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घरों से गलियों तक गूंजी या हुसैन की सदाएं

Thu, 19 Aug 2021 12:53 AM IST
Varanasi Bureau वाराणसी ब्यूरो
Updated Thu, 19 Aug 2021 12:53 AM IST
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From homes to streets echoed or Hussain's perpetuities
आठवीं मुहर्रम पर मुस्लिम इलाकों में या सकीना या अब्बास और या हुसैन की सदाएं गूंजती रहीं। घरों से लेकर गलियों तक गम ए हुसैन पर रस्म अदायगी की गई। कोविड प्रोटोकॉल का पालन करते हुए शहर में ना तो जुलूस निकले और ना ही ताबूत, अलम व दुलदुल उठाया गया। बुधवार को शहर भर में मजलिसों के साथ ही घरों के इमामबाड़ों पर आयोजन हुए। शिया समुदाय के घरों में हाजिरी की नजर भी दिलाई गई। वहीं दरगाहे फातमान में भारत रत्न उस्ताद बिस्मिल्लाह खां की परंपरा को आगे बढ़ाते हुए उनके पौत्र फातमान में आफाक हैदर और नासिर अब्बास ने शहनाई पर नौहाख्वानी पेश की।
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बुधवार को शिया समुदाय ने आठवीं मुहर्रमपर हजरत अब्बास का गम मनाया। दरगाह ए फातमान में मौलाना कमर सुल्ताना सुल्तान, हैदर कीरतपुरी और शोएब नौगानवी ने मजलिस को खिताब किया। उन्होंने जनाबे सकीना, हजरत अब्बास और इमाम हुसैन के जिक्र से हर किसी को गमगीन कर दिया। शराफत हुसैन और लियाकत हुसैन ने सोज ओ नौहा पढ़ा। पितरकुंडा पर मजलिस को खिताब करते हुए हाजी फरमान हैदर ने कहा कि हजरत अब्बास को वसीला बनाकर की गईं दुआएं कभी खाली नहीं जाती हैं।
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कालीमहाल में हसन अब्बास के इमामबाड़े पर मौलाना अलकमी जैदी ने मजलिस को खिताब करते हुए कहा कि इस्लामी फौज का जो अलम जंग ए खैबर में अली को मिला था वह कर्बला में हमेशा के लिए अब्बास के नाम से जाना जाता है। हजरत अब्बास अपनी भतीजी के लिए नहर से पानी लाने गए मगर यजीदी फौजियों ने उनको शहीद कर दिया। इसीलिए उनकी शहादत के साथ उनकी भतीजी जनाबे सकीना की प्यास को भी याद किया जाता है।
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मजलिस में समर बनारसी तथा शाह आलम बनारसी ने कलाम पढ़े और मजाहिर हुसैन ने सोज पढ़ी। अंसार बनारसी ने नौहाख्वानी किया। शाम को डॉ. नाजिम के अजाखाने पर मजलिस में मौलाना फज्ल ए मुमताज ने खिताब किया। शाम में अजाखाना ए शबीर ओ सफदर पर मौलाना कमर सुल्तान ने फिर अजादारों को गमगीन किया। परंपरागत रूप से आज शहर में दालमंडी, शिवपुर, शिवाला, चौहट्टा, दोषीपुरा में सात जुलूस उठाए जाते हैं।
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