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छुट्टा पशु बने आफत: हादसे में एक साल में हुईं चार मौतें, 50 से ज्यादा घायल; CM के आगमन पर सड़क पर आ गए थे पशु

Wed, 19 Mar 2025 02:42 PM IST
प्रगति चंद अमर उजाला नेटवर्क, वाराणसी।
अमर उजाला नेटवर्क, वाराणसी। Published by: प्रगति चंद Updated Wed, 19 Mar 2025 02:42 PM IST
सार

वाराणसी जिले में छुट्टा पशु बने आफत बने हैं। इनके चलते कई बार लोग हादसे का सिकार हो जाते हैं। इसी क्रम में एक साल में हुए हाजसों में चार मौतें हो चुकी हैं। जबकि 50 से ज्यादा लोग घायल हो चुके हैं। 

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Four people died in accidents caused by stray animals in Varanasi in one year
छुट्टा पशु बने आफत - फोटो : अमर उजाला

विस्तार

सड़कों पर घूमते छुट्टा पशु आफत बने हैं। ऐसा कोई चट्टी-चौराहा नहीं जहां छुट्टा पशुओं का जमावड़ा न लगता हो। नगर निगम का पशु पकड़ो दस्ता होने के बावजूद मुख्यमंत्री आगमन के दौरान कबीरचौरा में सड़क पर पशु आ गए। इस मामले में दो बेलदार को निलंबित और 14 आउटसोर्सिंग कर्मचारियों को जिम्मेदार ठहराते हुए सेवा से विरत कर दिया। इसी से पशु दस्ते की कार्यप्रणाली का अंदाजा लगाया जा सकता है। छुट्टा पशुओं के चलते हुए हादसों में एक साल में 4 मौतें और 50 से अधिक घायल हो चुके हैं।

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नगर की टीम ने एक साल में 3000 छुट्टा पशु पकड़े और जुर्माना के रूप में 11.10 लाख रुपये वसूले। इन छुटटा पशुओं के चलते आए दिन लोग दुर्घटना के शिकार होते हैं। पशु पकड़ो दस्ते में कुल 4 गाड़ियां और 20 कर्मचारी हैं। इन पर वार्षिक लाखों रुपये खर्च होते हैं। दस्ते को हाल ही में दो हाइड्रोलिक प्लेटफार्म युक्त वाहन भी मिले हैं।

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पशु पालकों से वसूला जाता जुर्माना

नगर निगम सांड़ के अलावा गाय, कुत्ते व सुअर को पकड़ना है। सांड़ व गाय को तो गोशाला और कांजी हाउस में रखा जाता है। प्रत्येक पशु के चारे का धन पशु पालक से ही वसूला जाता है। यदि पशु पालक आ गया तो जुर्माना वसूल कर पशुओं को छोड़ दिया जाता है। शहर के मुख्य मार्ग पर छुट्टा पशुओं के चलते जाम लगता है।

कई इलाकों में पशु बने खौफ
कैंट से लगायत काशी, मण्डुवाडीह, शिवपुर व सारनाथ रेल स्टेशनों, बस स्टैंडों के पास रात में जमने वाला पशुओं का झुंड आफत बने हैं। गोदौलिया, चौक, मैदागिन, विश्वेश्वरगंज, लहुराबीर, मलदहिया, कैंट, सिगरा, रथयात्रा, लंका सहित अन्य मुख्य मार्गों की पटरियां अतिक्रमण की शिकार तो हैं ही, ऊपर से पशुओं का जमावड़ा लोगों को परेशान कर रहा है। इन पर जमा होने वाले पशु खौफ बन गए हैं। स्थानीय लोगों का कहना है कि पशुपालक दूध निकाल कर फिर सड़कों पर छोड़ देते हैं।

क्या बोले अधिकारी

नगर निगम की ओर से लगातार अभियान चलाया जा रहा है। न केवल पशुओं को पकड़ा जा रहा है बल्कि पशुपालकों से जुर्माना भी वसूला जा रहा है। कुत्ते, बंदर, सांड़, गाय को पकड़ कर उचित स्थान पर भेजा जाता है।
-डॉ. संतोष पाल, पशु चिकित्साधिकारी नगर निगम
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