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वाराणसीः स्वतंत्रता संग्राम सेनानी धन्य कुमार जैन का निधन ,जेल में फहराया था तिरंगा
Sat, 17 Apr 2021 08:34 PM IST
गीतार्जुन गौतम
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, वाराणसी
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, वाराणसी
Published by: गीतार्जुन गौतम
Updated Sat, 17 Apr 2021 08:34 PM IST
सार
कैदियों की वर्दी, खपरैल और आम के पतों से बना तिरंगा जेल में फहराया था
मुल्तानी मिट्टी गूंथकर पैड बनाया और बैगनी स्याही से अंग्रेजो के जुल्मों की दास्तान लिखी थी
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वाराणसी में शनिवार को भदैनी स्थित स्वतंत्रता संग्राम सेनानी धन्य कुमार जैन का आज सुबह देहावसान हो गया है।
- फोटो : अमर उजाला
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विस्तार
वाराणसी के भदैनी निवासी 99 वर्षीय स्वतंत्रता संग्राम सेनानी धन्य कुमार जैन का शनिवार को निधन हो गया। शुक्रवार को अचानक उनकी तबीयत बिगड़ी। जिसके बाद उन्हें इलाज के लिए भर्ती कराया गया। जिलाधिकारी कौशल राज शर्मा और पुलिस कमिश्नर ए सतीश गणेश ने उन्हें चिकित्सा सुविधा मुहैया कराई। बावजूद इसके उनकी हालत बिगड़ती चली गई। निधन की सूचना मिलने के बाद उन्हें राजकीय सम्मान के साथ सलामी दी गई।
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भदैनी के शिवकुमार के अनुसार मध्य प्रदेश के सागर जिले के खोरई गांव में जन्मे स्वतंत्रता संग्राम सेनानी के बड़े भाई महेंद्र कुमार नयाचार्य भदैनी स्थित स्यादवाद विद्यालय के अध्यापक थे। प्राथमिक शिक्षा के बाद धन्य कुमार बनारस चले आए। उसी दौरान अगस्त क्रांति की शुरुआत हुई और समाचार प्रकाशन पर रोक लगा दी गई। धन्य कुमार ने मुल्तानी मिट्टी को गूंथकर पैड बनाया और बैगनी रंग के स्याही से अंग्रेजी हुकूमत के खिलाफ उनके जुल्मों की दास्तान लिखकर बांटने लगे।
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गोदौलिया स्थित एक सिनेमा घर के पास से उन्हें पकड़ लिया गया और चार महीने की सजा सुनाई गई। जिला जेल में सुभाष चंद्र बोस के सेनापतियों में से एक देवकीनंदन दीक्षित से मिले। 1942 में 26 जनवरी को कैदियों की वर्दी फाड़ कर खपरैल और आम के पत्तों से तिरंगा बना दिया। साथ ही दीवारों पर खपरैल से भारत माता की कलाकृति बनाई। आम के पेड़ पर तिरंगा फहराया उसके बाद अंग्रेजों ने उन्हें पकड़ लिया। इसके बाद भी वे लगातार आजाद होने तक देशवासियों को जगाते रहे।
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