यूपी: सात जिलों के जुआरियों का फ्लैट में होता था जुटान, 130 किमी दूर से आते थे जुआ खेलने; संचालत का 10 प्रतिशत
सात जिलों के जुआरियों का एक फ्लैट में जुटान होता था। पुलिस के अनुसार, जुआ खेलने के लिए 130 किलोमीटर दूर से भी लोग आते थे। संचालक प्रत्येक बाजी पर 10 प्रतिशत कमीशन लेता था। रकम खत्म होने पर जुआरी अपने परिचितों से पैसे मंगाते थे। पुलिस के मुताबिक, महीने में करोड़ों का खेल और एक दिन में 30 लाख से अधिक की बाजी लगती थी।
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रथयात्रा के पास कुसुमकुंज फ्लैट में एसओजी- 2 के छापा मारने के बाद गिरफ्तार 47 लोगों का पुलिस ने मेडिकल कराया और एसीजेएम -4 कोर्ट में पेश किया। कोर्ट ने सभी आरोपियों को 20-20 हजार के बंधपत्र पर जमानत दे दी। वहीं, इस बड़े नेटवर्क की जांच भी पुलिस ने तेज कर दी। पुलिस की जांच में सामने आया कि वाराणसी समेत पांच जिलों से जुआरियों का फ्लैट में जुटान होता है। यहां जुए का खेल 24 घंटे चलता। हारने बाद पैसे मंगाए जाते थे।
जुआ संचालक को 10 प्रतिशत कमिशन मिलता था। इस हिसाब से रोजाना 2.50 लाख रुपये कमिशन का खेल था। गिरफ्तार अभियुक्तों में कुछ ऐसे भी है जो जुआ खेलने के लिए होटल व लॉज में रुकते थे। छापेमारी के दौरान फड़ से बरामद राशि की गिनती पूरी होने पर कुल 21 लाख छापेमारी में 21 लाख 11 हजार रुपये नकद बरामद हुए। गिरफ्तार आरोपियों में भदोही, चंदौली, आजमगढ़, सोनभद्र, प्रयागराज और मिर्जापुर के अलावा वाराणसी के है।
जांच में सामने आया कि फ्लैट में जुए का खेल किसी तय समय तक सीमित नहीं था। जुआरी लगातार 24 घंटे तक दांव लगाते थे। जुआ खेलने वाले पैसे खत्म होने पर अड्डा छोड़ने के बजाए आसपास के होटल और लॉज में रुकते, परिचितों या घरवालों से पैसे मंगाते और फिर वापस पहुंचकर जुए में लगा देते थे। पुलिस के मुताबिक, जुए से होने वाली कमाई के बंटवारे का भी इंतजाम था।
संचालक विशाल सिंह पूरी रकम का 10 प्रतिशत लेता था,अपने लोगों में बांटता था। उसकी गिरफ्तारी के लिए दबिश दी जा रही है। पुलिस अब यह पता लगा रही है कि रकम का हिसाब कौन रखता था और भुगतान किस माध्यम से किया जाता था।
पुलिस अब नियमित रूप से आने वाले जुआरियों और गिरोह के संपर्कों की सूची तैयार कर रही है। साथ ही यह भी जांच की जा रही है कि फ्लैट कितने समय से इस्तेमाल हो रहा था और अब तक कितनी रकम दांव पर लग चुकी है।
पुलिस की कार्रवाई के बाद बरामद नकदी को कब्जे में लेकर आरोपियों के खिलाफ विधिक कार्रवाई की गई। पुलिस अब रकम के स्रोत, जुए के नेटवर्क और गिरोह से जुड़े अन्य सदस्यों की भूमिका की जांच कर रही है। थाना प्रभारी शिवकांत मिश्रा ने बताया कि प्रकरण की गहनता से जांच की जा रही है। खेल से जुड़ी कुछ अहम जानकारी भी हाथ लगी है।
53 फोन को पुलिस ने की जांचा
पुलिस ने गिरफ्तार आरोपियों के मोबाइल फोन को जब्त कर लिया है। आरोपियों के कॉल डिटेल्स खंगाली, टाइमिंग और लोकेशन की जांच की।आरोपी किस-किस के संपर्क में थे जुए के फड़ से किससे बात होती थी। अब वह फ्लैट में आते और जाने का समय क्या था। इस बीच पैसे का श्रोत क्या रहा इसकी गहना से जांच पुलिस कर रही है। - रोशन कुमार, रफीक खान और विजय जायसवाल खेल के मास्टरमाइंड
पुलिस की पूछताछ में आरोपितों ने बताया कि फ्लैट मालिक विशाल सिंह के यहां रुपये लेकर जुआ खिलाया जाता था। आरोप है कि रोशन कुमार, रफीक खान और विजय जायसवाल उसके सहयोगी थे और जुआ खेलने की व्यवस्था कराने के एवज में प्रतिदिन रुपये लेते थे। मौके से विशाल सिंह के नाम का ड्राइविंग लाइसेंस, पैन कार्ड और विभिन्न बैंकों के डेबिट व क्रेडिट कार्ड मिलने की बात भी पुलिस ने कही है। सिगरा, लक्सा, भेलूपुर, शिवपुर, दशाश्वमेध और लोहता से आने वालों की संख्या ज्यादा रहीं।
इनकी हुई गिरफ्तारी
रोशन कुमार, रफीक खान, विजय जायसवाल, आशुतोष गुप्ता, आनंद कुमार गुप्ता, अजय कुमार, अजय चौहान, अजीत कुमार चौरसिया, दीपक चौहान, महेश यादव, सतीश गुप्ता, आजम, राज कुमार, अरुण सोनकर, मोहित चौरसिया, सुमित मौर्या, असगर अली, सुनील कुमार सिंह, अमित शर्मा, अजहरूद्दीन, अंसुल पटेल, विनोद गिरी, विकास कुमार जायसवाल, राजू सेठ, हेमंत जायसवाल उर्फ मामा, सौरभ मौर्या, महेंद्र जायसवाल, रितिक सेठ, राजवीर सिंह, श्याम साहनी, बृजेश जायसवाल, अमन शर्मा उर्फ सोनू मिश्रा।
विशाल सिंह के दस्तावेजों की जांच: ड्राइविंग लाइसेंस, पैन कार्ड और विभिन्न बैंकों के डेबिट व क्रेडिट कार्ड की बरामदगी पुलिस ने की है। पुलिस आरोपी के रोजाना ट्रांजेक्शन की जांच में जुट गई है।