काशी विश्वनाथ धाम: आज मनाया जाएगा गंगा सप्तमी महोत्सव, ऑनलाइन भी शामिल हो सकेंगे श्रद्धालु
Kashi Vishwanath Dham: काशी विश्वनाथ धाम में आज गंगा सप्तमी महोत्सव मनाया जाएगा। मंदिर में आयोजित महोत्सव में श्रद्धालु ऑनलाइन भी शामिल हो सकेंगे।
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श्री काशी विश्वनाथ धाम में चार मई को दूसरा गंगा सप्तमी महोत्सव मनाया जाएगा। श्री काशी विश्वनाथ मंदिर न्यास द्वारा गंगा सप्तमी महोत्सव के विशिष्ट आयोजन किए जाएंगे। प्रातः काल ललिता घाट पर गंगाभिषेक एवं प्रांगण स्थित गंगा मंदिर में विशेष आराधना संपन्न होगी। सायंकाल में मंदिर चौक स्थित शिवार्चनम मंच से मां गंगा एवं महादेव की स्तुति में संगीतमय भजन संध्या का आयोजन किया जाएगा।
2024 में प्रथम बार श्री काशी विश्वनाथ मंदिर न्यास द्वारा भव्य आयोजन कर गंगा जी का महोत्सव मनाया गया था। इस विशिष्ट आयोजन हेतु संपूर्ण धाम की विशिष्ट साज सज्जा सुंदर सजावट की गई। किन्हीं कारणों से धाम में आयोजित कार्यक्रमों में सम्मिलित न हो सकने वाले श्रद्धालु श्री काशी विश्वनाथ मंदिर न्यास के आधिकारिक सोशल मीडिया हैंडल फेसबुक एवं यूट्यूब चैनल पर ऑनलाइन सहभागिता सुनिश्चित कर सकते हैं।
ब्रह्मकमंडल से गंगा जी के सरिता स्वरूप में प्राकट्य का उत्सव गंगा सप्तमी के रूप में मनाया जाता है। पौराणिक कथानक में गंगा रहस्य की एक कथा के अनुसार पाण्ड्य नरेश पुण्यकीर्ति ने गंगा जी से यह वर मांगा था कि वह प्रतिदिन गंगा मां का देवी स्वरूप में साक्षात दर्शन कर सकें। तब गंगा जी ने पुण्यकीर्ति से कहा कि इसके लिए पुण्यकीर्ति को गंगा जी के घर में निवास करना होगा।
पाण्ड्य नरेश की जिज्ञासा पर गंगा जी ने यह रहस्य बताया कि उनका घर काशी में है। गंगा जी ने बताया कि अपने प्रवाह के क्रम में वह शिव की जटाओं से मुक्त हो हिमालय शिखरों से उतर प्रयाग होते हुए काशी की सीमा पर पहुंचीं। प्रयाग में यमुना की जलराशि को भी धारण कर मां गंगा का स्वरूप अत्यंत विशाल हो गया था। मां गंगा बड़े बड़े नगर, वन, पर्वत इत्यादि प्रवाहित कर मंथर गति से काशी की सीमाओं तक पहुंचीं।
काशी के पुराधिपति भगवान विश्वनाथ जी ने विशाल जलराशि लेकर भूमि को स्वयं में समाहित करती हुई गंगा जी के प्रवाह से काशी के अस्तित्व को संकटापन्न समझ गंगा जी को काशी सीमा पर ही बांध दिया और उनका प्रवाह उलट कर उन्हें उत्तरवाहिनी प्रवाहित कर दिया। इससे गंगा जी का सम्राट सगर के पूर्वजों के भस्म होने के स्थल तक जाने का मार्ग अवरूद्ध हो गया।
भगीरथ को गंगावतरण से अभीष्ट पूर्वजों की मुक्ति का अपना मनोरथ असिद्ध होता जान पड़ा। मनोरथ की सफलता के लिए भागीरथ के अनुनय पर मां गंगा ने भी भगवान विश्वनाथ से प्रवाह मुक्त करने की याचना की। तब भगवान विश्वनाथ ने मुक्त प्रवाह हेतु गंगा जी से तीन वचन लिए, प्रथम यह कि गंगा जी काशी के घाटों को अपने प्रवाह से क्षतिग्रस्त नहीं करेंगी।
दूसरा यह कि गंगा जी का कोई जलीय जंतु काशी में मनुष्यों को क्षति नहीं करेगा। श्री विश्वनाथ जी ने तीसरा वचन यह लिया कि गंगा जी अपने साक्षात देवी स्वरूप में काशी में ही विराजेंगी। तब से काशी ही गंगा जी का घर है।