजारा
संवाद न्यूज एजेंसी
वाराणसी। दीपावली पर बृहस्पतिवार को काशी के देवालय व शिवालय घी के दीपों से जगमग होंगे। मंदिरों के शिखर से लेकर गर्भगृह तक दीपों की लड़ियां सजेंगी। फल और मिष्ठान के साथ मेवे व केसर की खीर व सूरन की सब्जी का भोग लगेगा। मां लक्ष्मी व मां दुर्गा स्वर्ण आभूषणों से सजेंगी।
दिवाली पर हर देवालय व शिवालयों में रातभर घी दीप जलाए जाएंगे। बाबा विश्वनाथ धाम में बाबा के पांचों वक्त की आरती व शृंगार के साथ ही गर्भगृह के अलावा धाम परिसर में सभी विग्रहों पर पांच या 11 दीप जलाए जाएंगे। मां अन्नपूर्णा के पांच दिवसीय स्वर्णमयी प्रतिमा के दर्शन के तहत बृहस्पतिवार को विशेष शृंगार कर विविध नैवेद्य अर्पित कर पूजन होगा। दुर्गाकुंड स्थित दुर्गा मंदिर में मां का स्वर्ण आभूषण से शृंगार होगा। महानिशा पूजा होगी। मां को मालपुए और हलवे का भोग लगेगा।
वहीं, धर्मसंघ में स्थित मणि मंदिर में भी दीपों व विद्युत झालरों से आकर्षक सजावट होगी। पंच हजारा जलाए जाएंगे तो पंचामृत स्नान कराकर नवीन वस्त्र धारण कराया जाएगा। इसके बाद मेवे, केसर की खीर और सूरन की सब्जी का भोग लगेगा। 1008 श्रीसुक्त व कनक धारा का पाठ होगा। वहीं, बाबा कालभैरव मंदिर में भी दीप जलाने के साथ फूलों से शृंगार होगा। बाबा को मिठाई, फल, मेवे, मदिरा और भांग आदि का भोग लगेगा।
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भगवान विष्णु संग मां लक्ष्मी की होगी पूजा
दीपावाली पर काशी में मां लक्ष्मी के साथ भगवान विष्णु की भी पूजा होगी। पंचगंगा घाट स्थित विंदु माधव मंदिर में सुबह से लेकर रात तक शृंगार व पूजन होगा। मक्खन, श्रीखंड, मलाई से शृंगार होगा। मंदिर के महंत मुरलीधर पटवर्धन ने बताया कि मां लक्ष्मी और भगवान विष्णु पीत वस्त्र में होंगे। रात में लक्ष्मी पूजा और मां के हजारनाम कुमकुमार्चन होगा।
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संवाद न्यूज एजेंसी
वाराणसी। दीपावली पर बृहस्पतिवार को काशी के देवालय व शिवालय घी के दीपों से जगमग होंगे। मंदिरों के शिखर से लेकर गर्भगृह तक दीपों की लड़ियां सजेंगी। फल और मिष्ठान के साथ मेवे व केसर की खीर व सूरन की सब्जी का भोग लगेगा। मां लक्ष्मी व मां दुर्गा स्वर्ण आभूषणों से सजेंगी।
दिवाली पर हर देवालय व शिवालयों में रातभर घी दीप जलाए जाएंगे। बाबा विश्वनाथ धाम में बाबा के पांचों वक्त की आरती व शृंगार के साथ ही गर्भगृह के अलावा धाम परिसर में सभी विग्रहों पर पांच या 11 दीप जलाए जाएंगे। मां अन्नपूर्णा के पांच दिवसीय स्वर्णमयी प्रतिमा के दर्शन के तहत बृहस्पतिवार को विशेष शृंगार कर विविध नैवेद्य अर्पित कर पूजन होगा। दुर्गाकुंड स्थित दुर्गा मंदिर में मां का स्वर्ण आभूषण से शृंगार होगा। महानिशा पूजा होगी। मां को मालपुए और हलवे का भोग लगेगा।
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वहीं, धर्मसंघ में स्थित मणि मंदिर में भी दीपों व विद्युत झालरों से आकर्षक सजावट होगी। पंच हजारा जलाए जाएंगे तो पंचामृत स्नान कराकर नवीन वस्त्र धारण कराया जाएगा। इसके बाद मेवे, केसर की खीर और सूरन की सब्जी का भोग लगेगा। 1008 श्रीसुक्त व कनक धारा का पाठ होगा। वहीं, बाबा कालभैरव मंदिर में भी दीप जलाने के साथ फूलों से शृंगार होगा। बाबा को मिठाई, फल, मेवे, मदिरा और भांग आदि का भोग लगेगा।
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भगवान विष्णु संग मां लक्ष्मी की होगी पूजा
दीपावाली पर काशी में मां लक्ष्मी के साथ भगवान विष्णु की भी पूजा होगी। पंचगंगा घाट स्थित विंदु माधव मंदिर में सुबह से लेकर रात तक शृंगार व पूजन होगा। मक्खन, श्रीखंड, मलाई से शृंगार होगा। मंदिर के महंत मुरलीधर पटवर्धन ने बताया कि मां लक्ष्मी और भगवान विष्णु पीत वस्त्र में होंगे। रात में लक्ष्मी पूजा और मां के हजारनाम कुमकुमार्चन होगा।