बलिया में उफनती गंगा ने मचाई तबाही, देखते ही देखते चंद सेकेंड में पानी में समा गया घर, देखें वीडियो
पूर्वांचल में गंगा का जलस्तर एक बार फिर से बढ़ाव पर है। बलिया जिले के बैरिया क्षेत्र के केहरपुर में खतरा बिंदु से एक मीटर ऊपर बह रही गंगा ने रविवार को जमकर तबाही मचाई है। इसमें पेयजल योजना के तहत बनी पानी टंकी, पूमावि सुघरछपरा के साथ ही करीब दर्जनभर आशियाने नदी मे समाहित हो गए।
ग्रामीणों ने बताया कि जलेश्वर दुबे, मुनेश्वर दुबे, रामेश्वर दुबे, प्रभुनाथ ओझा, रामनाथ ओझा, योगेंद्र ओझा, जयप्रकाश ओझा, रमाकांत ओझा, शिवनाथ ओझा, शंभुनाथ ओझा, मंगलदेव ओझा का आशियाना पीड़ितों की नजरों के सामने जमींदोज हो गए। इसे पीड़ित दिल थाम कर मायूस नजरों से देखने के सिवाय कुछ न कर सके।
अचानक शुरू हुए भयंकर कटान के बाद बस्ती मे भगदड़ मच गई। पीड़ितों घरेलू सामान को समेटने में व्यस्त थे। कोई दीवालों पर डाले गए करकट उतार रहा था तो कोई मासूम बच्चों, बुजुर्गों सहित महिलाओं को सुरक्षित स्थान पर ले जाने में व्यस्त था।
प्रशासनिक उदासीनता का आलम यह है कि इतना सब कुछ घटित होने के बाद भी पीड़ितों की सुध लेने की जहमत किसी ने न उठाई। केंद्रीय जल आयोग गायघाट के अनुसार रविवार सुबह ग्यारह बजे नदी का जलस्तर 58.8 मीटर दर्ज किया गया। नदी यहां खतरा बिंदु 57.65 मीटर से एक मीटर 27 सेमी ऊपर बह रही है।
नदी मे एक सेमी प्रति घंटे का बढ़ाव जारी है। उधर, रामगढ़ में गंगा की लहरों ने अब अपना रुख केहरपुर में बना एएनएम सेंटर और हरे राम ब्रम्हचारी जी के समृति स्थल की ओर कर लिया है। जो कभी भी गंगा की लहरों में समा सकता है।
दर्जनभर गांव टापू में तब्दील :
मीडियम फ्लड लेबल पार करने के साथ ही गंगा के किनारे बसे एक दर्जन गांव टापू में तब्दील हो गए हैं। सुघर छपरा, केहरपुर जग छपरा डंगर बाद, बाबूबेल बादिलपुर आदि गांव पानी से घिर गए हैं जहां निकलने के लिए समुचित नावों की व्यवस्था नही है। सबसे बदतर इस्थित केहरपुर की है। वहां के लोग अपने घरों व समानों को भगवान भरोसे छोड़ दिया है।
जिलाधिकारी ने किया निरीक्षण :
जिला अधिकारी भवानी सिंह खंगरौत ने केहर पुर गांव में लगे भीषण कटान का सच दुबैछपरा रिंग बंधे से ही देखा। दुबैछपरा से उनका काफिला लौट गया। इसके साथ ही बैरिया विधायक सुरेंद्र सिंह ने भी बाढ़ वाले इलाकों का दौरा किाय। इस दौरान उन्होंने बाढ़ पीड़ितों की हर संभव सहायता के लिए अधिनस्त अधिकारियों को निर्देश दिए। हालांकि केहरपुर के लोग भी उनके यहां आने की आस लगाए थे पर उन्हें निराशा हुई।